जानिये डिप्रेशन (अवसाद) से जुड़े हुए ये 60 चौंकाने वाले तथ्य

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मानसिक अवसाद या डिप्रेशन का अर्थ मन में बसे हुए दुख और निराशा की भावना से होता है। इस अवस्था में व्यक्ति स्वयं को लाचार और निराश महसूस करता है। उस व्यक्ति को निराशा ही नज़र आती है तथा स्वयं का मूल्य बिलकुल ख़त्म हो जाता है. पहले जिन कार्यों को करने में व्यक्ति आनंद का अनुभव करता था वे अवसादग्रस्त होने पर आनंद की अनुभूति नहीं देते. डिप्रेशन के मरीज़ में उग्र स्वभाव, रोते रहना, गाली गलौज व अत्यधिक शंका करना शामिल होता है इस दौरान उसे सर्वत्र निराशा, तनाव, अधीरता, अरुचि और अशांति प्रतीत होती है। अवसाद के 90% रोगियों में नींद न आने या टूट-टूट कर आने की समस्या होती है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार अवसाद के कई कारण हो सकते हैं – जैसे जैविक, भौतिक, आनुवांशिक और मनोसामाजिक। मानसिक अवसाद विश्व में इतना अधिक हो चूका है कि हम सब को सजग रहना चाहिए और यदि हमारा कोई दोस्त या परिवार का कोई सदस्य गुमसुम रहता है, निराशावादी बातें करता है, दुखी रहता है या अकेले ही रहना चाहता है तो उसे तुरंत किसी मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। आइये जानते हैं मानसिक अवसाद या डिप्रेशन से जुड़ी हुई ये ख़ास बातें.

  • डिप्रेशन से पीड़ित लोगों को गैर-उदास लोगों की तुलना में अधिक बार सर्दी और ज़ुकाम होती है।
  • सकारात्मक घटनाओं जैसे कि कॉलेज की पढ़ाई शुरू करना, शादी करना, या एक नई नौकरी शुरू करने से भी डिप्रेशन (अवसाद) हो सकता है।
  • शोधकर्ताओं ने हाल ही में पाया है कि जो लोग अवसाद से पीड़ित हैं, उन्हें हड्डियों के अन्दर खनिज के कम होने का खतरा है। अवसादग्रस्त महिलाओं को विशेष रूप से ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) होने का खतरा होता है। इस अवस्था में हड्डियों के अन्दर कैल्शियम की कमी हो जाती है और वे कमज़ोर हो जाती हैं.
  • अमेरिका में एक वर्ष में 20 मिलियन (2 करोड़) से अधिक लोग डिप्रेशन (अवसाद) से पीड़ित होते हैं।
  • मादक द्रव्यों के सेवन की समस्याओं वाले लगभग 30% लोग भी डिप्रेशन से पीड़ित हैं।
  • पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अवसाद से ग्रस्त होने की दोगुनी संभावना है । एस्ट्रोजेन (Estrogen) नाम के हॉर्मोन के कारण महिलाओं में डिप्रेशन की अधिक संभावना होती है. यह हॉर्मोन अवसाद में योगदान देने वाले न्यूरोट्रांसमीटर (Neurotransmitter) की गतिविधि को प्रभावित करता है।
  • जीवन में कभी न कभी, चार में से एक व्यक्ति अवसाद का अनुभव करता है।
  • पुरुष आमतौर पर महिलाओं से अलग प्रकार से अवसाद का अनुभव करते हैं और उसका सामना करने के लिए भी विभिन्न साधनों का उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, जबकि महिलाएं निराशाजनक महसूस करती हैं, वहीं पुरुष चिड़चिड़ा महसूस करते हैं। महिलाओं को सुनने की लालसा हो सकती है, जबकि पुरुष सामाजिक रूप से पीछे हट सकते हैं या हिंसक या अपमानजनक बन सकते हैं।
  • लगभग 15% लोग, जो किसी न किसी रूप में अवसाद से पीड़ित हैं, हर साल अपनी जान ले लेते हैं।
