ये हैं जापानियों के अच्छे स्वास्थ्य और लम्बी उम्र के राज़. आप भी जानिये.

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पहले अपनी आँखों से खाइए

जापान में खाने के रंग का बहुत महत्त्व है. वे मानते हैं कि हर एक खाने का अपना एक व्यक्तित्व होना चाहिए. पारंपरिक जापानी खाने में ऐसी वस्तुओं का प्रयोग होता है जो लाल, हरी, सफ़ेद, काली या पीली रंग की हो ताकि खाना देखने में सुन्दर लगे. इसलिए जापानी खाने को देखिये, थोडा और देखिये, फिर धीरे धीरे स्वाद लेके खाइए. ये कला का अद्भुत नमूना है और आप इसका प्रयोग सिर्फ पेट भरने में नहीं कर सकते.

छोटे छोटे निवालों में खाइए

बड़े बड़े निवाले जापान में कोई नहीं खाता. वैसे भी वैज्ञानिक परीक्षण में पता लगा है कि जो लोग खाने को बड़े निवालों में खाते हैं, या खाने का अधिक भाग ले कर खाते हैं, वो ४५% तक अधिक खाना खा जाते हैं. इस तारा तो आप मोटे भी हो जायेंगे और अस्वस्थ भी. जापान के लोग अपने स्वास्थ्य के लिए दुनिया में जाने जाते हैं. जापान में लोगों के पास अलग अलग साइज़ की प्लेट होती हैं. कम खाना खाना है तो छोटी प्लेट का ही इस्तेमाल करते हैं. पेट का सिर्फ 4/5 भाग ही खाने से भरना चाहिए. खाना छोटे छोटे टुकड़ों में खाना चाहिए और भूख से थोडा कम ही पेट भरना चाहिए.

रात का खाना बहुत हल्का होना चाहिए

जापानी रात में ज्यादा खाने खाते ही नहीं. उनका मानना है कि हल्का डिनर करने से नींद अच्छीआती है, हॉर्मोन ठीक से काम करते हैं, चुस्ती बनी रहती है और बीमारियाँ कम होती हैं.

चावल खाना अच्छा है

जापान का हर खाना चावल-प्रिय है, लगभग हर खाना. जैसे हम गेंहू से बनी चीज़ों का सेवन करते हैं, या अन्य अनाज का उपयोग करते हैं, जापानी चावल के शौक़ीन हैं. चावल में कैलोरी बहुत अधिक नहीं होती, फैट की मात्रा भी न के बराबर होती है और विटामिन भी होते हैं. आजकल मैदे से बने आहार बहुत प्रचलित हो गए हैं,जैसे ब्रेड, बर्गर, पिज़्ज़ा इत्यादि. बेहतर है कि इन्हें खाने से अच्छा जल्दी पचने वाला और पौष्टिक चावल का आहार खाइए. चावल कई अलग अलग तरह से बनाया जा सकता है. मान के चलिए जो चीज़ जल्दी पकती है, वो जल्दी पचती है. इस तरह चावल पाचन तंत्र के लिए सर्वश्रेष्ठ है.

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पांच से अधिक प्रकार की सब्जियां रोज़ खाइए

जापानी लोग हर समय के खाने में 4-5 तरह की सब्जियां शामिल करते हैं. और तो और ये सब्जियां ही उनके खाने का बड़ा हिस्सा होती हैं. ये लोग सब्जियां कच्ची भी खाते हैं, और पानी में पका कर सूप की तरह भी. ये लोग सलाद पर मयोनेज़ से बनी सॉस नहीं डालते क्योंकि उसमे कैलोरी बहुत ज्यादा होती है. इसके बदले नीम्बू का रस या सिरका डाल सकते हैं.

खाना शुरू करने पर पहले सब्जियां खाइए, फिर कुछ और

सोचा है क्या कारण है कि जापानी अपने खाने में सब्जियां पहले खाना चाहते हैं? क्योंकि सब्जियों में खाने के अशुद्ध तत्व सोखने की शक्ति होती है. इससे शरीर के नुकसान होने की संभावना कम से कम हो जाती है. सब्जियों में रेशे (फाइबर) की मात्रा ज्यादा होती है. ये फाइबर आगे खाए जाने वाले कार्बोहायड्रेट को आराम से सोखने में मदद करते हैं जिसके कारण इन्सुलिन की मात्रा संतुलित रहती है और मोटापा बढ़ने की उम्मीद कम रहती है. सब्जियों में प्रोटीन को पचाने वाले तत्व भी होते हैं. और सब जानते हैं की सब्जियां विटामिन का खज़ाना होती हैं.

