जानिए टी-ट्री ऑयल से होने वाले 13 वैज्ञानिकों द्वारा प्रमाणित लाभ

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tea tree oil

टी ट्री ऑयल (Tea-Tree Oil) एक आवश्यक तेल की श्रेणी में आने वाला महत्वपूर्ण तेल होता है। जिसका उपयोग त्वचा, बालों और नाखूनों को स्वस्थ रखने सहित अन्य कई उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। टी ट्री ऑयल से होने वाले लाभ वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किए जा चुके हैं। साथ ही यह तेल ज्यादा महंगा भी नहीं होता और यदि इसका इस्तेमाल दिए गए निर्देश के अनुसार किया जाए तो मिलने वाले परिणाम अत्यंत लाभप्रद होतें हैं। इस लेख के द्वारा टी ट्री ऑयल के 13 ऐसे उपयोग बताए गए हैं जो रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत काम आते हैं साथ ही यदि आप निर्देशों के अनुसार टी ट्री ऑयल का उपयोग करें तो यह अत्यंत सुरक्षित और प्रभावकारी होता है।

Table Of Contents
  1. टी ट्री तेल क्या होता है और यह कैसे काम करता है?
  2. टी ट्री ऑयल नाखून लगने वाले फंगस से छुटकारा दिलाता है
  3. टी ट्री ऑयल त्वचा इन्फ्लेमेशन से राहत दिलाता है
  4. टी ट्री ऑयल डैंड्रफ को कम करता है
  5. टी ट्री ऑयल सोरायसिस से छुटकारा दिलाने में लाभदायक है
  6. टी ट्री ऑयल का उपयोग पैरों के संक्रमण को कम करने के लिए भी किया जाता है
  7. टी ट्री ऑयल का उपयोग केमिकल फ्री माउथवाश बनाने के लिए भी किया जाता है
  8. टी ट्री ऑयल बेहतर क्लींजर के रूप में कार्य करता है
  9. छोटी मोटी चोट के लिए टी ट्री ऑयल बेहतर एंटीसेप्टिक के रूप में कार्य करता है
  10. टी ट्री ऑयल कीटनाशक के रूप में भी कार्य करता है
  11. टी ट्री ऑयल मुंहासे से लड़ने में मदद करता है
  12. शरीर से आने वाली प्राकृतिक दुर्गंध को दूर करने के लिए टी ट्री ऑयल का उपयोग करें
  13. टी ट्री ऑयल के उपयोग से घाव जल्दी भरता है
  14. टी ट्री ऑयल का उपयोग हैंड सेनिटाइजर बनाने में भी किया जाता है
  15. टी ट्री ऑयल का उपयोग करते समय ध्यान रखने योग्य सावधानियां

टी ट्री तेल क्या होता है और यह कैसे काम करता है?

टी ट्री ऑयल (Tea-Tree Oil) का उपयोग सदियों से एक पारंपरिक औषधि के रूप में किया जाता रहा है। ये मूल ऑस्ट्रेलियाई लोग तेल निकालने के लिए चाय के पेड़ के पत्तों को कुचलते हैं, जिसे बाद में खांसी और जुकाम का इलाज करने के लिए इसका उपयोग करते हैं। कभी-कभी त्वचा में किसी प्रकार के विकार को ठीक करने के लिए वे लोग इस तेल को सीधे त्वचा पर भी लगाकर इस्तेमाल करते हैं। आज किस समय में 100% अनडाइल्यूटेड अर्थात  “साफ” टी ट्री ऑयल आसानी से उपलब्ध है। टी ट्री ऑयल का डाइल्यूटेड रूप भी आसानी से मिल जाता है जो त्वचा के हिसाब से बनाए गए उत्पादों में 5-50% विविधता के अनुसार मिलता है। टी ट्री ऑयल में टेरपिनन-4-ओल (Terpinen-4-ol) सहित कई यौगिक पाए जाते हैं, जिन्हें कुछ प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस और कवक को मारने के लिए प्रभावी बताया गया है। टेरपिनन-4-ओल (Terpinen-4-ol) आपकी श्वेत रक्त कोशिकाओं की गतिविधियों को बढ़ाता है, जो कीटाणुओं से लड़ने में मदद करतीं है। टी ट्री ऑयल में पाया जाने वाला यह गुण इस तेल को बैक्टीरिया और त्वचा के फंगल इन्फेक्शन की स्थिति का इलाज करने, संक्रमण को रोकने और उपचार को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक उपचार माना जाता है। इस बहुमुखी तेल के अन्य कई उपयोगों और लाभों के विषय में जानने के लिए आगे पढ़ें।