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, 6% से अधिक बच्चे अवसाद से पीड़ित हैं और उनमें से 4.9% में बहुत अधिक अवसाद है।
  • क्योंकि वृद्ध लोगों के दिमाग में क्षति और टूट फूट अधिक होती है, इसलिए वे युवा लोगों की तुलना में अधिक अवसाद ग्रस्त होते हैं।
  • अवसाद से पीड़ित लोगों में गैर-अवसादग्रस्त लोगों की तुलना में सांस से संबंधित नींद विकार होने की संभावना पांच गुना अधिक होती है ।
  • विलियम स्टाइरॉन (William Styron) ने डार्कनेस विज़िबल (Darkness Visible) नामक पुस्तक में अत्यधिक अवसाद के साथ अपने अनुभवों के बारे में लिखा । उन्होंने अवसाद को ऐसे वर्णित किया – “मस्तिष्क में एक भयावह गति”,”चिंता के भयानक दौरे पड़ना,” “एक प्रकार की सुन्नता, एक दुर्बलता, एक अजीब नाजुकता – जैसे कि मेरा शरीर वास्तव में भंगुर हो गया हो, अति संवेदनशील हो, और किसी तरह से अलग-थलग और निराश हो गया हो।”
  • एक प्रकार का अवसाद जिसे हॉस्पिटेलिज्म (एनाक्लिटिक डिप्रेशन) (Hospitalism- Anaclitic Depression) कहा जाता है, उन संस्थानों में देखा जा सकता है जहां बच्चों को पर्याप्त भावनात्मक देखभाल नहीं मिलती। ये बच्चे उदासीन हो जाते हैं और समाज से कट जाते हैं, भले ही उनकी शारीरिक देखभाल की जाती हो।
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  • अवसाद के मरीजों में एगोराफोबिया (Agoraphobia), या सार्वजनिक रूप से बाहर जाने का डर हो सकता है।
  • मध्य युग के दौरान, मानसिक रूप से बीमार लोगों को शैतान या अन्य बुरी आत्माओं के प्रभाव में बताया जाता था।
  • अमेरिका में पहला मानसिक आश्रय 1773 में विलियम्सबर्ग, वर्जीनिया में खोला गया।
  • सिगमंड फ्रायड, जिन्होंने अचेतन के अपने सिद्धांतों के साथ मनोचिकित्सा के अभ्यास में क्रांति ला दी, ने विश्व को बताया कि डिप्रेशन (अवसाद) हमारे अंदर के क्रोध का खुद के प्रति बदला हुआ रूप है।
  • अवसाद के लगभग 80% पीड़ितों को उपचार नहीं मिल प् रहा है।
  • हाल के वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि अवसाद कैंसर से पीड़ित लोगों के जीवन को कई वर्षों तक छोटा कर सकता है ।
  • द्विध्रुवी विकार (बाइपोलर डिसऑर्डर या Bipolar Disorder) या उन्मत्त अवसाद (मैनिक डिप्रेशन या Manic Depression), एक वर्ष में लगभग 6 मिलियन (60 लाख) अमेरिकी वयस्कों को प्रभावित करता है।
  • वैज्ञानिक शोधकर्ताओं ने डिप्रेशन और महिलाओं में कैरोटिड धमनी के अन्दर रुकावट के बीच सीधा संबंध पाया है , जो स्ट्रोक या पैरालिसिस (लकवा मार जाना) के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है।
  • जब बच्चों को अस्थमा और अवसाद दोनों होते हैं, तो उनका अस्थमा आमतौर पर उन बच्चों की तुलना में अधिक खराब होता है जो डिप्रेशन (अवसाद) ग्रस्त नहीं होते हैं।
  • औसत वीडियो गेमर जो आमतौर पर 35 वर्षीय पुरुष होता है, उसके उदास, अधिक वजन और अंतर्मुखी होने की संभावना अधिक होती है।
  • जब पुरुष मिडलाइफ में पहुँच जाते हैं, तो उन्हें टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) नामक पुरुष हॉर्मोन की कमी के कारण अवसाद का खतरा बढ़ सकता है।
  • अवसाद ‘रुमेटोइड आर्थराइटिस’ (Rheumatoid Arthrits) की वजह से होने वाले जोड़ों के दर्द के साथ जुड़ी हुई सूजन को बढ़ा सकता है।
