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जानिये वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित ‘योग’ से प्राप्त होने वाले कुछ महत्वपूर्ण लाभ

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योग संस्कृत शब्द “युजी” से व्युत्पन्न, जिसका अर्थ मिलन होता है, योग एक प्राचीन अभ्यास है जो मन और शरीर को एक साथ एक लय में लाता है। इसमें साँस लेने के व्यायाम, ध्यान और विश्राम को प्रोत्साहित करने के अतिरिक्त तनाव को कम करने में प्रभावी तरीकों को शामिल किया गया है। कहा जाता है कि योग का अभ्यास मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए कई प्रकार से लाभदायक होता है। परंतु योग द्वारा प्राप्त सभी लाभों को विज्ञान द्वारा समर्थित नहीं किया गया है। यह लेख योग से प्राप्त उन लाभों पर आधारित है, जिनकी सत्यता साक्ष्य द्वारा प्रमाणित की जा चुकी है।

Table Of Contents
  1. योग के अभ्यास से चिंता से निपटने में सहायता मिलती है ‌
  2. योग आपके हृदय स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है
  3. योग तनाव को कम करने में सक्षम है
  4. योग डिप्रेशन (मानसिक अवसाद) से लड़ने में मदद करता है
  5. योग आपके जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सकता है
  6. योग का अभ्यास इन्फ्लेमेशन (सूजन) में कमी ला सकता है
  7. योग आपकी शारीरिक क्षमता को बढ़ा सकता है
  8. योग का अभ्यास आपको माइग्रेन से राहत दिला सकता है
  9. योग की प्रक्रिया सांस लेने में सुधार करने में मदद करती है
  10. योग नींद की गुणवत्ता को बढ़ावा दे सकता है
  11. योग का अभ्यास आपके पुराने दर्द को कम करने में सहायक हो सकता है
  12. योग आपके शरीर के लचीलेपन और संतुलन में सुधार करता है

योग के अभ्यास से चिंता से निपटने में सहायता मिलती है ‌

बहुत से लोग चिंता की भावनाओं से निपटने के लिए योग का अभ्यास करना शुरू करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि कई शोध इस बात का समर्थन करते नजर आते हैं कि योग चिंता को कम करने में मदद कर सकता है। एक अध्ययन में, चिंता विकार से पीड़ित 34 महिलाओं ने दो महीने के लिए साप्ताहिक रूप से दो बार योग कक्षाओं में भाग लिया।अध्ययन के अंत में, योग का अभ्यास करने वालों में दूसरे समूह की तुलना में चिंता का स्तर काफी कम पाया गया। एक अन्य अध्ययन में पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से पीड़ित 64 महिलाओं को शामिल किया गया, जो एक दर्दनाक घटना के संपर्क में आने के बाद गंभीर चिंता और भय से पीड़ित थीं। 10 सप्ताह के बाद, जिन महिलाओं ने साप्ताहिक रूप से एक बार योग का अभ्यास किया उनमें PTSD के कम लक्षण दिखाई पड़े। और इनमें से 52% प्रतिभागी तो अब पूरी तरह से PTSD से मुक्त हो चुके हैं। हालांकि यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि योग चिंता के लक्षणों को कैसे कम कर सकता है। परंतु ऐसा माना जाता है कि योग आपको वर्तमान समय में मौजूद रहने और शांति की भावना को खोजने के महत्व पर जोर देता है जो चिंता को कम करने में प्रभावी होता है।