टी ट्री ऑयल नाखून लगने वाले फंगस से छुटकारा दिलाता है

फंगल संक्रमण, नाखूनों में होने वाला एक आम संक्रमण है। हालांकि यह खतरनाक नहीं होते, परंतु देखने में बहुत भद्दे लगते हैं। आज के समय में ऐसी बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं जो नाखून में लगे इस फंगस के इलाज के लिए कारगर होती हैं। परंतु कुछ लोग प्राकृतिक दृष्टिकोण को ही वरीयता देते हैं। ऐसा देखा गया है कि टी ट्री ऑयल नाखूनों में होने वाले इस फंगस से छुटकारा दिलाने में बहुत मददगार होता है। यदि आप चाहे तो अकेले टी ट्री ऑयल का उपयोग कर सकते हैं या फिर इसे अन्य दूसरे प्राकृतिक उपचारों के साथ मिलाकर भी नाखून के फंगस के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। कुछ शोध बताते हैं कि कुछ लोगों पर किए गए एक अध्ययन में जिनमें नाखूनों के फंगस से परेशान लोगों ने 6 महीने तक दवा के रूप में टी ट्री ऑयल का उपयोग किया और अध्ययन के अंत में पाया गया कि हर समूह के 60% लोगों को आंशिक अथवा पूर्ण रूप से नाखूनों के इस फंगस से आराम मिल गया। आप चाहे तो टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदों का उपयोग कर सकते हैं या फिर इसे नारियल तेल के साथ में बराबर की मात्रा में मिलाकर प्रभावित क्षेत्र पर लगा सकते हैं। यह फंगस को फैलने से रोकता है।

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टी ट्री ऑयल त्वचा इन्फ्लेमेशन से राहत दिलाता है

त्वचा में किसी भी प्रकार के जलन का होना सामान्यता किसी एलर्जी की वजह से होता है। एलर्जीन के संपर्क में आने से त्वचा में लाल रंग के चकत्ते उभरना, खुजली और कभी-कभी त्वचा में दर्द होने लगता है। पशुओं और मानवों पर किए गए अनुसंधानों से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि टी ट्री ऑयल (Tea-Tree Oil) को त्वचा के इन क्षेत्रों में लगाने से काफी लाभ मिलता है। एक अध्ययन में त्वचा से जुड़ी सूजन के लिए विभिन्न उपचारों के प्रभावों की तुलना टी ट्री ऑयल से की गई। जिसमें टी ट्री ऑयल को 40% तक इन लक्षणों को कम करने में कारगर पाया गया। यह दवाओं की तुलना में काफी अधिक था। इसके अलावा, टी ट्री ऑयल  खुजली, लालिमा और सूजन को कम करके कीड़े के काटने से भी राहत प्रदान करता है। सूजन वाली त्वचा से राहत पाने के लिए इस नुस्खे का उपयोग करें:

  • टी ट्री ऑयल की 10 बूंदों को एक्स्ट्रा वर्जिन जैतून के तेल के एक चम्मच और पिघले हुए नारियल के तेल के एक चम्मच के साथ मिलाएं। इस मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाएं और एक सील बंद कंटेनर में स्टोर करें। प्रभावित क्षेत्रों में इसे दिन में दो बार लगाएं आपको जल्द ही लाभकारी परिणाम देखने को मिलेंगे।

