जानिये आत्म-क्षति (सेल्फ इंजरी) से निपटने के वैज्ञानिक उपाय

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आत्मक्षति (सेल्फ-इंजरी) का अर्थ है स्वयं को क्षति या नुक्सान पहुँचाना. हम आपको इसके विषय में पूरी जानकारी उपलब्ध करवा रहे हैं। यदि आप किसी भी प्रकार अपनी आत्मक्षति कर रहे हैं या ऐसा करने की सोच रहे हैं अथवा आपके परिवार का कोई सदस्य या आपका कोई मित्र आत्मक्षति जैसी मानसिकता का शिकार रहा हैं तो उससे बचाव के लिए यह जानकारी बहुत उपयोगी साबित हो सकती है ।

आत्म क्षति क्या होती है?

जब कोई इंसान किसी भी कारणवश अपने आप से अपने ही शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है तो इसे आत्मक्षति कहते हैं। आत्मक्षति करने के कई तरीके होते हैं तथा यह कई प्रकार से की जा सकती है। इसी संदर्भ में हमने कुछ उदाहरणों को नीचे लिखा है :
• अत्यधिक मात्रा में दवाइयों का सेवन कर लेना
• किसी तेजधार की वस्तु जैसे की चाकू या फिर किसी अन्य नुकीली चीज से अपने आप को काटना या अपनी त्वचा पर किसी प्रकार के निशान बनाना
• अपने आप को सिगरेट या किसी अन्य चीज से जला कर अपने आप को घायल कर लेना
• अपने आप को चोट पहुंचाने के लिए अन्य माध्यमों का प्रयोग करना जैसे अपने सिर को दरवाजे या दीवारों पर जोर जोर से पटकना अथवा अपने शरीर में जोर-जोर से घूंसे से मारना
• किसी ऐसी वस्तु को खा लेना जो खाने योग्य ना हो जैसे कि टॉयलेट साफ करने वाला टॉयलेट क्लीनर या फिर हाथ धोने वाली साबुन इत्यादि।

कुछ लोग मानसिक अवसाद के कारण अपने आप को क्षति पहुंचाते हैं। अक्सर ऐसा माना जाता है कि आत्मक्षति जानबूझकर की जाती है तथा इसे करते समय व्यक्ति की मानसिक स्थिति बिल्कुल सामान्य होती है। परंतु यह सच्चाई के बिल्कुल विपरीत है। आत्मक्षति (सेल्फ-इंजरी) करते समय हो सकता है कि जो व्यक्ति खुद को नुकसान पहुंचा रहा है, उसकी मानसिक स्थिति अत्यधिक तनाव में हो या फिर वह अपने अंदर हो रहे आंतरिक असंतुलन का सामना कर रहा हो। कई बार व्यक्ति अत्याधिक भावनात्मक हो जाने के कारण भी अपने आप को नुकसान पहुंचा लेंते हैं और स्वयं ही आत्मक्षति का कारण बन जाते हैं। जहां कुछ लोग आत्मक्षति पहुंचाने के लिए अपने दिमाग के अंदर एक योजना तैयार करते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो अचानक ही किसी बात के परिणाम स्वरूप स्वयं को आत्मक्षति पहुंचाना प्रारंभ कर देते हैं। कुछ लोग जीवन में एक या दो बार स्वयं को आत्मक्षति पहुंचातें हैं जबकि कुछ लोग इसके बुरी तरह से शिकार हो जाते हैं और वह निरंतर रूप से जब भी उनके साथ कोई भावनात्मक परिवर्तन जो कि उनके अनुसार नकारात्मक होता है, वह स्वयं को आत्मक्षति पहुंचाना प्रारंभ कर देते हैं।

आत्मक्षति के अंतर्गत कई प्रकार से अपने आप को नुकसान पहुंचाया जा सकता है जैसे कि अत्याधिक दवाओं का प्रयोग करके, असुरक्षित यौन संबंध बनाकर, नशे के पदार्थों का सेवन करके, अत्यधिक शराब का सेवन करके इत्यादि। अपने स्वास्थ्य और जीवन की परवाह किए बिना लगातार भूखे रहना और अपने शरीर की जरूरतों को पूरा ना करना भी आत्मक्षति के ही लक्षण होतें हैं।

आत्मक्षति को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द

आत्मक्षति को कई दूसरे शब्दों के प्रयोग के द्वारा भी दर्शाया जा सकता है जैसे कि “डेलीब्रेट सेल्फ हार्म” – इस वाक्य में डेलीब्रेट शब्द से तात्पर्य है कि ‘स्वयं की इच्छा से’ या ‘जानबूझ कर’अर्थात ऐसा व्यक्ति जो किसी भी सूरत में अपने आप को नुकसान पहुंचाना चाहता है।

सुसाइड/पैरा सुसाइड- आत्मक्षति करने वाले लोग आमतौर पर अपने आप को बिल्कुल भी अहमियत नहीं देते हैं। साथ ही उनके अंदर अपने आप को खत्म कर देने के लक्षण भी इतनी आसानी से नहीं दिखाई देते। ऐसा माना जाता है कि अधिकतर आत्मक्षति करने वाले लोग आत्महत्या की ओर अपना कदम बढ़ा लेंते हैं ।

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आत्मक्षति कौन करता है?