योग आपके हृदय स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है

पूरे शरीर में रक्त पंप करने से लेकर महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के साथ ऊतकों की आपूर्ति तक, आपके हृदय का स्वास्थ्य समग्र स्वास्थ्य के लिए अपना विशिष्ट स्थान रखता है। अध्ययनों से पता चलता है कि योग हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और हृदय रोग को बढ़ाने वाले कई खतरनाक कारणों को भी कम करने में सहायता करता है। एक अध्ययन में पाया गया कि 40 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागियों ने पांच साल तक योग का अभ्यास किया, जिसके परिणाम स्वरूप उनका रक्तचाप और हृदय की धड़कन उन लोगों की तुलना में कम देखी गई जिन्होंने योग का अभ्यास नहीं किया था। उच्च रक्तचाप दिल की समस्याओं के प्रमुख कारणों में से एक है, जैसे कि दिल का दौरा और स्ट्रोक। अपने रक्तचाप को कम करने से हृदय रोग से जुड़ी इन समस्याओं के खतरों को कम करने में मदद मिल सकती है। कुछ शोध यह भी बताते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली में योग को शामिल करने से हृदय रोग की प्रगति को धीमा करने में मदद मिलती है।

एक अध्ययन में हृदय रोग के 113 रोगियों को शामिल किया गया, जिसमें उनके आहार में बदलाव करने के साथ तनाव प्रबंधन के लिए 1 साल तक योग का प्रशिक्षण दिया गया और उनकी जीवनशैली में आए बदलावों को नोटिस किया गया प्रतिभागियों ने यह पाया कि उनके कुल कोलेस्ट्रॉल में 23% की कमी और “खराब” एलडीएल कोलेस्ट्रॉल में 26% की कमी आई। इसके अतिरिक्त, 47% रोगियों में हृदय रोग की प्रगति काफी धीमी होती देखी गई। हालांकि यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि आहार और अन्य कारकों की तुलना में योग की भूमिका उनके हृदय रोग की गति को कम करने में कितनी महत्वपूर्ण रही होगी परंतु फिर भी यह स्पष्ट है कि योग तनाव को कम करने में योगदान देता है जो हृदय रोग से जुड़े गंभीर कारणों में एक कारण माना जाता है।

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योग तनाव को कम करने में सक्षम है

योग तनाव को कम करने और विश्राम को बढ़ावा देने की क्षमता के लिए जाना जाता है। वास्तव में, ऐसे कई अध्ययनों से पता चला है कि यह कोर्टिसोल के स्राव को कम करता है जो तनाव के लिए जिम्मेदार हार्मोन है। एक अध्ययन के अनुसार जिसे भावनात्मक रूप से व्यथित 24 महिलाओं के ऊपर किया गया था, यह निष्कर्ष निकाला गया कि योग के अभ्यास से उनके तनाव में काफी हद तक कमी देखी गई। तीन महीने के योग कार्यक्रम के बाद, उन महिलाओं में कोर्टिसोल का स्तर काफी कम था। साथ ही उनमें तनाव, चिंता, थकान और अवसाद का स्तर भी कम देखा गया। 131 लोगों से जुड़े एक अन्य अध्ययन में भी कुछ हद तक इसी प्रकार के समान परिणाम सामने आए, जिसमें 10 सप्ताह तक चले एक अध्ययन में जो तनावगस्त लोगों को शामिल करके किया गया, ऐसा देखा गया कि उनके तनाव एवं चिंता में कमी के साथ योग के कारण उनकी जीवन की गुणवत्ता और मानसिक स्वास्थ्य में भी आया सुधार नोटिस किया गया।