टी ट्री ऑयल डैंड्रफ को कम करता है

सिर पर होने वाली रूसी या डैंड्रफ इतना खतरनाक नहीं होता है। परंतु ज्यादा डैंड्रफ की वजह से कई बार आपको शर्मसार जरूर होना पड़ता है। हालांकि डैंड्रफ को कम करने के लिए टी ट्री ऑयल पर की गई रिसर्च यह बताती हैं कि टी ट्री ऑयल का उपयोग करके आप अपने डैंड्रफ को एक हद तक नियंत्रित जरूर कर सकते हैं। एक अध्ययन जो 4 हफ्ते के लिए एक समूह पर किया गया, जिसमें एक समूह को ऐसा शैंपू इस्तेमाल करने को दिया गया जिसमें टी ट्री ऑयल था। जब परिणाम सामने आए तो उन लोगों के डैंड्रफ में 40% कमी नोटिस की गई, जिन्होंने टी ट्री ऑयल वाले शैंपू का इस्तेमाल किया गया था। इसके साथ ही इस शैंपू का इस्तेमाल करने से उन लोगों ने सिर में होने वाली खुजली एवं चिकनाई में भी कमी नोटिस की। डैंड्रफ को कम करने के लिए आप नहाते समय कुछ बूंदें टी ट्री ऑयल की जरूर इस्तेमाल करें।

टी ट्री ऑयल सोरायसिस से छुटकारा दिलाने में लाभदायक है

सोरायसिस एक ऑटोइम्यून स्थिति होती है जिसके लक्षणों में त्वचा के ऊपर लाल रंग के चकत्ते, खुजली क होना अथवा त्वचा का पपड़ीदार हो जाना होता है। हालांकि ऐसी दवाएं उपलब्ध हैं जो इन लक्षणों में सुधार लाती हैं। परंतु ऐसे लक्षणों का कोई ज्ञात इलाज नहीं है। टी ट्री ऑयल में एंटी इन्फ्लेमेटरी यौगिकों के होने के कारण यह सोरायसिस के लक्षणों को कम करने में सहायक होता है। सोरायसिस फ्लेयर्स से राहत प्राप्त करने के लिए, टी ट्री ऑइल की 10-15 बूंदों को दो बड़े चम्मच पिघले नारियल तेल के साथ मिलाएं। आवश्यकतानुसार प्रति दिन 2 से 3 बार प्रभावित क्षेत्र पर इसे लगाएं।

टी ट्री ऑयल का उपयोग पैरों के संक्रमण को कम करने के लिए भी किया जाता है

एक एथलीट के पैर में आपको बहुत सारी फटी एड़िया तथा अन्य परेशानियां देखने को मिल सकती हैं जिन्हें नियंत्रित करना अत्यंत मुश्किल होता है। टिनिया पेडिस के नाम से चिकित्सकीय क्षेत्र में जाना जाता है, यह एथलीट के पैरों में होने वाला एक संक्रामक कवक संक्रमण है जो पैर की उंगलियों से होता हुआ हाथों में भी फैल सकता है। इसके लक्षणों में मुख्यता फफोले, लालिमा, छिली हुई त्वचा आदि शामिल हैं। ऐंटिफंगल दवाओं को इस प्रकार के संक्रमण को दूर करने के लिए बेहतर माना जाता है परंतु फिर भी कुछ अध्ययन दिखाते हैं कि टी ट्री ऑयल का उपयोग ऐसे संक्रमण के लिए बहुत प्रभावी सिद्ध हो सकता है । 158 लोगों के ऊपर किए गए एक अध्ययन में, टी ट्री ऑयल इस्तेमाल करने वाले समूह में 72% सुधार नोटिस किया गया जो प्लेसिबो इस्तेमाल करने वाले समूह की तुलना में सिर्फ 39% था। हालांकि, एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि टी ट्री ऑयल सूजन, खुजली और जलन जैसी स्थिति में एंटीफंगल दवा के बराबर आराम देता है परंतु संक्रमण से छुटकारा दिलाने में इतना प्रभावी नहीं होता है। यदि आप इसे घर पर तैयार करना चाहते हैं तो निम्नलिखित विधि से तैयार कर सकते हैं।