आत्मक्षति किसी भी उम्र में की जा सकती है। अक्सर ऐसा होता है, जब भी इस मानसिकता का कोई व्यक्ति किसी तनाव की स्थिति से गुजरता है तो वह आत्मक्षति का शिकार हो जाता है। यह स्थिति युवा लोगों में ज्यादातर देखी जा सकती है। आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि 10 में से एक युवा कभी ना कभी ऐसी स्थिति के शिकार हो जाते हैं।

नवयुवकों की तुलना में नव युवतियां आत्मक्षति की ज्यादा शिकार पाई जाती हैं। समलैंगिक और द्विलैंगिक व्यक्ति भी आत्मक्षति के शिकार अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। कभी-कभी ऐसा भी देखा गया है कि सामुदायिक रूप से भी लोग आत्मक्षति जैसी भयानक मानसिक बीमारी के शिकार हो जाते हैं। इस प्रकार एक बड़े समुदाय के अंदर आत्मक्षति करने की संभावना उत्पन्न हो सकती है। कुछ संस्कृतियों में भी अपने आप को नुकसान पहुंचा कर तथा धर्म के माध्यम से आत्मक्षति की जाती रही है। बच्चों के साथ बाल्यकाल में हुए शारीरिक शोषण अथवा मानसिक शोषण के कारण भी वह लोग अवसाद का शिकार हो जाते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप उनका व्यवहार अपने आप को आत्मक्षति पहुंचाने वाला बन सकता है। बाल अवस्था में हुए किसी भी रूप के शोषण के कारण तथा लैंगिक आधार पर हुए भेदभाव के कारण भी आत्मक्षति (सेल्फ-इंजरी) की भावना उत्पन्न हो सकती है।

आत्मक्षति को लेकर वैज्ञानिकों के द्वारा बहुत रिसर्च की गई है, इन रिसर्च के माध्यम से पाया गया है कि आत्म क्षति के ज्यादातर मामले स्कूलों तथा अस्पतालों में पाए जाते हैं। इसके आधार पर यह पाया गया है कि आत्मक्षति करने वाले व्यक्ति अपना व्यवहार को काफी गोपनीय रखते हैं। वह दूसरे लोगों से कम मिल जुल कर रहते हैं तथा जब भी कोई उनसे संपर्क बढ़ाने का प्रयास करता है तो वह उससे बिल्कुल किनारा कर लेते हैं। चार हजार मरीजों पर की गई एक बड़ी रिसर्च के अनुसार लगभग 80% मरीजों ने खुद को आत्मक्षति पहुंचाने के लिए दवाओं का इस्तेमाल किया। उन्होंने अत्यधिक दवाईयां खाकर खुद को क्षति पहुंचाई। जबकि 15% मरीजों ने खुद को आत्मक्षति पहुंचाने के लिए स्वयं को ही काटने और गोदने के तरीकों का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपनी त्वचा या शरीर के अन्य हिस्सों को चाकू या किसी अन्य नुकीली चीज़ से काटकर या गोदकर खुद को क्षति पहुंचाई। सामुदायिक जनसंख्या की संख्या के आधार पर यह अनुपात बहुत ही कम पाया गया है।

आत्मक्षति करने के क्या कारण होते हैं?

आत्मक्षति करने के कई कारण हो सकतें हैं लेकिन इन कारणों के पीछे जो सबसे बड़ा कारण है, वह है किसी भी इंसान कि भावनाओं का एक हद से अधिक आहत हो जाना। जब इंसान भावनात्मक रूप से अपने आप को टूटा हुआ महसूस करता है तो कभी-कभी उसका यह स्वरूप स्वयं उसके लिए ही घातक बन जाता है। इस प्रकार वह इंसान इस भावनात्मक स्थिति में स्वयं को बिल्कुल अकेला और बेबस पाता है, जिसके कारण उसे अपने जीवन का कोई मूल्य नजर नहीं आता और यहीं से उस स्थिति का जन्म होता है जब वह अपने आप को क्षति पहुंचाने लगता है। ऐसा देखा गया है कि अधिकांश लोग आत्मक्षति करने से पहले मानसिक व्यथा का सामना करते हैं। नीचे ऐसे उदाहरण दिए गए हैं जिनके आधार पर किसी व्यक्ति को किस प्रकार की मानसिक व्यथा का सामना करना पड़ता है इस विषय से जुड़े कुछ तथ्य लिखें गएं हैं : –
• शारीरिक और लैंगिक शोषण
• आत्मग्लानि अथवा अपने आप को बुरा समझना
• पारिवारिक अथवा अन्य संबंधों में कड़वाहट होना
• ऐसा महसूस करना कि दूसरे व्यक्ति आपकी अवहेलना करते हैं
• असमर्थ महसूस करना
• अकेलापन महसूस करना
• बेबस महसूस करना – ऐसा लगना मानो आप कोई कार्य नहीं कर सकते
• शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करना – अपने आपको ऐसा महसूस करवाना की नशे के इन पदार्थों का सेवन ना करना भी आपकी जिंदगी की भांति आपके बस में नहीं है

कई बार आत्मक्षति करने वाले लोगों को मानसिक रोगी अथवा मूर्ख कहकर भी संबोधित किया जाता है। यह बहुत ही गलत धारणा है कि खुद को नुकसान पहुंचाने वाले लोग परेशानी में होने या बदला लेने अथवा दंड देने का दिखावा करते हैं। परंतु ऐसा देखा गया है कि खुद को नुकसान पहुंचाने वाले लोग गुप्त रूप से दुख भोगते रहते हैं। जिसके कारण ऐसे लोग बहुत ही गुप्त तरीकों से तथा अप्रत्यक्ष माध्यमों से अपना ही नुकसान करते हैं।

आत्मक्षति करने पर कैसा महसूस होता है?

कोई व्यक्ति जब किसी भी अवसाद का शिकार होकर अपने आप को नुकसान पहुंचाने लगता है तो यह उसके लिए एक भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ विषय बन जाता है। खुद को नुकसान पहुंचा कर ऐसा व्यक्ति तनाव और भेदभाव के कारण स्वयं के प्रति उत्पन्न हुए उस बुरे अनुभवों को कम करने का एहसास करने की कोशिश करता है। ऐसा व्यक्ति अपने आप को नुकसान पहुंचा कर तथा तरह-तरह के माध्यमों से अपने आप को दुख देकर अपनी आत्मगनि को कम करने का प्रयास करता है। आत्मक्षति के द्वारा व्यक्ति अपने द्वारा किए गए बुरे कार्यों के लिए स्वयं को दंड देना समझता है। ऐसी मानसिकता वाले व्यक्तियों के लिए आत्मक्षति हर प्रकार से बुरी भावनाओं तथा तनाव के कारण उत्पन्न हुई समस्याओं के समाधान का एक सरल तरीका बन जाती है।

क्या आत्मक्षति करने वाले लोग मानसिक रोगी होते हैं?

