अल्जाइमर के रोगी के साथ बातचीत करने में सहायक 15 वैज्ञानिक टिप्स

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alzheimer disease

अल्जाइमर या मनोभ्रंश रोग से पीड़ित व्यक्ति से बातचीत करना कई बार एक चुनौतीपूर्ण कार्य हो सकता है। कुछ अल्जाइमर से जुड़ी बातचीत करने की विशेष तकनीकों को सीख कर हम अल्जाइमर के रोगी के साथ सही ढंग से जुड़ सकते हैं और एक सार्थक समय का आनंद ले सकते हैं। डिमेंशिया अथवा मनोभ्रंश या फिर अल्जाइमर से पीड़ित किसी भी व्यक्ति के साथ बातचीत को बेहतर करने के लिए ये 15 युक्तियां हैं जो ऐसे व्यक्तियों से बातचीत करने के दौरान आपकी मदद कर सकतीं हैं। अल्जाइमर से पीड़ित व्यक्ति के साथ रहना मुश्किल हो सकता है। इसमें शामिल सभी लोगों पर अलग सा तनाव होता है। बातचीत करते समय सामने वाला व्यक्ति (जो रोगी से बात करने की कोशिश करता है) खुद को उदासी, क्रोध या भय जैसी भावनाओं से भरा हुआ महसूस कर सकता है। दुर्भाग्य से, जब हम इन भावनाओं के वशीभूत होकर अपने बुजुर्गों से (जो इस रोग से पीड़ित हैं) बातचीत करते हैं तो यह उस बातचीत को और अधिक कठिन बना सकता है। परेशान होने के बजाय, आप इन 15 सहायक युक्तियों को ध्यान में रखें जब भी आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ बातचीत कर रहे हों, जिसे मनोभ्रंश या अल्जाइमर है।

Table Of Contents
  1. छोटे वाक्य और छोटे शब्दों का उपयोग करें
  2. सीधी बात कहें
  3. खुद को पहचानें
  4. रुकावट को दूर रखें
  5. सदैव खुद को सकारात्मक रखें
  6. दो चीजों के बीच किसी एक का चुनाव करने की बात कहें या फिर हां या ना में जवाब देने जैसे प्रश्न पूछें
  7. अपने लिए कुछ समय निकालें
  8. धीरे-धीरे बात करें
  9. सबसे महत्वपूर्ण बात ‘अपनों का साथ’
  10. बातचीत करने के लिए लिखने के अलावा दूसरे माध्यमों पर भी विचार करें
  11. इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि आपकी बॉडी लैंग्वेज भी एक प्रकार का संदेश भेजती है
  12. यदि जरुरत हो तो उन्हें पुनः निर्देशित करिए
  13. बातचीत बंद ना करें
  14. सक्रिय सुनने का अभ्यास करें
  15. अल्झाइमर के रोगी के बारे में नकारात्मक धारणाएं ना बनाएं

छोटे वाक्य और छोटे शब्दों का उपयोग करें

बड़े-बड़े शब्द या वाक्य कई बार भ्रमित करने वाले होते हैं। जहां तक हो सके ऐसे वाक्यों और शब्दों के प्रयोग से बचें। कोशिश करें कि आप छोटे-छोटे शब्द और वाक्य बनाकर अल्जाइमर के व्यक्ति से बात करें, जिससे वह आपकी बातों को समझ सकें।अपनी बातों के बीच में थोड़ा सा अल्प-विराम जरूर दें।

सीधी बात कहें

भ्रम पैदा करने वाली बातों को कहने से बचें। आपका वास्तव में किसी बात को कहने से क्या मतलब है, वह सीधे तरीके से कहें। यदि आप किसी जगह या व्यक्ति को संदर्भित कर रहे हैं तो सर्वनामों का उपयोग करने के बजाय सीधे तौर पर उस व्यक्ति यह जगह के नाम का उपयोग करें। आप चाहे तो इसके साथ ही उन्हें उस व्यक्ति यह जगह से जुड़े उनके संबंध को भी बता सकते हैं। परंतु कोशिश यही रखें कि आपकी बातें सीधी और आसानी से समझने के लायक हों।

खुद को पहचानें

इस बात का ध्यान रखें कि अल्जाइमर से पीड़ित व्यक्ति किसी से मिलते समय तुरंत इस बात को याद नहीं कर पाता कि सामने वाला व्यक्ति कौन है। ऐसी स्थिति में बहुत भावुक ना हो अपितु उन्हें यह याद दिलाने में मदद करें कि आपका नाम क्या है और आप उनसे कैसे संबंधित हैं। आपके सौम्य व्यवहार से आप उनकी यादों को वापस लाने में उनकी मदद करने के साथ ही उन्हें सुरक्षित भी महसूस करवा सकते हैं। फिर भी यदि वे जरूरत से ज्यादा भ्रमित दिखें तो आप घर में उनकी देखभाल करने वाले किसी व्यक्ति के द्वारा खुद का उनसे परिचय करवाएं। इससे वे अधिक आरामदायक महसूस करेंगे।