योग डिप्रेशन (मानसिक अवसाद) से लड़ने में मदद करता है

कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि योग अवसाद ग्रस्त व्यक्ति के मदद करने में प्रभावी होता है। यह अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि योग कोर्टिसोल के स्तर को कम करने में सक्षम है , जो कि तनाव से जुड़ा हार्मोन है, जो सेरोटोनिन के स्तर को प्रभावित करता है, न्यूरोट्रांसमीटर को भी अक्सर अवसाद से जोड़ कर देखा जाता है। एक अध्ययन में, उन प्रतिभागियों को शामिल किया गया जो नियमित रूप से शराब का सेवन करते थे। योग की एक विशिष्ट क्रिया, सुदर्शन क्रिया (जिसमें लयबद्ध श्वास पर ध्यान केंद्रित किया जाता है) का अभ्यास करवाया गया। 2 सप्ताह तक चलेगी शोध के बाद इन प्रतिभागियों में अवसाद के लक्षणों में कमी के साथ कोर्टिसोल के स्तर में भी कमी देखी गई साथ ही इनके ACTH का स्तर भी निम्न पाया गया यह कोर्टिसोल केस स्राव को उत्तेजित करने के लिए जिम्मेदार होता है। कुछ अन्य अध्ययन भी इसी तरह के परिणाम दिखातें हैं, जो योग के अभ्यास के कारण अवसाद में आई कमी को उजागर करते हैं। इन परिणामों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि मात्र योग के अभ्यास द्वारा अथवा दवाइयों के साथ योग के अभ्यास को करने से अवसाद से लड़ने में मदद मिल सकती है।

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योग आपके जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सकता है

कई व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए योग को एक सहायक चिकित्सा के रूप में देखा जा सकता है। एक अध्ययन में, 135 वरिष्ठों को छह महीने के योग, पैदल चलने जैसी क्रियाओं को करवाया गया। अन्य समूहों की तुलना में योग का अभ्यास करने वाले वरिष्ठ व्यक्तियों की ना केवल जीवन की गुणवत्ता में सुधार नोटिस किया गया अपितु उनकी मनोदशा और थकान में भी सकारात्मक प्रभाव देखे गए। एक अन्य अध्ययन में स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं, जिन्होंने कीमोथेरेपी ली हुई थी; को शामिल किया गया। योग करने वाली इन महिलाओं के समूह में कीमोथेरेपी के कारण होने वाले लक्षणों में जैसे कि उल्टी, मतली कमी के साथ जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार होता देखा गया। अन्य अध्ययनों में पाया गया है कि योग नींद की गुणवत्ता में सुधार, आध्यात्मिक रूचि को बढ़ाने, सामाजिक कार्य में सुधार करने और कैंसर के रोगियों में चिंता और अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है।

योग का अभ्यास इन्फ्लेमेशन (सूजन) में कमी ला सकता है

योग ना केवल आपके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है अपितु कुछ अध्ययन इस ओर संकेत करते हैं कि योग का अभ्यास आपके इन्फ्लेमेशन स्तर में गिरावट लाने में भी सहायक हो सकता है। इन्फ्लेमेशन एक सामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है, लेकिन जब शरीर में यह बीमारियों के कारण प्रो इन्फ्लेमेटरी डिजीज के रूप में बदल जाती है तो यह हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के विकास में योगदान देने लगती है। 2015 के एक अध्ययन ने 218 प्रतिभागियों को दो समूहों में विभाजित किया गया एक, वे जो नियमित रूप से योग का अभ्यास करते थे और दूसरी वे जो योग का अभ्यास नहीं करते। इसके पश्चात दोनों ही समूहों को तनाव कम करने हेतु योग करने का अभ्यास करवाया गया। अध्ययन के अंत में, योग का अभ्यास करने वाले व्यक्तियों में, उन लोगों की तुलना में इन्फ्लेमेटरी मार्कर का स्तर काफी कम पाया गया, जो योग का अभ्यास नहीं करते थे। इसी तरह, 2014 के एक छोटे से अध्ययन से पता चला कि 12 सप्ताह तक स्तन कैंसर से बचे लोगों ने जब योग का अभ्यास किया तो उनके भीतर इन्फ्लेमेशन (कोशिकाओं के अन्दर सूजन) के स्तर को कम पाया गया साथ ही उन्हें थकावट भी कम देखी गई। परंतु फिर भी अभी इन्फ्लेमेशन पर योग के लाभकारी प्रभावों की पुष्टि करने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है।

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योग आपकी शारीरिक क्षमता को बढ़ा सकता है