दरअसल हाँ। आत्मक्षति की शुरुआत हमारे मन की भावनाओं के विपरीत रूप से आत्मग्लानि में बदलने के कारण होती है। जब कोई व्यक्ति उदासीनता, व्यक्तित्व में कमी, नशीले पदार्थों के सेवन के कारण खुद को नुकसान पहुंचाने लगते हैं, तो उन्हें एक प्रकार का मानसिक रोगी माना जा सकता है। इस प्रकार के व्यक्तियों को तुरंत ही किसी प्रशिक्षित मनोचिकित्सक के द्वारा सहायता प्रदान करवानी चाहिए। आत्मक्षति से ग्रसित लोगों को मदद की आवश्यकता होती है। ऐसे लोगों में आत्महत्या करने का खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

आत्मक्षति के लिए सहायता कैसे प्राप्त करें?

आत्मक्षति करने वाले लोग अपने व्यवहार को बहुत अधिक गुप्त रखते हैं। वह अपने आसपास के लोगों को ऐसा बिल्कुल भी जाहिर नहीं होने देते कि वह किसी मानसिक अवसाद से गुजर रहे हैं। इसलिए वह किसी से भी सहायता मांगने की जरूरत महसूस नहीं करते। अधिकतर आत्मक्षति करने वाले लोगों का स्वभाव इस रूप से विकसित हो जाता है कि वह सहायता मांगने को भी अपनी भावनाओं से जोड़कर देखते हैं। ज्यादातर आत्मक्षति करने वाले लोगों को इस बात का ज्ञान होता है कि वह किस प्रकार की समस्या से जूझ रहे हैं तथा इस बात को भी भली-भांति जानते हैं कि यह गंभीर समस्या उनके लिए प्रतिकूल परिस्थितियां बनाती जा रही है, परंतु इसके बावजूद भी वो किसी से भी इसकी चर्चा करने और सुझाव लेने का प्रयास नहीं करते। वह ना ही तो इसके बारे में अपने परिवार के लोगों से बात करते हैं और ना ही अपने मित्रों या जानकारों की सलाह लेने की कोशिश करते हैं बल्कि इसके विपरीत नवयुवक लोग तो इस समस्या को गंभीर भी नहीं समझते और वह ऐसा सोचते हैं कि जैसे किसी से कुछ ना कहने से ही उनकी समस्याओं का समाधान अपने आप हो जाएगा। जिसके कारण उनके साथ बनी हुई समस्याएं जस की तस रहती हैं और वह एक लंबे समय तक इन समस्याओं से जूझते रहने के कारण एक समय ऐसा आ जाता है जब वह अपने आप को नुकसान पहुंचाने लगते हैं।

आत्मक्षति के कारण जब लोग अपने आप को बहुत अधिक परेशान कर लेते हैं, तो उन्हें अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ जाती है। कभी-कभी कुछ लोग इसे एक समस्या मानकर अस्पताल का रुख करने को तैयार भी हो जाते हैं परंतु अक्सर ऐसा देखा गया है कि अस्पताल पहुंचने पर आधे से भी कम पीड़ित लोगों को (आत्मक्षति के शिकार लोगों को) विशेषज्ञों की सहायता मिल पाती हैं। जो कुछ लोग किसी भी कारणवश अस्पताल का रुख भी लेंते हैं तो उनको विशेषज्ञों अथवा डॉक्टरों से सहायता मिलने का अनुपात बहुत कम है क्योंकि या तो वह अपनी परेशानी को जाहिर नहीं करते या फिर वह इसे केवल एक दुर्घटना बताकर इसके लिए इलाज हासिल करते हैं।

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गंभीर रूप से आत्मक्षति करने की आदत में लिप्त लोगों के लक्षण क्या है?

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो आत्मक्षति (सेल्फ-इंजरी) के कारण स्वयं को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा लेते हैं। यह लोग लगातार इस प्रकार की भावना से जूझते रहते हैं जिसके कारण यह स्वयं को गंभीर रूप से आत्म क्षति पहुंचाने में जरा भी नहीं हिचकिचाते। इस प्रकार के लोगों के कुछ लक्षण निम्नलिखित हैं –

• अपने आप को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाना
• मन में हमेशा आत्म-क्षति के ख्याल आना और ऐसी ही प्लानिंग करते रहना
• लगातार और बार-बार अपने आप को नुकसान पहुंचाए जाने की कोशिश करते रहना
• अकेलेपन का शिकार होना ऐसे लोग समाज और परिवार से पूरी तरह से संपर्क खत्म कर देते हैं
• किसी प्रकार के मनोरोग से ग्रसित होना

इन लोगों को तुरंत ही इलाज की आवश्यकता होती है, अन्यथा यह अपने आप को बहुत गंभीर रूप से शारीरिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसी स्थिति के ज्यादा बढ़ जाने पर इन लोगों का आत्महत्या करने का भी खतरा बढ़ जाता है।इनको इस बात के लिए समझाना बहुत अधिक मुश्किल होता है कि इनको इलाज की आवश्यकता है। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए इन लोगों को तुरंत ही किसी अनुभवी विशेषज्ञ के द्वारा सहायता प्रदान करवानी चाहिए ताकि समय रहते स्थिति को काबू में लाया जा सके।