मांस की जगह मछली खाएं

जापानी अपने आहार में मांस की जगह मछली को प्राथमिकता देते हैं. उनकी पसंदीदा मछलियाँ हैं टूना, सैलमन, मेकेरेल, और हेरिंग. ये मछलियाँ विटामिन डी और ओमेगा 3 फैटी एसिड से परिपूर्ण होती हैं और स्वास्थ्य बढाती हैं. मछली पचाने में भी अधिक सरल होती हैं. मछली से पाए जाने वाले पौष्टिक तत्व दिल के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं और मन को प्रसन्न भी रखते हैं.

ये मान लीजिये की विश्व की 2% आबादी जापानियों की है पर ये दुनिया की १०% मछली खाते हैं. कभी हो सकती है इनको प्रोटीन की कमी?

सुबह उठते ही गुनगुना पानी पियें

सुबह सुबह पानी पीने से रात भर के एकत्रित विषैले तत्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं. एक तरह से आँतों की सफाई भी हो जाती है और हलकी फुलकी वर्जिश भी. इससे रक्त चाप भी ठीक रहता है और खून में शुगर की मात्रा का संतुलन भी बना रहता है.

खमीरयुक्त आहार लें

जापानी अपने खाने में खमीर का बहुत इस्तेमाल करते हैं. ये सच तो सबको पता ही है कि खमीर वाले खाने में विटामिन की मात्रा बहुत अधिक होती है तथा ये पचाने में भी हल्का होता है. खमीर वाले खाने में अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो शरीर में जाके आंतो की तथा पूरे शरीर की हेल्थ अच्छी बनाते हैं.

खमीर युक्त भोजन को फरमेंटड फ़ूड भी कहते हैं, जैसे दही, टोफू, मिसों (खमीर युक्त सोयाबीन का पेस्ट). इस तरह का भोजन इम्यून सिस्टम को मजबूत बनता है, रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करता है और पाचन शक्ति बढ़ता है. और तो और ऐसा भोजन हमें कैंसर से भी बचाता है. भारत में इडली, डोसा बनाने में खमीर युक्त चावल का प्रयोग होता है.

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सोया की बनी चीज़ें ‘बेस्टसेलर’ हैं

सोया की बनी चीज़ों में प्रोटीन अच्छी मात्रा में होता है. शाकाहारी लोगों के लिए मांस की अपेक्षा सोया बेहतर है क्योंकि प्रोटीन से भरपूर है और फैट की मात्रा बहुत कम है. कई तरह की रिसर्च में पाया जाता है कि सोया का दूध पचने में हल्का है और विटामिन से भरपूर है. इसमें विटामिन बी-1, बी-2, बी-6 अधिक मात्रा में होते हैं. साथ ही इसमें कई प्रकार के एमिनो एसिड (प्रोटीन की इकाई) और विटामिन ई भी होता है. सोया की चीज़ें बनाने में भी ज्यादा वक़्त नहीं लगता और स्वाद से भरपूर होती हैं.

मौसम के फल प्लेट में होने ही चाहिए

जापानी प्राकृतिक आहार में यकीन रखते हैं. उनका मानना है कि जैसा खाए अन्न वैसा होए मन. वैसे तो हम हिन्दुस्तानी भी ये कहते हैं, पर अमल में शायद वो ज्यादा लाते हैं. जापान में खाने के बाद मीठे के रूप में एक रंगीन प्लेट में किसी मीठे फल की फांक काट के रखने का चलन है. फल का रंग देख के मन खुश हो जायेगा, और विटामिन तो मिलेंगे ही. साथ ही शुगर खाने से बचेंगे. मान लीजिये कि ज़हर है चीनी.

चाय हो जाए, चाहे बारिश न भी हो

ग्रीन टी के जितने दीवाने जापान में हैं उतने शायद ही कहीं हो. यहाँ तक कि भारत में भी ग्रीन टी जापान की देखा देखी ही शुरू हुई है. वैसे ग्रीन टी की तारीफ़ बेमानी नहीं है. भरपूर मात्र में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो उम्र बढ़ाते हैं और शरीर को टूट फूट ठीक करते हैं. साथ ही दूध और चीनी न होने से कैलोरी भी बहुत कम होती है. खाने को पचाने में भी मदद करते है ग्रीन टी. पाचन तंत्र में कई तरह के विषैले पदार्थों को ग्रीन टी बाहर निकालती है. स्फूर्ति बढाती है सो अलग. इसके अंदर कई ऐसे तत्व होते हैं जो अधिक मोटापा घटाने में मदद करते हैं. बालों को स्वास्थ्य भी बढ़ता है. और त्वचा में चमक भी आती है. कुल मिलाकर शरीर का अंदरूनी स्वास्थ्य बढ़ता है.

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