  • अवसाद के पीड़ितों को अधिक समय तक धूप के दिनों की तुलना में कम धूप वाले दिनों में अधिक दिमागी हानि का अनुभव हो सकता है।
  • एक अवसादग्रस्त महिला के जल्दी जन्म देने की संभावना अधिक होती है, जिससे महिला और बच्चे दोनों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है। 14 से 23% गर्भवती महिलाओं को किसी न किसी प्रकार की अवसादग्रस्तता का अनुभव होता है।
  • ओमेगा-3 से भरपूर सीफूड ज़रुरत से अधिक खाने से भी गर्भवती महिलाओं को अवसाद हो सकता है।
  • एक हालिया वैज्ञानिक अध्ययन से पता चलता है कि मानसिक अवसाद ग्रस्त पिता के शिशु के अत्यधिक रोने की संभावना सामान्य पिता के शिशु से दोगुना हैं।
  • राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य सूचना के अनुसार, प्रसव के बाद का अवसाद (पोस्ट-पार्ट डिप्रेशन या प्रसवोपरांत डिप्रेशन) मलगभग 10% नई माताओं को प्रभावित करता है ।
  • एक बुजुर्ग रिश्तेदार की देखभाल करने वालों में से 58 प्रतिशत लोग डिप्रेशन (अवसाद) का अनुभव करते हैं।
  • अधिक वजन वाले बच्चे काफी छोटी उम्र से ही अपने सामान्य वजन वाले साथियों की तुलना में अधिक अकेला और चिंतित महसूस करने लग जाते हैं। यदि समय पर रोकथाम न की जाये तो बालवाड़ी में उदास महसूस करने वाले लड़के और लड़कियां दोनों समय के साथ और अधिक अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं।
  • रजोनिवृत्ति परिवर्तनकाल (Perimenopause) के परिणामस्वरूप महिला हार्मोन का स्तर कम होना और हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होना डिप्रेशन (अवसाद) को शुरू कर सकता है।
  • मारिजुआना (गांजा) के लंबे समय तक उपयोग से डोपामाइन नाम के हॉर्मोन के उत्पादन में परिवर्तन होता है और जिस से अवसाद के लक्षणों की शुरुआत हो जाती है।
  • अवसाद का सबसे पहला चिकित्सीय वर्णन हिप्पोक्रेट्स, यूनानी “चिकित्सा के जनक” से मिलता है, जिन्होंने शरीर के चार हास्यों के असंतुलन को अवसाद, या उदासी के लिए जिम्मेदार ठहराया । अवसाद से उबरने के लिए, हिप्पोक्रेट्स ने विश्राम करने और स्वस्थ रहने की रणनीतियों के साथ-साथ रक्त-त्याग और लीचेस (Leeches) का उपयोग करते हुए शरीर प्रणालियों को पुनर्संतुलित करने की सिफारिश की।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक केवल एचआईवी / एड्स के बाद अवसाद ही विकलांगता का दूसरा सबसे बड़ा चिकित्सा संबंधी कारण होगा।
  • दूसरे विश्व युद्ध के बाद के दशकों में पैदा होने वाले लोगों में पूरे जीवनकाल में अवसाद का खतरा बढ़ रहा है। लोगों में अवसाद के शुरुआत की उम्र तेजी से कम होती जा रही है। आज अवसाद की शुरुआत के लिए औसत उम्र 24से 35 साल के बीच अलग अलग होती है, जहां इसकी औसत उम्र 27 वर्ष है।
  • इतिहास के कई प्रसिद्ध रचनात्मक व्यक्तियों ने अवसाद का अनुभव किया है, जिसमें रॉबर्ट शुमान, लुडविग वान बीथोवेन, पीटर टैचिकोवस्की, जॉन लेनन, एडगर एलन पो, मार्क ट्वेन, जॉर्जिया ओ’कीफ, विंसेंट वैन गोघ , अर्नेस्ट हेमिंग्वे, एफ स्कॉट फिट्जगेराल्ड और सिल्विया प्लाथ (Robert Schumann, Ludwig van Beethoven, Peter Tchaikovsky, John Lennon, Edgar Allan Poe, Mark Twain, Georgia O’Keefe, Vincent van Gogh, Ernest Hemingway, F. Scott Fitzgerald, and Sylvia Plath) शामिल हैं।