आत्मक्षति के लिए उपलब्ध सहायता के प्रकार

आत्मक्षति करने वाले लोग अलग-अलग प्रकार से अपनी इस समस्या को स्वीकार करते हैं। कुछ लोग कभी भी इस समस्या को स्वीकार नहीं करते जबकि कुछ लोग यह कहकर इस समस्या के बारे में बात करने से इंकार कर देते हैं कि समय के साथ वह स्वयं ही इस पर काबू पा लेंगे। परंतु अगर कोई व्यक्ति है या फिर उसका मित्र अथवा परिवार का कोई सदस्य इस संबंध में सहायता प्राप्त करना चाहता है, तो उनके लिए कई प्रकार की सहायता उपलब्ध है जिनमें से कुछ के विषय में नीचे बताया गया है –

  1. किसी समझदार व्यक्ति से परामर्श करना – आत्मक्षति जैसी स्थिति तब ज्यादा घातक हो जाती है, जब हम उसके बारे में बात करने से इंकार कर देते हैं और खुद ही खुद के अंदर इस समस्या को लेकर परेशान रहने लगते हैं। लेकिन अगर हम इस समस्या के विषय में किसी समझदार व्यक्ति से विचार विमर्श करें तो हम इस समस्या पर काबू पा सकते हैं। अपनी मनोस्थिति के बारे में किसी समझदार व्यक्ति से परामर्श करना ऐसी स्थिति में बहुत अधिक लाभदायक सिद्ध हो सकता है। इस प्रकार से किया गया परामर्श आपको समझदारी भरे निर्णय लेने में सहायता प्रदान करेगा। इस प्रकार आप उस व्यक्ति के द्वारा बताए गए उपायों को अपना सकते हैं तथा उस व्यक्ति को अपनी समस्या में शामिल करके मदद प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार की सुविधा इंटरनेट के माध्यम से भी प्राप्त की जा सकती है।
  2. आपसी संबंधों में सुधार के द्वारा – कई बार ऐसा देखा गया है कि बिगड़ते हुए आपसी संबंधों के कारण भी आत्मक्षति की भावना पैदा हो जाती है। आज के समय में खराब आपसी संबंध आत्मक्षति का बहुत बड़ा कारण बन गए हैं। अक्सर देखा गया है कि नवयुवकों और नवयुवतियों का अपने माता पिता के साथ संबंध मधुर नहीं रह पाता तथा वैवाहिक जोड़ों के बीच में भी आपसी संबंध कभी-कभी बहुत अधिक कड़वाहट की सीमा को पार कर जाते हैं। जिसके कारण संबंधित लोगों के मन में आत्मक्षति की भावना उत्पन्न हो जाती है। आत्मक्षति के लिए जिम्मेदार इन कारणों को समझते हुए हमें अपने आपसी संबंधों को विशेषज्ञों के परामर्श के माध्यम से सुधारने का प्रयास करना चाहिए।
  3. सहायता प्रदान करने वाले समूह (सेल्फ हेल्प ग्रुप) – आत्मक्षति के विषय में जानकारी देने के लिए तथा इससे संबंधित सहायता प्रदान करने के लिए कई सामुदायिक संस्थाएं भी कार्य करती हैं। यह समूह कुछ लोगों के सहयोग से बनाए गए होते हैं, जिनके अंदर ऐसे लोग भी होते हैं जिन्होंने अपने बीते हुए कल में ऐसी स्थिति का सामना किया होता है या फिर जिन्होंने अपने या अपने आसपास के लोगों को इस समस्या से जूझते हुए देखा हुआ होता है, इसलिए इन लोगों के पास इस समस्या के निदान के लिए एक अच्छा अनुभव होता है। मानसिक और भावनात्मक सहायता इन समूह के पास उपलब्ध होती है। यह समूह आपके साथ आपकी समस्याओं के ऊपर विचार विमर्श करते हैं तथा उनके लिए एक अच्छा सुझाव उपलब्ध करवाते हैं। इन समूह से जुड़ने पर आप कभी भी स्वयं को अकेला महसूस नहीं करते और आपको इस बात का एहसास होता है कि आपके लिए कोई सहायता प्रदान करवा रहा है।
  4. डिग्री-धारक विशेषज्ञों की मदद के द्वारा – आत्मक्षति किसी को भी एक मनोरोगी बना सकती है या फिर दूसरे शब्दों में कहें आत्मक्षति एक रोग की तरह इंसान के मन में वास करने लगती है। जो भी इंसान अपने आप की किसी भी प्रकार की मानसिक कुंठा को इसके द्वारा शांत करने लगता है वह इसका शिकार हो जाता है। अगर आपके परिवार में या आपके मित्रों में आपको कोई भी ऐसा व्यक्ति मिले तो आपको तुरंत ही उसको किसी विशेषज्ञ के पास जाने की सलाह देनी चाहिए। यदि कोई अन्य व्यक्ति भी आपसे इसके बारे में सलाह प्राप्त करना चाहता है तो आपको उसको सही सलाह देते हुए किसी विशेषज्ञ के पास जाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। आत्मक्षति से ग्रसित व्यक्ति के लिए कई प्रकार के उपचार के माध्यम से उपाय उपलब्ध करवाए गए हैं। इन उपायों का प्रयोग करके विशेषज्ञ या डॉक्टर आत्मक्षति करने वाले व्यक्ति की समस्याओं का समाधान करते हैं। आत्मक्षति के समाधान के लिए निम्नलिखित प्रकार की मनोचिकित्सा उपलब्ध हैं :-
    • समस्याओं के समाधान का उपचार (प्रॉब्लम सॉल्विंग थेरेपी)
    • ज्ञान संबंधी उपचार (कॉग्निटिव साइको थेरेपी)
    • मनोवेगीय उपचार (साइकोडायनेमिक साइको थेरेपी )
    • संज्ञानात्मक व्यवहारवादी उपचार (बिहेवियर थेरेपी)
  5. पारिवारिक समूह के द्वारा आपसी परामर्श की योजना बनाना – कई बार आत्मक्षति (सेल्फ-इंजरी) करने वाले लोग अपने परिवार से पूर्ण रूप से कटाव महसूस करते हैं। इसी कारण की वजह से वह अपने परिवार से अपेक्षा होने के बावजूद उनकी मदद लेना नहीं चाहते हैं। परंतु जैसा कि हम जानते हैं इस प्रकार के लोगों को अपने परिवार की मदद की बहुत अधिक आवश्यकता होती है, इसलिए आपसी रंजिश को छोड़कर ऐसे लोगों की मदद करने के लिए उनके परिवारों को आगे आना चाहिए तथा परिवार के सभी लोगों को मिलकर अपने घर के सदस्य कि इस गंभीर समस्या के समाधान के ऊपर काम करना चाहिए, जिससे आत्मक्षति पहुंचा रहे लोगों को मदद प्रदान हो सके। जहां भी आवश्यकता हो वहां पर विशेषज्ञों की सहायता से भी पारिवारिक संपर्क और परामर्श की योजनाओं के ऊपर काम किया जा सकता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए यह एक बहुत ही प्रभावी तरीका है।
  6. सामूहिक चिकित्सा के द्वारा मदद मुहैया करवाना – अक्सर ऐसा देखा गया है कि आत्मक्षति करने वाले लोग अकेले इलाज के लिए सामने नहीं आना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में वह ऐसा महसूस करते हैं कि यदि मैंने अपनी समस्याएं सबके सामने प्रकट की तो कहीं वह हंसी के पात्र ना बन जाएं या फिर कहीं ऐसा ना हो कि उनके बताने के बावजूद सामने वाले उनकी इस समस्या को केवल उनकी मूर्खता ही समझें जिसके परिणाम स्वरूप उनकी समस्या जाहिर भी हो जाए और उसका हल भी ना निकले। इस समस्या का निदान करने के लिए सामूहिक चिकित्सा पद्धति का इस्तेमाल करना चाहिए। इस चिकित्सीय पद्धति के अंतर्गत विशेषज्ञ, आत्मक्षति (सेल्फ इंजरी) की समस्या से ग्रसित व्यक्तियों के एक पूरे समूह का नेतृत्व करता है। जिसके माध्यम से सभी लोग अपनी समस्या आसानी से विशेषज्ञ तक बिना किसी हिचकिचाहट के पहुंचा पाते हैं। विशेषज्ञ सभी लोगों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए समूह में मौजूद विभिन्न सदस्यों की सलाह के अनुसार उनका निवारण उपलब्ध करवाते हैं।