  • 1/4 कप अरारोट पाउडर, 1/4 कप बेकिंग सोडा और टी ट्री ऑयल की 20-25 बूंदें लेकर इस मिश्रण को अच्छे से हिला कर मिलाएं और उसके बाद एक कंटेनर में बंद करके रख दे प्रभावित क्षेत्र में इसे दिन में दो बार लगाएं।

टी ट्री ऑयल का उपयोग केमिकल फ्री माउथवाश बनाने के लिए भी किया जाता है

शोध से पता चलता है कि टी ट्री ऑयल उन कीटाणुओं से लड़ सकता है जो दांतों की सड़न और खराब सांस का कारण होतें हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि टी ट्री ऑयल क्लोरहेक्सिडाइन (एक प्रकार का माउथवॉश जिसे कुल्ला करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है) की तुलना में प्लाक पैदा करने वाले बैक्टीरिया के खिलाफ अधिक प्रभावी होता है। इसका स्वाद भी कम खराब होता है। घर पर खुद का केमिकल रहित माउथवॉश बनाने के लिए बस एक कप गर्म पानी में टी ट्री ऑइल की एक बूंद डालकरअच्छी तरह से मिलाएं और 30 सेकंड तक के लिए इसे अपने मुंह में लेकर अच्छे से कुल्ला करें। अन्य माउथवॉश की तरह, टी ट्री ऑयल से बने माउथवॉश को भी को निगलना नहीं चाहिए।

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टी ट्री ऑयल बेहतर क्लींजर के रूप में कार्य करता है

टी ट्री ऑयल एक बेहतरीन ऑल-पर्पस क्लीनर के रूप में कार्य करता है। इसके साथ ही यह केमिकल की तरह किसी भी प्रकार का कोई निशान नहीं छोड़ता। यदि आप घर पर अपना क्लींजर बनाना चाहते हैं तो टी ट्री ऑयल का उपयोग करके निम्न प्रकार से बना सकते हैं।

  • एक स्प्रे बोतल में 20 बूंद टी ट्री ऑयल, 3/4 कप पानी और 1/2 कप एप्पल साइडर सिरका मिलाएं। इस मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाने तक हिलाएं। सीधे त्वचा पर स्प्रे करें और सूखे कपड़े से साफ करें।
  • आप चाहे तो बने बनाये टी-ट्री ऑइल के क्लींजर को खरीदकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

छोटी मोटी चोट के लिए टी ट्री ऑयल बेहतर एंटीसेप्टिक के रूप में कार्य करता है

सामान्यता लगने वाली मामूली चोट जिसमें कभी कभार त्वचा से रक्तप्रवाह होने के कारण कीटाणु आसानी से प्रवेश कर लेते हैं और आगे चलकर यह संक्रमण का कारण बन जाता है। टी ट्री ऑयल का उपयोग इस प्रकार की चोट में आसानी से किया जा सकता है क्योंकि यह एस. ऑरियस और अन्य जीवाणुओं को मारकर चोट में होने वाले संक्रमण से बचाता है, जो खुले घाव में आसानी से हो सकती है। चोट के ऊपर उसे डिसइनफेक्ट करने के लिए टी ट्री ऑयल का उपयोग निम्नलिखित चरणों के अनुसार करें