  • वैश्विक स्तर पर, डिप्रेशन ऑफ़ ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीज़ स्टडी के अनुसार , अवसाद विकलांगता और जल्द मृत्यु का चौथा कारण है ।
  • डिप्रेशन या मानसिक अवसाद अक्सर खुद को चार तरीकों से प्रस्तुत करता है: मूड में बदलाव, संज्ञानात्मक (स्मृति और विचार प्रक्रिया) परिवर्तन, शारीरिक परिवर्तन और व्यवहार परिवर्तन।
  • अब्राहम लिंकन पहली बार एक गहरे डिप्रेशन (अवसाद) में आ गए, जब उनके पहले प्यार ऐन रूटलेज का निधन हो गया। लिंकन कथित तौर पर अपने पूरे जीवन में स्थाई अवसाद से पीड़ित थे।
  • कुछ बीमारियाँ अवसाद से जुड़ी होती हैं, जैसे कि थायराइड की समस्याएँ, हृदय रोग , स्ट्रोक, कैंसर , अल्जाइमर, पार्किंसंस रोग, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (obstructive sleep apnea) और चिरकालिक दर्द।
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  • शोधकर्ताओं ने पाया है कि पार्किंसंस रोगियों में सबसे अधिक परेशान और अक्षम करने वाला कारक बीमारी या दवा के प्रभाव के कारण होने वाली शारीरिक सीमाओं के बजाय अवसाद था।
  • एनोरेक्सिया नर्वोसा ( anorexia nervosa), बुलिमिया नर्वोसा (bulimia nervosa) और अन्य ईटिंग डिसऑर्डर जैसे खाने संबंधी विकारों वाले लोगों में अवसाद एक आम बात है।
  • संयुक्त राज्य में अवसाद की कुल लागत $ 44 बिलियन होने का अनुमान है: उपचार की प्रत्यक्ष लागत में 12 बिलियन डॉलर, समय से पहले मौत की लागत में 8 बिलियन डॉलर और अनुपस्थिति व काम पर कम उत्पादकता की लागतमें 24 बिलियन डॉलर। इनमें आउट-ऑफ-पॉकेट परिवार के खर्च, मामूली और अनुपचारित अवसाद की लागत, अस्पताल में अत्यधिक भर्ती, सामान्य चिकित्सा सेवाएं, और नैदानिक परीक्षण के खर्चे शामिल नहीं हैं।
  • अवसादग्रस्त व्यक्तियों की सामान्य व्यक्तियों की तुलना में मृत्यु का खतरा दो गुना अधिक होता है, जिसके प्रत्यक्ष (जैसे, आत्महत्या ) और अप्रत्यक्ष (चिकित्सा बीमारी) कारण होते हैं।
  • ब्रेन-इमेजिंग शोध से पता चलता है कि जो बुजुर्ग उच्च रक्तचाप, मधुमेह , या उच्च कोलेस्ट्रॉल के कारण मस्तिष्क के ऊतकों के नुकसान से पीड़ित होते हैं, उनमें अवसाद विकसित होने की संभावना अधिक होती है। एक स्वस्थ वजन बनाए रखने, नियमित व्यायाम करने, और उचित व समय पर चिकित्सा देखभाल प्राप्त करने से वृद्धावस्था में अवसाद विकसित होने का खतरा कम हो जाता है।
  • मौसमी भावात्मक विकार (एस.ए.डी. या सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर) अवसाद का वो समय है जो मौसम के बदलाव से संबंधित हैं। पुरुषों की तुलना में एस.ए.डी. महिलाओं में चार गुना अधिक आम बात है।
  • अमेरिका में अवसाद 33 बच्चों में से 1 और 8 किशोरों में से 1 में हो सकता है। एक बार जब किसी बच्चे या किशोर में अवसाद का एक प्रकरण होता है, तो उसमें अगले पांच वर्षों में फिर एक और प्रकरण होने की संभावना 50% से अधिक होती है।
  • डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि दुनिया भर में 300 मिलियन (30 करोड़) से अधिक लोग डिप्रेशन (अवसाद) से पीड़ित हैं। यह विश्व में विकलांगता का प्रमुख कारण भी है।

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