कौन सा उपचार सबसे अधिक उपयोगी सिद्ध होता है?

आत्मक्षति (सेल्फ-इंजरी) अपने आप में एक जटिल समस्या है। इससे ग्रसित लोग कई प्रकार से अपने आप को दोषी समझने लगते हैं। यह कहना बहुत ही कठिन होगा कि आखिर किसी भी व्यक्ति में इस तरह की शुरुआत क्यों होती है। अक्सर ऐसा देखा गया है कि विभिन्न प्रकार के लोग विभिन्न प्रकार की समस्याओं से ग्रसित होकर अपने आप को नुकसान पहुंचाना प्रारंभ कर देते हैं। इसके लिए एक सटीक कारण की खोज करना या उसे चिन्हित कर पाना इतना आसान नहीं होता। कई बार लोग मानसिक रूप से आहत होकर इसे अपना लेंते हैं, जबकि कई बार लोग जीवन में विफल होने के कारण इसका चुनाव कर बैठतें हैं। ऐसा भी देखा गया है कि जीवन में किसी चीज को ना पाने के कारण भी कुछ लोगों में इसकी शुरुआत हो जाती हैं; एक तरफा प्रेम इसका बहुत ही सीधा-साधा उदाहरण है। ऐसे हजारों मामले सामने आए हैं जब लोग अपने आप को इतना अधिक विवश महसूस करते हैं कि वह नशीली चीजों जैसे कि अत्यधिक सिगरेट का सेवन या फिर शराब का सेवन करना आरंभ कर देते हैं। इसी कारण इस समस्या का समाधान, समस्या के आरंभ में ही छुपा होता है। समस्या का निदान करके ही इस विकार पर काबू पाया जा सकता है । विशेषज्ञ अलग-अलग प्रकार के लोगों की अलग-अलग समस्याओं को सुलझा कर ही इसका समाधान करते हैं। यह कहना बहुत ही कठिन है कि कौन सा उपचार सबसे लाभदायक होता है। परंतु रिसर्च के माध्यम से जितने भी प्रमाण अब तक उपलब्ध हैं उससे यही साबित होता है कि इस समस्या के निदान के लिए उपचार ही एकमात्र रास्ता है और यह अत्याधिक मददगार साबित होता है परंतु जा उपचार अलग-अलग रोगी पर अलग-अलग तरह ही काम करता है।

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यदि सहायता उपलब्ध ना हो पाए तो क्या करना चाहिए?

किसी भी समस्या के निदान के लिए सहायता प्राप्त करना अति आवश्यक होता है। सहायता ना मिलने की स्थिति में समस्या और भी अधिक विकट रूप धारण कर सकती है। आत्मक्षति (सेल्फ-इंजरी) जैसी समस्या भी इसी प्रकार से गंभीर रूप धारण कर सकती हैं, अगर समय पर इसके लिए सहायता ना लीं जाए, तो कई बार ऐसा देखा गया है कि यह काफी नुकसानदायक सिद्ध होती है तथा कभी-कभी तो इसके कारण लोगों की मौत भी हो जाती है। रिसर्च के माध्यम से ऐसा देखा गया है जो व्यक्ति एक बार खुद को नुकसान पहुंचाता है। वह एक वर्ष पूरा होने से पहले इस घटना को दोबारा भी कर सकता है। यह आंकड़ा हर तीन में से एक व्यक्ति के ऊपर पूर्ण रूप से सिद्ध हुए हैं। आत्मक्षति के ऊपर की गई रिसर्च कई प्रकार के गंभीर आंकड़े भी प्रदर्शित करती है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि आत्मक्षति से पीड़ित सौ व्यक्तियों में से लगभग तीन व्यक्ति पंद्रह वर्ष के अंतराल में आत्महत्या करके अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेते हैं। इस आंकड़ों से इस बात की भयावहता का पता चलता है कि यह समस्या अपने आप में कितनी भयानक और विकट है। पुरुष और महिला के संबंध में यदि इस रिसर्च को गौर से देखा जाए तो यह पता चलता है कि यह समस्या पुरुषों में 50 गुना अधिक है तथा इसी रिसर्च के माध्यम से यह भी सिद्ध हुआ है कि बढ़ती उम्र में भी लोग इस समस्या के कारण आत्महत्या जैसे कार्यों को अंजाम देते हैं।