रुकावट को दूर रखें

किसी भी अन्य व्यक्ति की तरह मनोभ्रंश से ग्रसित व्यक्ति भी बातचीत करते समय अपना ध्यान इधर-उधर होने की वजह से बातों के बीच में भटक जाता है। टीवी, रेडियो या इधर-उधर भागते बच्चे जल्दी उसका ध्यान अपनी तरफ खींच लेते हैं। जिसकी वजह से वह जो कहने जा रहा होता है या सोच रहा होता है, उस बिंदु से भटक जाता है। हालांकि हम उसके इस तरह के व्यवहार से जल्द ही विचलित हो जाते हैं, परंतु यह वक्त विचलित होने के बजाय उस व्यक्ति की स्थिति को समझने का है। ऐसी रुकावटों को कम करने के लिए यह सुनिश्चित करें कि जब भी आप उनसे बात कर रहे हैं तो आप आसपास के इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों को बंद कर दें और जहां तक हो सके एक शांत जगह पर उनसे बात करें। जरूरी यह भी है कि आप अपने घर के आसपास के वातावरण को ध्यान से देखें कि ऐसी कौन सी चीजें हैं जो उनका ध्यान इधर-उधर भटका सकती हैं, जिन्हें हटाने की जरूरत है।

सदैव खुद को सकारात्मक रखें

मनोभ्रंश से ग्रसित व्यक्ति आपके द्वारा कहे जा रहे शब्दों या फिर भावनाओं का कोई भी मतलब समझ सकता है, खासकर तब जब यदि वे उस स्वर से मेल नहीं खातीं जो हम उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बात को हमेशा याद रखें कि यह वह व्यक्ति है जिसकी आप दिल से परवाह करते हैं। आप यह दिखाना चाहते हैं कि आप उनकी परवाह करते हैं और समय आपके साथ है, इन दो बातों को कभी ना भूलें।

दो चीजों के बीच किसी एक का चुनाव करने की बात कहें या फिर हां या ना में जवाब देने जैसे प्रश्न पूछें

बातचीत करना तब ज्यादा आसान हो जाता है, यदि आप सामने वाले को किन्हीं दो चीजों के बीच चुनाव करने की स्वतंत्रता दे दें। बजाय यह पूछने की दोपहर के खाने में वे क्या खाना चाहते हैं या फिर किसी बात के विषय में वह क्या सोचते हैं? आप उनको विकल्प दे सकते हैं उदाहरण के लिए “आप उनसे पूछ सकते हैं कि क्या आप दोपहर के भोजन के लिए मिर्च सैंडविच पसंद करेंगे या चीज सैंडविच?” ऐसी स्थिति में उनके लिए चुनाव करना ज्यादा आसान होगा। इस बात का ध्यान रखें कि आपके बुजुर्ग किन्ही दो चीजों के बीच चुनाव जल्दी और आसानी से कर सकेंगे। इसी प्रकार से आप यदि चाहें तो हां या ना में जवाब पाने वाले प्रश्न भी पूछ सकते हैं, जैसे कि “क्या आप कुछ मीठा खाना चाहेंगे?”

अपने लिए कुछ समय निकालें

मनोभ्रंश अल्जाइमर के साथ किसी को जीवित देखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हमें भावनाओं की एक ऐसी विविधता का अनुभव हो सकता है जो हमारे स्वयं के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। बातचीत में उलझने से पहले खुद को स्थिर करने के लिए एक मिनट निकालें। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनकी बीमारी अर्थात मनोभ्रंश का स्तर कितना एडवांस है। आपको सिर्फ इस बात का ध्यान रखना है कि यह वही व्यक्ति है जिनकी आप परवाह करते हैं और इस बीमारी से ग्रसित होने के बावजूद भी इन्हें आपकी परवाह है।

धीरे-धीरे बात करें

आप जब भी अल्जाइमर के रोगी से बातचीत करें तो कोशिश करें कि आप धीरे-धीरे बात करें। इससे उन्हें आपकी बात को समझने का वक्त मिल जाएगा और साथ ही आप जो कह रहे हैं उसका उनसे क्या संबंध है यह भी वह आसानी से समझ सकेंगे।

सबसे महत्वपूर्ण बात ‘अपनों का साथ’

कई बार जो बात सबसे ज्यादा मायने रखती है वह होता है कि उस अल्जाइमर से ग्रसित व्यक्ति के साथ वक्त बिताना। देखभाल करने वाली सेवाओं से सहायता प्राप्त करना एक अलग बात है और किसी अपने का साथ में समय बिताना बिल्कुल अलग। कोशिश करें कि आप अपने बुजुर्ग के साथ ज्यादा से ज्यादा अच्छा समय बिता सकें, इससे उनके स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

