Home विज्ञान और टेक्नोलॉजी किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं तो अभी जानिए ये टिप्स

किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं तो अभी जानिए ये टिप्स

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गुर्दे स्वस्थ जीवन के लिए बहुत ज़रूरी हैं. पिछले कुछ सालों में किडनी (गुर्दे) से जुड़ी बीमारियों से बहुत लोग पीड़ित हुए हैं। गुर्दे की बीमारी यदि ठीक न हो तो गुर्दे खराब हो जाते हैं और डायलिसिस करना पड़ता है तथा गुर्दा प्रत्यारोपण का ऑपेरशन भी करना पड़ सकता है. बावजूद इसके प्राय: लोग किडनी से जुड़ी समस्याओं के लक्षण समझ नहीं पाते और डॉक्टर के पास तब जा पाते हैं जब समस्या अधिक बढ़ चुकी होती है। किडनी हमारे शरीर से गंदगी बाहर निकालने का एक बहुत अहम हिस्सा हैं।

दोनों किडनियों के ज़रिये शरीर का सारा खून फ़िल्टर होकर साफ होता है। किडनियों द्वारा रिलीज किए गए हार्मोंस द्वारा ब्लड प्रेशर नियंत्रित होता है और हड्डियों के लिए आवश्यक विटामिन डी का निर्माण किया जाता है। शरीर में पानी और खनिज लवण के संचय सम्बन्धी कार्य भी गुर्दे ही करते हैं. क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) बहुत तेज़ी से समाज में बढ़ गयी है. इस का अर्थ है किसी भी पुराने कारणवश (जैसे डायबिटीज, रक्तचाप इत्यादि) किडनी का न काम करना.

आइये जानते हैं कि आपको ऐसी अवस्था में किन किन बातों का बेहद ध्यान रखना चाहिए.

अचानक त्वचा का फटना, लाली होना, सूखापन होना और खारिश महसूस होना शरीर की गंदगी के एकत्रित होने के परिणाम हो सकते हैं। किडनी के काम करना बंद करने से शरीर में कैल्शि‍यम और फॉस्फोरस की मात्रा प्रभावित होती है, जिससे खारिश होने लगती है।

अपनी किडनी की बीमारी के बारे में सभी जानकारी इकट्ठा करिए। ध्यान रखें कि यह जानकारी आपको इंटरनेट के द्वारा स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी एवं प्रतिष्ठित वेबसाइट से मिल सकती है. यह जानकारी आप के डॉक्टरों तथा मेडिकल टीम से मिल सकती है या किसी मरीज अथवा उसके परिवार से बात करके मिल सकती हैं। जानकारी लेने की कोशिश लगातार करते रहिए चाहे आपको इसके लिए दूसरों से सवाल पूछने पड़े, किताबें पढ़नी पड़े या ज्ञानवर्धक वीडियो देखने पड़े। जितना आप अपनी बीमारी के बारे में जान पाएंगे उतनी ही अच्छी तरह से आप इसके इलाज में अपना योगदान दे सकेंगे।

अपनी दवाओं के बारे में भली-भांति जानकारी रखिए। आपको मालूम होना चाहिए कि आप की दवाओं के नाम क्या है, उनकी सही खुराक क्या है, उनके कौन कौन से सब्सटीट्यूट हैं, वह दिन में कितनी बार लेनी है तथा हर दवा का उद्देश्य क्या है। इंटरनेट में स्वस्तय से सम्बंधित भरोसेमंद वेबसाइट देखते रहिए ताकि यदि कोई नई दवा मार्केट में आए तो आपको उसके बारे में जानकारी हो।

जैसे ही आप अपने शरीर में कुछ भी अलग महसूस करें अपने डॉक्टर से संपर्क कर सही कारण का पता लगाए। इस प्रकार समस्या को विकराल रूप लेने से पहले छोटे रूप में ही सुलझाया जा सकता है।

दवा के साइड इफेक्ट होना एक सामान्य बात है। यदि आपको अपनी दवाओं के बारे में जानकारी है तो आप साइड इफेक्ट के लिए मानसिक रूप से तैयार रह सकते हैं तथा किसी भी दवा के दुष्परिणाम को छोटी अवस्था में ही पहचान कर अपने डॉक्टर को बता सकते हैं। हो सकता है डॉक्टर आप की दवा बदल दे या उसकी खुराक कम कर दे।