आत्मक्षति (सेल्फ-इंजरी) के भयानक परिणाम समय-समय पर सामने आते रहते हैं। कई बार तो इस समस्या का समाधान करने वाले ही इसका शिकार हो जाते हैं। जो लोग खुद को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति को अपना लेते हैं तो वह लंबे समय तक इसके द्वारा उत्पन्न हुई समस्याओं का सामना करते रहते हैं। कई बार लोग अपना इतना भयानक नुकसान कर लेते हैं कि वह कभी भी उस नुकसान से उबर नहीं पाते, जैसे ही कुछ लोग अपने आप को काटकर अपना नुकसान करते हैं इससे उनके उस अंग का या फिर शरीर का कोई भाग पूर्ण रूप से बेकार हो सकता है। जो लोग नशे के माध्यम से अपने आप को नुकसान पहुंचाते हैं, उन लोगों के अंदर नशे की यह लत उनका इतना नुकसान कर देती है कि वह कभी भी उबर नहीं पाते और एक प्रकार की कमजोरी का शिकार हो जाते हैं। कुछ लोग खुद को जला कर अपना नुकसान करते हैं जिसके कारण उनकी त्वचा हमेशा के लिए खराब हो जाती है और उसके ऊपर स्थाई रूप से भद्दे निशान पड़ जाते हैं। इसलिए विशेषज्ञों के द्वारा कहा गया है कि ऐसी समस्या होने पर तुरंत ही समाधान के लिए उपचार के विकल्प को चुनना चाहिए ।

आप अपनी मदद किस प्रकार कर सकते हैं?

कई बार ऐसी दुविधा उत्पन्न होती है जब हम भावनात्मक रूप से कमजोर होकर बहुत ही असहज महसूस करते हैं ऐसी अवस्था में हमारे मन में खुद को नुकसान पहुंचाने के ख्याल बार बार आने लगते हैं, लेकिन यही स्थिति ऐसी होती है कि हमारा मन हमें इस कार्य को करने से रोकता है लेकिन फिर भी हम बिना किसी कारणवश मजबूर होते चले जाते हैं और खुद को नुकसान पहुंचाने को एक विकल्प के तौर पर चुन लेते हैं। हम इस बात को अपने अंतर्मन को समझाने का प्रयास करते हैं कि आत्मक्षति ही हमारी समस्या का समाधान है और इसी से हमें कुछ राहत प्राप्त होगी। यदि आप इस दुविधा के अंदर हैं कि मैं कैसे अपने अंदर उठ रही आत्मक्षति की भावना पर काबू पा सकता हूं तो उसके लिए हमने कुछ उपाय बताए हैं –

  1. आपको अपनी भावनाओं के ऊपर काबू पाना चाहिए याद रखिए कोई भी समस्या समाधान के बिना उत्पन्न नहीं होती। आत्मक्षति की भावना भी कुछ समय के बाद अपने आप समाप्त हो जाती है, लेकिन तब तक आप अपने ऊपर काबू रखिए। यदि आप अपनी दुख की भावनाओं के ऊपर काबू पा लेंगे तो आपके मन के अंदर उठ रही आत्मक्षति की भावना खुद ही समाप्त हो जाएगी। इसके लिए आप नीचे लिखे कुछ उपायों को करना प्रारंभ कर सकते हैं।
  2. अपने पसंद के लोगों से बात कीजिए और उनसे अपनी समस्या का विस्तार पूर्वक वर्णन कीजिए। जिससे कि वह उसको समझ कर आपको भावनात्मक सहारा दे सकें।
  3. यदि आपके पास उपस्थित किसी व्यक्ति की वजह से आपके अंदर खुद को नुकसान पहुंचाने वाली भावनाएं उत्पन्न होती है तो आपको उस स्थान को तुरंत छोड़ कर चले जाना चाहिए ताकि उस व्यक्ति का आप से सामना ना हो।
  4. अपना ध्यान भटकाने की कोशिश करें तथा अपने मन को ऐसे कार्यों में बिजी कर लें जिसमें आपकी रुचि हो। अपनी पसंद का संगीत सुनें, नेट सीरीज देखें, या फिर किसी खेल में अपना मन लगाएं।
  5. अपने समय को ऐसे कार्यों में व्यतीत करना आरंभ करें जिन से आपके मन को बहुत ही प्रसन्ता मिलती हो।
  6. अपना ध्यान बुरी यादों से हटाकर उस ओर ले जाने का प्रयास करें जिसमें आपको खुशी प्राप्त होती हो। जिंदगी में गुजरे उन लम्हों का स्मरण करें जिसमें आपको बहुत ही सुख मिला हो तथा आपने संतुष्टि का अहसास किया हो।
  7. यदि आप अपनी भावनाओं पर बिल्कुल भी काबू ना कर पा रहे हो और आपके मन में खुद को नुकसान पहुंचाने का विचार बार बार जागृत हो रहा हो तो अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए अन्य उपायों का प्रयोग करें जैसे कि बर्फ के टुकड़ों को लाल रंग के जूस में मिलाकर उनसे खेलें या फिर किसी लाल पेन से अपनी त्वचा पर लाइने खींचे इससे आप स्वयं को नुकसान पहुंचाए बिना अपनी उन भावनाओं को शांत कर पाएंगे।
  8. अपने अंदर उठ रही भावनाओं को काबू में करने के लिए मिथ्या चीजों का प्रयोग करें जैसे कि अपने आप को दर्द देने के लिए मिर्ची का सेवन कर ले या फिर ठंडे पानी से नहा कर अपने आप का ध्यान भटका लें।
  9. जब भी आप अपने मन को जरा सा भी भटकते हुए देखें तो तुरंत उसे किसी सार्थक और सकारात्मक कार्य में लगाने का प्रयास करें।
  10. अपना ख्याल रखें, नियमित व्यायाम करें तथा अपने शरीर को सुंदर महसूस करें तथा उसे निरंतर सुंदर बनाने का प्रयास करें।
  11. अपनी भावनाओं को मन के अंदर ना रखें ऐसा करने से वह आपके मन के अंदर घर कर लेंगी तथा सदा के लिए वहां पर रहने लगेंगी। इन से छुटकारा पाने के लिए आपको अपनी भावनाओं को एक गोपनीय डायरी के अंदर लिखकर रखना चाहिए इससे आपके मन से वह भावनाएं भी बाहर निकल जाऐंगीं और आपको कोई नुकसान भी नहीं होगा।