  • जिस स्थान पर चोट लगी हो पहले उसे शादी पानी और साबुन से अच्छी तरह साफ कर लें।
  • एक चम्मच नारियल के तेल के साथ एक बूंद टी ट्री ऑयल मिलाएं।
  • चोट पर इस मिश्रण धीरे धीरे लगाएं और उसके बाद एक साफ पट्टी से इसे ढ़क दें।
  • इस प्रक्रिया को प्रतिदिन एक या दो बार दोहराएं जब तक कि चोट के ऊपर पपड़ी न बन जाए।

टी ट्री ऑयल कीटनाशक के रूप में भी कार्य करता है

टी ट्री ऑयल पैस्की कीड़ों को दूर रखने में मदद करता है। एक अध्ययन से यह बात सामने आएगी जिन गायों के ऊपर टी ट्री ऑयल का उपयोग किया गया, उनमें पैस्की कीड़े 61% कम पाए गए। उन गायों की तुलना में जिनके ऊपर टी ट्री ऑयल का उपयोग नहीं किया गया था। इसके अतिरिक्त, एक टेस्ट ट्यूब शोध से यह बात पता चली कि टी ट्री ऑयल  DEET की तुलना में मच्छरों को हटाने की अधिक शक्तिशाली है। (DEET कीट रीप्लेटेंट में सबसे आम सक्रिय घटक है)

टी ट्री ऑयल मुंहासे से लड़ने में मदद करता है

टी ट्री ऑयल मुँहासे को दूर करने में बहुत मददगार साबित होता है। अध्ययन से पता चलता है कि मुहांसों के संख्या को भी कम करता है साथ ही उनके प्रभाव को कम करने में कारगर सिद्ध होता है। एक अध्ययन के अनुसार 5% टी ट्री जेल मुहांसों के ऊपर इस्तेमाल करने से, प्लेसबो की तुलना में यह मुहांसों की संख्या को कम करने में तीन गुना से अधिक प्रभावी दिखाया गया। साथ ही यह मुहांसों के गंभीर प्रभावों को कम करने में 6 गुना अधिक प्रभावी सिद्ध हुआ। एक अन्य अध्ययन में, टी ट्री ऑयल को बेंज़ोयल पेरोक्साइड के बराबर मुँहासे के खिलाफ प्रभावी पाया गया, जो कि मुँहासों के लिए सबसे आम दवा मानी जाती है। प्राकृतिक टी ट्री ऑयल से युक्त जेल आपको बड़ी ही आसानी से किराने की दुकानों पर अथवा ऑनलाइन मिल जाएगा। यदि आप चाहें तो घर पर स्वयं मुहांसों को ठीक करने के लिए टी ट्री ऑयल का मिश्रण बना सकते हैं। इसके लिए आपको एक भाग टी ट्री ऑयल को 9 भाग पानी के साथ मिलाकर एक मिश्रण बनाकर बनाना होगा। इसके बाद इस मिश्रण को रुई की सहायता से मुहांसों पर सावधानी से दिन में एक या दो बार लगाना होगा।

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शरीर से आने वाली प्राकृतिक दुर्गंध को दूर करने के लिए टी ट्री ऑयल का उपयोग करें

टी ट्री ऑयल का एंटीबैक्टीरियल (जीवाणुरोधी) प्रभाव पसीने से संबंधित दुर्गंध को नियंत्रित करने में बहुत प्रभावी सिद्ध होते हैं। पसीने की स्वयं की कोई गंध नहीं होती। हालांकि जब पसीने की ग्रंथियों से पसीना निकलता है तो यह आपकी वह त्वचा में उपस्थित बैक्टीरिया से मिलने की वजह से दुर्गंध पैदा करने लगता है। टी ट्री ऑयल में इस प्रकार के बैक्टीरिया से लड़ने का गुण पाया जाता है। जिस कारण डिओडरेंट और एंटीपर्सपिरेंट्स की जगह आप चाहे तो इस प्राकृतिक तेल का उपयोग कर सकते हैं जो आपको आने वाले पसीने की दुर्गंध से बचाकर रखेगा। आप चाहे तो यह प्राकृतिक डिओडरेंट स्वयं घर बैठे बना सकते हैं। इसको बनाने के लिए आवश्यक सामग्री आपको ऑनलाइन आसानी से मिल जाएगी।