गुर्दे की बीमारी में ज्यादातर खून की जांच बार-बार होती है। आपको हर जांच के बारे में आइडिया होना चाहिए। आपको यह पता होना चाहिए कि कौन-कौन से टेस्ट जल्दी-जल्दी किए जाते हैं तथा उनके रिजल्ट का किस प्रकार इलाज पर असर पड़ता है। आप अपने डॉक्टर से इस बारे में बात कर सकते हैं कि किस तरह लैब  रिपोर्ट का रिजल्ट अच्छा पाया जाए। किडनी की बीमारी में लैब टेस्ट की बहुत महत्व है अतः अपने फोन के कैलेंडर में चिन्हित करें कि आपको किस दिन लैब टेस्ट के लिए अपने रक्त या पेशाब का सैंपल देना है।

यदि आपको अपने शरीर में किसी भी तरह के बदलाव नजर आ रहे हैं तो इसके बारे में तुरंत अपने डॉक्टर या उनकी टीम से बात करें। हो सकता है आप यह सोच कर ना करें कि यह बहुत छोटा बदलाव है शायद खुद ब खुद ठीक हो जाएगा। पर ध्यान रखे हैं बड़े से बड़ा साइड इफेक्ट भी शुरुआती अवस्था में छोटा होता है। जिसका यदि समय पर पता लगे तो शरीर को होने वाले गंभीर नुकसान उसे बचाया जा सकता है।

Nearly ten percent of India's people suffer from chronic kidney disease and many undergo dialysis

अपने डाइटिशियन के संपर्क में रहें।अपने डॉक्टर द्वारा लिखे हुए सारे प्रिसक्रिप्शन डाइटिशियन को दिखाएं ताकि वह आपको यह बता सके कि आप का भोजन किस प्रकार का होना चाहिए। किडनी की बीमारी में आहार का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। डाइटिशियन के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि आपकी किडनी की बीमारी किस स्टेट की है आपका सामान्य स्वास्थ्य कैसा है तथा आपको अन्य कौन-कौन सी बीमारियां हैं। यह सब जानने के बाद डायटिशियन आप के लिए उपयुक्त डाइट प्लान प्रदान कर सकती है। आप को जो चीजें खाने में पसंद और नापसंद हैं इसकी लिस्ट अपने डाइटिशियन को जरूर दें। हर हफ्ते अपने डाइटिशियन से एक बार जरूर बात करें तथा अपनी अभिरुचि जाहिर करें।

गुर्दे की बीमारी का यह अर्थ नहीं है कि आप बिस्तर ही पकड़ ले। आप को यथासंभव व्यायाम करना तथा सैर करना जरूरी है। बहुत भारी कार्य ना करें पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपने शरीर में गतिविधि बनाए रखें। अपने व्यायाम करने का एक नियम बनाएं तथा कोशिश करें कि एक्सपर्ट देखरेख में ही व्यायाम करें। इसके लिए आप अपने डॉक्टर गया इलाज की टीम से मशवरा ले सकते हैं। ध्यान रखें कि एक चलते फिरते शरीर में पोषक तत्व अधिक लाभ देते हैं तथा दवाएं भी ज्यादा बेहतर काम करती हैं।

कोशिश करें कि आप अपना प्रोफेशनल काम ना छोड़े। यदि आप नौकरी पर जाते हैं तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें कि किस तरह आप यह जारी रख सकते हैं। और अगर आप अपना स्वयं का काम करते हैं तो हर संभव कोशिश करें कि आप अपना काम करते रहे। किडनी की बीमारी का अर्थ यह है कि आप सब कुछ छोड़ कर घर पर बैठ जाएं। आपको इस बीमारी के साथ एडजस्टमेंट करने की जरूरत है और यदि आप काम में व्यस्त रहेंगे तो आपका ध्यान बीमारी तथा इससे जुड़ी हुई नकारात्मक बातों की तरफ कम से कम जाएगा।