क्या करें जब आप स्वयं को आत्मक्षति पहुंचाना नहीं चाहते?

ऐसे समय में जब आपके मन से आत्मक्षति पहुंचाने का ख्याल पूरी तरह से जा चुका हो और आप स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हों तो एक बार उस समय को सोचिए जब आप खुद को नुकसान पहुंचाने वाले थे, यह विधि आपको आत्मक्षति करने से रोकने में मदद करेगी –

  1. उस समय को याद करिए जब पिछली बार आपने खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी और उसके बाद जब आपने स्वयं को बिना नुकसान पहुंचाए वहां से आगे की तरफ बढ़ा लिया था
  2. उन दिनों को भी याद करिए, जब आप इस बीमारी से ग्रसित थे और आपने स्वयं पर भरोसा करके धीरे-धीरे इस स्थिति पर काबू पाना सीख लिया तथा उस समय का, इस समय के साथ अवलोकन करें
  3. कोशिश करिए स्वयं से यह जानने की, कि आपने स्वयं को नुकसान पहुंचाने की इस सोच को कैसे अपने अंदर जन्मा
  4. अपने आप से यह पता करने की भी कोशिश करिए कि क्या आत्मक्षति करने से आप स्वयं के अंदर एक राहत की सांस पाते हैं या फिर यह आपका क्रोध शांत करने का तरीका है। यदि आप इन बातों को पता कर सकेंगे तो आप के इलाज में यह बहुत मददगार साबित होंगीं
  5. यदि आपकी आत्मक्षति के विषय में आपके आसपास के लोग जानते हैं तो उनसे भी बात करके देखिए कि वह आपके इस व्यवहार पर किस प्रकार की सोच रखते हैं
  6. अपने विषय में कुछ अच्छी बातें बोलिए जो आपके नजर में आपके अंदर हैं तथा उनकी रिकॉर्डिंग करिए, साथ ही यह भी बोलिए कि आप क्यों आत्मक्षति करना नहीं चाहते। इसके बाद आप जब कभी भी आप अपने बारे में बुरा महसूस करें और आपके अंदर आत्मक्षति करने का विचार आए तो इस रिकॉर्डिंग को सुनें यह आपके लिए बहुत अधिक मददगार साबित होगी
  7. अपनी आपात स्थिति के लिए ऐसे लोगों की सूची बनाएं, जिससे आप तुरंत मदद पा सकते हों। जिससे कि भविष्य में कभी भी जब आपके अंदर आत्मक्षति का ख्याल आए तो आप इन लोगों से संपर्क करके तथा इनके सानिध्य में आकर स्वयं को नुकसान पहुंचाने से बचा सकें।

क्या आप आत्म क्षति को रोकना चाहते हैं, यह कैसे सुनिश्चित करें?

यदि नीचे दिए गए सवालों में से यदि आधे या उनसे अधिक प्रश्नों के जवाब में आपका उत्तर हां है, तो आप यह समझ जाइए कि आप समय रहते आत्म क्षति जैसी इस गंभीर मानसिक रोग से स्वयं को बचा सकते हैं।

  1. क्या आपके आसपास या आपके परिवार अथवा मित्र जनों में कोई ऐसा है जो आपकी इस, आत्म क्षति (सेल्फ इंजरी) की परेशानी को जानता हो और साथ ही आप को भी समझता हो। जिसे आप ऐसी आत्म क्षति की भावना उत्पन्न होने पर उस से सहयोग की मांग कर सकते हों।
  2. क्या आप को कम से कम दो ऐसे सुरक्षित उपाय पता है, जिनके द्वारा आप अपने आत्म क्षति के विचारों को कम कर सकें।
  3. क्या आप स्वयं को यह बताने और समझाने के लिए पूर्ण रूप से तैयार हैं कि आप आत्म क्षति अथवा स्वयं को नुकसान पहुंचाने से, स्वयं को ही रोकना चाहते हैं
  4. क्या आप स्वयं से यह कह सकते हैं कि आप अवसाद, डर और किसी भी प्रकार के मानसिक कष्ट या पीड़ा को सहन करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं
  5. क्या आपके आसपास इस प्रकार की कोई चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध है जो आपको ऐसी स्थिति में आपको सही दिशा निर्देश देकर इस होने वाले गंभीर नुकसान से बचा सके।
self injury treatment

आत्म्क्षती रोगी के परिचित के रूप में आपको क्या कदम उठाने चाहिए?