टी ट्री ऑयल के उपयोग से घाव जल्दी भरता है

चोट में होने वाले इंफेक्शन के अलावा टी ट्री ऑयल घाव को जल्दी भरने में मदद करता है। अनुसंधान से पता चला है कि टी ट्री ऑयल (Tea-Tree Oil) सूजन को कम करने में मदद करता है और हीलिंग प्रक्रिया में सहायता करता है। टी ट्री ऑयल सफेद रक्त कोशिकाओं की गतिविधियों को बढ़ा देता है। एक अध्ययन के अनुसार जिसमें घाव लगे 10 लोगों को शामिल किया गया, उनके घाव में टी ट्री ऑयल का उपयोग करने से उनके घाव टी ट्री ऑयल उपयोग न करने वालों की तुलना से जल्दी ठीक हो गए। चोट की ड्रेसिंग करते समय आप चाहे तो हर बार टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदें इस्तेमाल कर सकते हैं। यह घाव को जल्दी भरने में मदद करेंगीं।

टी ट्री ऑयल का उपयोग हैंड सेनिटाइजर बनाने में भी किया जाता है

टी ट्री ऑयल यह प्रयोग से प्राकृतिक हैंड सैनिटाइजर बनाने में मदद मिलती है शोध दिखाते हैं कि यह तेल कई प्रकार के बैक्टीरिया और वायरस को मार देता है जो ई. कोलाई , एस निमोनिया और एच इन्फ्लुएंजा जैसी घातक बीमारियों को फैलाने में अग्रिम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि कई प्रकार के हैंड वॉश बनाते समय कंपनियां उसमें टी ट्री ऑयल डालती हैं जिससे यह ई. कोलाई के घातक असर को तुरंत खत्म कर देता है। इंटरनेट के माध्यम से आप टी ट्री ऑयल का उपयोग करके कई प्रकार के मॉइस्चराइज़र, हैंड सैनिटाइजर और हैंड वॉश घर बैठे ही बना सकते हैं।

टी ट्री ऑयल का उपयोग करते समय ध्यान रखने योग्य सावधानियां

  • अनुसंधान से पता चला है कि टी ट्री ऑइल समग्र रूप से सुरक्षित होता है। हालाँकि फिर भी इसका उपयोग करने से पहले कुछ बातों की जानकारी होनी चाहिए। टी ट्री ऑइल को निगलना नहीं चाहिए क्योंकि यह निगलने पर विषाक्त हो सकता है। इसलिए, टी ट्री ऑइल को बच्चों की पहुंच से बाहर रखा जाना चाहिए। एक बार, एक 18 महीने के बच्चे को गलती से टी ट्री ऑइल का सेवन करा दिया गया। जिसके बाद उसे काफी गंभीर नुकसान हुआ।
  • यदि आप पहली बार टी ट्री ऑयल का उपयोग करने जा रहे हैं तो अपनी त्वचा के ऊपर एक छोटे से छेत्र में इसकी एक दो बूंद लगाकर परीक्षण करें और 24 घंटे तक परिणाम देखने के लिए इंतजार करें कि आपकी त्वचा पर इसकी क्या प्रतिक्रिया होती है। यह परीक्षण करना अत्यंत आवश्यक होता है क्योंकि कुछ लोगों को कुछ चीजों से एलर्जी होती है अतः किसी भी नई चीज को अपनाने के पहले उसका परीक्षण जरूर कर लें। यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है तो जैतून का तेल, नारियल तेल या बादाम के तेल को बराबर या अधिक मात्रा में टी ट्री ऑइल के साथ मिलाकर उपयोग करना सबसे बेहतर होता है।

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