लचीलेपन में सुधार के अलावा, योग आपकी शारीरिक क्षमता को बढ़ाने के लिए भी एक बढ़िया विकल्प के रूप में सामने आता है। वास्तव में, योग करने के दौरान कुछ विशिष्ट आसनों को करना होता है जो व्यक्ति की शारीरिक क्षमता को बढ़ाने के साथ मांसपेशियों की मजबूती को भी बढ़ाते हैं। एक अध्ययन में, 79 वयस्कों ने सूर्य नमस्कार के 24 चक्रों को नियमित तौर पर 24 सप्ताह के लिए कुछ विशिष्ट आसनों के द्वारा करने को कहा गया।जब इस अध्ययन के परिणाम सामने आए तो योग करने वाले इन वयस्कों ने अपने शरीर में शारीरिक क्षमता को बढ़ा हुआ महसूस किया, साथ ही उन्होंने अपने बढ़े वजन में कमी को भी नोटिस किया। 2015 के एक अध्ययन में भी इसी तरह के निष्कर्ष निकल कर सामने आए जिसमें 12 सप्ताह तक चले एक अध्ययन के दौरान 173 प्रतिभागियों ने भाग लिया था और उनमें शारीरिक लचीलापन एवं संतुलन में आए सुधार को नोटिस किया गया इन निष्कर्षों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि योग आपके शरीर की शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है। विशेषकर जब यह आपकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनता है तो इसके सकारात्मक प्रभाव दूरगामी होने के साथ-साथ जल्दी ही देखने को मिलते हैं।

योग का अभ्यास आपको माइग्रेन से राहत दिला सकता है

माइग्रेन गंभीर आवर्ती सिरदर्द है जो हर साल 7 में से 1 अमेरिकी को प्रभावित करता है। परंपरागत रूप से, माइग्रेन के लक्षणों को दूर करने और प्रबंधित करने के लिए दवाओं के साथ इलाज किया जाता है। हालांकि, बढ़ते प्रमाण से पता चलता है कि माइग्रेन की आवृत्ति को कम करने में योग एक उपयोगी सहायक चिकित्सा के रूप में निकल कर सामने आया है। 2007 के एक अध्ययन ने माइग्रेन के 72 रोगियों को तीन महीने के लिए योग चिकित्सा तथा स्व-देखभाल जैसे दो समूह में विभाजित किया। योग का अभ्यास करने वाले लोगों में स्व-देखभाल समूह की तुलना में सिरदर्द की तीव्रता, आवृत्ति और दर्द में कमी देखी गई। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि योग करने से वेजस नर्व को उत्तेजित करने में मदद मिलती है, जो माइग्रेन से राहत दिलाने में कारगर साबित होती है।

योग की प्रक्रिया सांस लेने में सुधार करने में मदद करती है

प्राणायाम, या योगिक श्वास, योग में अंतर्निहित अभ्यास हैं जो श्वास अभ्यास और तकनीकों के माध्यम से श्वास को नियंत्रित करने पर केंद्रित हैं। अधिकांश प्रकार के योग में इन श्वास अभ्यासों को शामिल किया जाता है और कई अध्ययनों में पाया गया है कि योग का अभ्यास करने से श्वास को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। एक अध्ययन जिसमें 287 कॉलेज के छात्रों ने 15-सप्ताह की योग से जुड़ी कक्षा लीं, जहाँ उन्हें विभिन्न योग मुद्राएँ और साँस लेने के व्यायाम सिखाए गए। अध्ययन के अंत में, उनकी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि नोटिस की गई। इस प्रक्रिया के दौरान अधिकतम हवा की मात्रा को फेफड़ों के द्वारा बाहर निकाला जाता है। जिससे फेफड़ों से संबंधित बीमारियां हृदय से जुड़ी समस्याएं और अस्थमा से पीड़ित लोगों को विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है। 2009 में हुए एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि अस्थमा के रोगियों में योगिक श्वास के अभ्यास से उनके फेफड़ों की कार्य क्षमता में सुधार हुआ।