बातचीत करने के लिए लिखने के अलावा दूसरे माध्यमों पर भी विचार करें

बातचीत की तकनीक का चुनाव करते समय यह जरूरी है कि आप उस तकनीक का इस्तेमाल करें जो आपके और आप के रोगी के बीच बातचीत का सबसे अच्छा माध्यम साबित हो। यह इसबात पर भी निर्भर करता है कि आपके रोगी की उम्र कितनी है, बातचीत करते समय वह कैसा महसूस करतें हैं? कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी बातों को लिखकर ज्यादा अच्छे से कह पातें हैं बजाए मुंह से बोल कर। लिखने से उनको न केवल अपनी बात कहने का ज्यादा समय मिलता है, बल्कि वह अपनी गलतियों को भी सुधार पाते हैं।लिखने के अलावा अन्य माध्यमों का भी उपयोग करना याद रखें जैसे कि ध्वनि, गंध, स्वाद, स्पर्श आदि सभी बातचीत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि आपकी बॉडी लैंग्वेज भी एक प्रकार का संदेश भेजती है

आंखों द्वारा संपर्क बनाने से आप अपने बुजुर्ग को यह संदेश दे सकते हैं कि आप उनकी बातें सुन रहे हैं। अपनी बॉडी लैंग्वेज को उस भावना से मिलाने की कोशिश करें जिस भावना को आप उनके सामने व्यक्त करना चाहते हैं।

यदि जरुरत हो तो उन्हें पुनः निर्देशित करिए

किसी को संभावित रूप से खतरनाक कार्य करने से रोकने की कोशिश के बजाय उन्हें सुरक्षित या सकारात्मक गतिविधि की ओर पुनर्निर्देशित करने की कोशिश करें।

बातचीत बंद ना करें

इसमें कोई बुराई नहीं कि आप बातचीत करने की कुछ सीमाएं बना लें। हालांकि बातचीत में होने वाली बाधाओं से हमेशा बचना चाहिए। कोशिश करें कि “क्यों” पूछने की जरूरत ना आएं। आप अपने बुजुर्गों (जो कि अल्जाइमर से ग्रसित हैं) से कोई ऐसी बात करने के लिए उन्हें मजबूर ना करें जिसे वह करने के मूड में न हों। ऐसा करने से आप दोनों के बीच अच्छी बातचीत का रास्ता शुरू होने के पहले खत्म हो जाता है। सबसे ज्यादा जरूरी है कि बातचीत में होने वाली रुकावटों को रोकें। इससे आप दोनों के बीच बातचीत बिना किसी रूकावट के होगी और वे अपने विचार खुलकर आपके सामने रख सकेंगे अल्जाइमर के रोगी से बात करते समय बोलने के बजाय सुनने पर ज्यादा ध्यान दें।

सक्रिय सुनने का अभ्यास करें

सक्रिय सुनने का मतलब इस बात से होता है कि आप सामने वाले को यह जानने का मौका देते हैं कि आप उसकी बात को सुनने के साथ-साथ समझ भी रहे हैं। उनकी बातों के बीच में सिर हिलाना और प्रतिक्रियाएं देना उन्हें यह महसूस कराने में मदद करता है कि आप उनको अधिक सुनना चाहते हैं। हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि कभी-कभी सक्रिय सुनना कुछ स्थितियों में मदद करने से ज्यादा परेशानी का भी सबब बन जाता है। उदाहरण के लिए किसी को छोटे प्रोत्साहन देने के लिए “उह-हह” ऐसे शब्दों का अधिक उपयोग करने से फायदे से ज्यादा नुकसान हो जाता है। समय लें और यह समझने की कोशिश करें कि आपके व्यक्ति पर कौन सी तकनीक सबसे अच्छी तरह काम करेगी। यदि आप के बुजुर्ग देखभाल वाली सेवाएं प्राप्त करते हैं तो उनकी देखभाल करने वाले व्यक्तियों से भी उनके व्यवहार के बारे में जरूर बातचीत करें।

अल्झाइमर के रोगी के बारे में नकारात्मक धारणाएं ना बनाएं

किसी वाक्य को खत्म करने के लिए यह मान लेना कि सामने वाले ने इसे समझ लिया या फिर वह बातचीत में भाग नहीं लेना चाहता गलत होगा। जहां तक हो सके ऐसी धारणाओं से बचें। आपके बुजुर्ग उन बातचीत में शामिल होने के योग्य हैं जिन्हें वह समझते हैं कि वह उनके लिए हैं। हर बात पर हस्तक्षेप करना या फिर ऊपरी तौर पर सिर्फ संदेश को भेज देना यह दिखाता है कि आप इस बात पर विश्वास ही नहीं करना चाहते कि वह (अल्जाइमर से ग्रसित व्यक्ति) बात करने के काबिल हैं।

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