अपने डॉक्टर या मेडिकल टीम से जानिए कि आपका आदर्श ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए।उनसे यह भी पूछा कि आप अपनी तरफ से ऐसा क्या कर सकते हैं कि आपका ब्लड प्रेशर सामान्य रहे। वह जो भी सलाह देते हैं उसे मांगे सिर्फ उस वक्त के लिए नहीं बल्कि दिन में 24 घंटे के लिए।गुर्दे का सीधा संबंध ब्लड प्रेशर से होता है तथा ब्लड प्रेशर यदि सामान्य रहे तो इससे ना सिर्फ गुर्दे की बीमारी में लाभ मिलेगा बल्कि आपकी सेहत भी ठीक रहेगी। साथी किसी प्रकार के दुष्परिणाम की संभावना भी कम रहेगी।

यदि आपको डायबिटीज या मधुमेह की बीमारी है तो आप रक्त में शुगर की मात्रा को संतुलित रख कर अपनी गुर्दे की बीमारी को बढ़ने से बचा सकते हैं। इसके लिए आपको खानपान में मीठे का पूरा परहेज करना चाहिए तथा अपने डायबिटीज की सभी दवाएं समय से लिंग चाहिए। यह बात जगजाहिर है कि डायबिटीज में शुगर कंट्रोल में रखने में व्यायाम की महत्वपूर्ण भूमिका है। आपको अपने डॉक्टर एवं डाइटिशियन से बात करनी चाहिए कि वह कौन-कौन से तरीके हैं जिससे आप अपने रक्त की शुगर को संतुलन में रख सकते हैं।

kidney transplant is the main operation for patients of chronic kidney diseasee

आपको गुर्दे की बीमारी से होने वाले सभी दुष्परिणामों के बारे में अच्छी तरह पता होना चाहिए जैसे के एनीमिया या खून की कमी, शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाना शरीर में पोटैशियम की मात्रा बढ़ जाना ब्लड प्रेशर बढ़ जाना शरीर में एसिड की मात्रा बढ़ जाना कई प्रकार की हड्डियों की बीमारी हो जाना इत्यादि। इनमें से किसी भी कॉम्प्लिकेशन को सही लाभ टेस्ट या जांच की मदद से समय पर मालूम किया जा सकता है तथा समय पर ही पहचान लिए जाने पर यह कॉम्प्लिकेशन गंभीर परिणाम नहीं देते एवं रोकथाम करना संभव होता है।

यदि आपकी किडनी की बीमारी बहुत गंभीर है तथा आपके डॉक्टरों ने आपको गुर्दे के ट्रांसप्लांट की सलाह दे रखी है तो आप हर संभव कोशिश करिए की गुर्दे के प्रत्यारोपण का ऑपरेशन सही समय पर करवा सके। इसके लिए आप अपने परिवार, मित्रों तथा निकट समाज के संपर्क में रहें, एवं गुर्दे के प्रत्यारोपण में समर्पित एनजीओ से भी सलाह लें।

यदि आप डायलिसिस करवाते हैं तो हमेशा डायलिसिस के लिए समय पर पहुंचे सभी निर्देशों का पालन करें एवं डायलिसिस के बाद तथा पहले होने वाले खून की जांच को समय से कराएं। डायलिसिस की प्रक्रिया शुरू में कुछ अजीब लग सकती है पर इससे अंततः कोई तकलीफ नहीं होती। डायलिसिस के दौरान किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इसके बारे में आप अपने डॉक्टर तथा डायलिसिस टेक्निशियन एवं नर्स से बातें करें।

किसी भी बीमारी से लड़ने में भावनात्मक बल की बहुत बड़ी भूमिका है। आपकी किडनी की बीमारी मैं इतनी शक्ति नहीं होनी चाहिए कि यह आप को झुका दे या गिरा दे। आप इसे एक बीमारी की तरह ही लें तथा के मनोबल पर हावी ना होने दें। जब कभी आप मन से कमजोर महसूस कर रहे हो तो अपने परिवार, मित्रों, डॉक्टर या अन्य मरीजों से बात करें।

डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा अलग से ना लें। ऐसा देखा जाता है कि मरीज एलोपैथिक दवा के साथ-साथ होम्योपैथिक दवा या आयुर्वेदिक दवा या अन्य कोई हकीम द्वारा दी हुई पुड़िया लेना शुरू कर देते हैं। इन चीजों के गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं। गुर्दा शरीर का एक बहुत अभिन्न अंग है तथा कोई भी सप्लीमेंट जो आपके डॉक्टर ने नहीं सुझाया है आपके गुर्दे को और नुकसान पहुंचा सकता है।

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