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योग नींद की गुणवत्ता को बढ़ावा दे सकता है

नींद की खराब गुणवत्ता मोटापे, उच्च रक्तचाप और अवसाद के साथ अन्य विकारों से जुड़ी होती है। अध्ययनों से पता चलता है कि योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से बेहतर नींद को बढ़ावा मिल सकता है । 2005 के एक अध्ययन में, 69 बुजुर्ग रोगियों को योग का अभ्यास करवाया गया। अध्ययन के अंत में योग करने वाले समूह के प्रतिभागियों ने अधिक आराम और गहरी नींद का अनुभव किया तथा सुबह उठने पर उन्होंने स्वयं को दूसरे समूह की तुलना में अधिक तरोताजा महसूस किया। एक अन्य अध्ययन ने लिम्फोमा के रोगियों में नींद पर योग के प्रभावों को देखा। उन्होंने पाया कि योग, नींद की अनियमितता को कम करता है साथ ही यह नींद की गुणवत्ता और अवधि में सुधार करता है। इतना ही नहीं योग नींद की दवाओं की आवश्यकता को भी काफी हद तक कम करता है। योग मेलाटोनिन के स्राव को बढ़ाता है, जो कि नींद से जुड़ा हार्मोन और जागने को नियंत्रित करता है।

योग का अभ्यास आपके पुराने दर्द को कम करने में सहायक हो सकता है

पुराना दर्द एक प्रकार की स्थायी समस्या होता है जो लाखों लोगों को प्रभावित करती है। इसके कई संभावित कारण हो सकतें हैं जैसे की चोट लगने से लेकर घटया होने तक। अनुसंधानों से ऐसे निष्कर्ष सामने आए हैं कि योग का अभ्यास करके कई प्रकार के पुराने दर्द को कम किया जा सकता है। 2005 में एक हुए एक अध्ययन से पता चला कि योग घुटनों के पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस वाले प्रतिभागियों में दर्द को कम करने और शारीरिक कार्य में सुधार करने में मदद कर सकता है।हालांकि इस विषय में अभी और अधिक शोध की आवश्यकता है।

योग आपके शरीर के लचीलेपन और संतुलन में सुधार करता है

शरीर के लचीलेपन और संतुलन को बेहतर बनाने के लिए बहुत से लोग योग को अपने फिटनेस रूटीन में शामिल करते हैं। ऐसे कई शोध आपको इंटरनेट पर मिल जाएंगे जो योग से जुड़े इस लाभ का समर्थन करते हुए दिखाई देते हैं ऐसा कई अध्ययनों में कहा गया है कि योग के द्वारा शरीर के लचीलापन और संतुलन को बेहतर बनाया जा सकता है। एक हालिया अध्ययन अनुसार 10 हफ्ते तक चले इस अध्ययन में कॉलेज जाने वाले 26 एथलीट पुरुषों को शामिल किया गया और उनके ऊपर योग के प्रभाव को देखा गया निष्कर्ष स्वरूप उनके शरीर की लचीलापन एवं संतुलन में काफी सुधार देखा गया उन लोगों की तुलना में जिन्होंने योग नहीं किया था। इसी प्रकार एक अन्य अध्ययन जिसमें 66 बुजुर्ग प्रतिभागियों को शामिल करके उनसे योग अथवा या कैलिस्थेनिक्स (एक प्रकार का शारीरिक व्यायाम) करवाया गया। 1 वर्ष बाद जब इस अध्ययन के नतीजे सामने आए तो उसमें जिस समूह ने योग का अभ्यास किया, उनके शरीर के लचीलापन में दूसरे समूह के तुलना में, जिन्होंने कैलीस्थेनिक्स का अभ्यास किया था, लगभग 4 गुना वृद्धि को नोटिस किया गया। प्रतिदिन मात्र 15 से 30 मिनट तक योग का अभ्यास करके आप अपने शरीर के लचीलापन एवं संतुलन को बढ़ा सकते हैं यह आपके शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

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