यह अत्यंत दुखद स्थिति होती है, जब आपको यह पता हो कि आपके जानने वाला व्यक्ति स्वयं को आत्म क्षति पहुंचा सकता है और आप उसकी मदद के लिए कुछ भी कर पाने में असमर्थ हो रहे हों। परंतु यहां हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताएंगे जिनके द्वारा आप अपने जानने वाले व्यक्ति की मदद कर सकते हैं। आमतौर पर ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी कदम होता है कि आप ऐसे इंसान की बातों को ध्यान पूर्वक सुनें। कई बार यह करना बहुत मुश्किल भी हो जाता है क्योंकि सामने वाले को सुनने का मतलब सिर्फ उसे सुनने से नहीं अपितु उसकी बातों के पीछे के छिपे मतलब को समझना भी होता है और साथ ही ऐसे व्यक्ति की बातों को सुनकर उसके बारे में कोई निर्णायक छवि अपने मन में ना बनाएं। कई बार ऐसे इंसान की बातों को सुनकर आप स्वयं भी दुखी हो सकते हैं या क्रोध अथवा गुस्से में आकर यह कह सकते हैं कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए, परंतु आपको यह समझने की जरूरत है कि आप उनके ऊपर अपनी भावनाओं को नहीं डाल सकते क्योंकि आप यहां उनकी मदद करने के लिए हैं ना कि उनकी समस्या को और बढ़ाने के लिए.

आपके द्वारा आत्म-क्षति रोगी के लिए करने योग्य कार्य

  1. ऐसे व्यक्ति से उस समय जरूर बात करने की कोशिश करें जब वह खुद को नुकसान पहुंचाने की मन:स्थिति में हो। जिसके लिए सबसे पहले उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें, क्योंकि उसी के बाद आप उस व्यक्ति के साथ सकारात्मक रूप से बात कर पाएंगे और उसे इस मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने में उसकी मदद कर सकेंगे
  2. ऐसे व्यक्ति की “स्वयं क्षति” पहुंचाने जैसी गंभीर समस्या के उपायों को ढूंढने में उनकी मदद करें, जिसके लिए आप उन्हें कुछ लेख दिखा सकते हैं। साथ ही आजकल ऑनलाइन ऐसी बहुत सारे लेख, ब्लॉग आसानी से मिल जाएंगे जो उनकी स्थिति में आत्म क्षति की भावना को दूर करने में उनकी मदद कर सकते हैं
  3. आप चाहें तो उन्हें मदद लेने के लिए भी प्रोत्साहित कर सकते हैं। जिससे कि वह बाहर जाकर डॉक्टर अथवा विशेषज्ञ की देखरेख में सही जानकारी प्राप्त कर सकें
  4. ऐसे व्यक्ति की यह समझने में मदद करें कि स्वयं को नुकसान पहुंचाने की उनकी समस्या कोई शर्मनाक या गुप्त समस्या नहीं है। यह एक बहुत ही सामान्य समस्या है जो किसी को भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में उनको पूरी तरह से भरोसा दिलाते रहें कि आप पूरी तरह से उनके साथ हैं।

आत्म क्षति के रोगी के भले के लिए क्या ना करें?

  1. स्वयं विशेषज्ञ बनने की कोशिश ना करें। आप ऐसे व्यक्ति की मदद उनके दोस्त या साथ ही बनकर कर सकते हैं। परंतु बेहतर होगा यदि आप खुद ही विशेषज्ञ बनने की कोशिश ना करें।
  2. उन्हें यह समझाने की कोशिश करें कि किसी भी कार्य का परिणाम रातों-रात नहीं आता। परिणाम आने में समय, किस्मत तथा प्रयास दोनों ही लगते हैं
  3. क्रोध, उदासी या गुस्से से उनकी किसी भी बात का जवाब ना दें। ऐसा करने से वह बुरा महसूस करेंगे जिसके कारण उनमें बदलाव लाना और अधिक मुश्किल हो जाएगा
  4. कोशिश करें कि आप उन्हें आत्म क्षति (सेल्फ इंजरी) से होने वाले नुकसान के विषय में खुलकर बता सकें। परंतु ऐसी बातें करते समय आप अपने आप को पूरी तरह से शांत रखें। जिससे कि वह आपके साथ कनेक्शन बना सके, आपकी बातों को सुन सके और समझने का प्रयास कर सकें।
  5. जब कभी भी वह खुद को आत्म क्षति पहुंचा रहे हो या ऐसी कोशिश करें, तब आप की कोशिश होनी चाहिए कि आप उस समय उनके साथ हों तथा उन्हें ऐसा करने से रोकने में उनकी मदद करें।
  6. अच्छा होगा यदि आप ऐसे समय में उनका ध्यान भटकाने के लिए उन्हें कहीं बाहर के घूमाने के लिए लेकर चले जाएं या फिर कुछ ऐसी बातें करें जिससे उनका ध्यान भटक सकें
  7. जब उनका मूड ठीक हो तब उनसे ऐसे वादे लें कि वह दोबारा ऐसा कभी नहीं करेंगे
  8. उनको कभी भी ऐसी धमकी ना दें कि यदि उन्होंने दोबारा ऐसा किया तो आप कभी भी उनके पास नहीं आएंगे। इस प्रकार की धमकियों से ऐसे व्यक्तियों की मानसिक सोच पर बहुत गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और वह आत्म क्षति की भावना से निकलने के बजाय उसी के अंदर और चले जाते हैं
  9. ऐसे व्यक्तियों को हीन की भावना से निकालने में मदद करें। साथ ही उनके द्वारा स्वयं को अपनी इस आत्मा क्षति के लिए जिम्मेदार ना समझने दें।
  10. इस बात की भी पूरी तरह से कोशिश करें कि वह सही विशेषज्ञ या डॉक्टर की निगरानी में अपना इलाज करवाएं।

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