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जानिये ‘राजमा’ से होने वाले 15 अनूठे फायदे

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राजमा भारतीयों में तथा पूरे विश्व में एक प्रसिद्ध आहार है। राजमा के साथ बहुत सारे स्वास्थ्य लाभ जुड़े हुए हैं। यह रंग और बनावट में गुर्दे के समान होता है इसलिए इसे किडनी बीन्स कहा जाता है, यह मूल रूप में मध्य अमेरिका और मैक्सिको में उगाई जाने वाली फली है। राजमा सफेद, क्रीम, काले, लाल, बैंगनी, चित्तीदार, धारीदार और पतले सहित कई प्रकार के रंग और पैटर्न में आते हैं। इससे अनगिनत स्वास्थ्य लाभ हैं. यह प्रोटीन का बहुत अच्छा स्त्रोत है. ये वजन घटाने में सहायता करता है, हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक है, यह रक्त में शर्करा के स्तर को नियमित बनाए रखने में सहायक होता है। यह एक स्वस्थ भोजन माना जाता है। हालांकि, कच्चे खाने से पहले उन्हें ठीक से पकाया जाना चाहिए क्योंकि इसमें फाइटोएम्ग्लगुटिनिन की मात्रा अधीक होती है जो हमारे शरीर के लिए विषाक्त हो सकता है।

राजमा के अत्यन्त स्वास्थ्यवर्धक फायदे हैं. किडनी बीन्स कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाले फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत हैं। कोलेस्ट्रॉल कम करने के अलावा, राजमा (किडनी बीन्स) की उच्च फाइबर कि मात्रा भोजन के बाद रक्त शर्करा के स्तर को बहुत तेजी से बढ़ने से रोकती है, जिससे ये फलियां मधुमेह, इंसुलिन प्रतिरोध (इन्सुलिन रेजिस्टेंस) या हाइपोग्लाइसीमिया वाले व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से अच्छा विकल्प बनती हैं। जब राजमा को किसी साबुत अनाज, जैसे चावल, के साथ खाया जाता है, तो राजमा लगभग वसा रहित उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन प्रदान करते हैं। किडनी बीन्स शरीर के बहुत ज़रूरी मिनरल, मोलिब्डेनम, और एंजाइम सल्फाइट ऑक्सीडेज का एक अभिन्न स्त्रोत है. यह एंजाइम सल्फाइट को डिटॉक्स करने के लिए जिम्मेदार है। सल्फाइट एक प्रकार के प्रिजर्वेटिव (खाद्य संरक्षण केमिकल) होते हैं जो आमतौर पर होटल में तैयार खाद्य पदार्थों में और टिन में पैक खाद्य पदार्थों में डाले जाते हैं।

राजमा घुलनशील और अघुलनशील फाइबर से भरपूर होता हैं। घुलनशील फाइबर पाचन तंत्र में एक लेई जैसा पदार्थ बनाता है जो पित्त के साथ जुड़ जाता है और कोलेस्ट्रॉल को शरीर से बाहर निकालता है। शोध अध्ययनों से पता चला है कि अघुलनशील फाइबर न केवल मल की मात्रा को बढ़ाने और कब्ज को रोकने में मदद करता है, बल्कि पाचन संबंधी विकारों जैसे आंत्र सिंड्रोम (इरऔर डायवर्टीकुलोसिस को रोकने में भी मदद करता है।

राजमा ह्रदय के स्वास्थ्य को बढाता है

मेडिसिन के एक अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन पुष्टि करता है कि उच्च फाइबर खाद्य पदार्थ, जैसे कि राजमा (किडनी बीन्स खाने) से हृदय रोग को रोकने में मदद मिलती है। लगभग 10,000 अमेरिकी वयस्कों ने इस अध्ययन में भाग लिया और 19 वर्षों तक इसका पालन किया गया। सबसे अधिक फाइबर खाने वाले लोग (21 ग्राम प्रति दिन) 12% कम हृदय रोग (सीएचडी) का शिकार हुए। सीएचडी (ह्रदय की धमनियों की बीमारी) के जोखिम में 15% कमी करने के साथ सबसे अधिक पानी में घुलनशील फाइबर आहार में खाने वालों ने बेहतर प्रदर्शन किया।

हृदय स्वास्थ्य में राजमा (किडनी बीन्स) का योगदान न केवल उनके फाइबर में है, बल्कि इन बीन्स के अन्दर संचित फोलेट और मैग्नीशियम की महत्वपूर्ण मात्रा में है। फोलेट होमोसिस्टीन के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है. यह एक एमिनो एसिड है जो एक महत्वपूर्ण चयापचय प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती उत्पाद है. इस चयापचय क्रिया को मिथाइलेशन चक्र कहा जाता है। होमोसिस्टीन के ऊंचे रक्त स्तर दिल के दौरे, स्ट्रोक (लकवा मार जाना) या खून कि नालियों के रोग के लिए एक स्वतंत्र जोखिम कारक हैं. हृदय रोग के 20-40% रोगियों में होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ा हुआ पाया जाता है। यह अनुमान लगाया गया है कि यदि फोलेट उतनी मात्रा में खाया जाये जितनी शरीर के लिए रोज़ ज़रूरी है, तो हर साल दिल का दौरा पड़ने की संख्या 10% तक कम हो जाएगी। किडनी बीन्स (राजमा) फोलेट का एक बहुत अच्छा स्रोत है।

मैग्नीशियम की उपस्थिति किडनी बीन्स हृदय प्रभावों पर लाभकारी असर डालती है। मैग्नीशियम प्रकृति का अपना कैल्शियम चैनल अवरोधक है। जब शरीर के अन्दर पर्याप्त मैग्नीशियम होता है, तो नसें और धमनियां राहत की सांस लेती हैं और आराम करती हैं, जिससे प्रतिरोध कम होता है और पूरे शरीर में रक्त, ऑक्सीजन और पोषक तत्वों के प्रवाह में सुधार होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि मैग्नीशियम की कमी न केवल दिल के दौरे से जुड़ी है बल्किदिल के दौरे के तुरंत बाद, पर्याप्त मैग्नीशियम की कमी दिल को अधिक चोटिल करती है।

राजमा (किडनी बीन्स) ब्लड शुगर (शर्करा) को नियंत्रित करता है

पाचन तंत्र और हृदय पर इसके लाभकारी प्रभावों के अलावा, घुलनशील फाइबर रक्त शर्करा के स्तर को स्थिर करने में मदद करता है। यदि किसी इंसान को इंसुलिन प्रतिरोध, हाइपोग्लाइसीमिया या मधुमेह है, तो किडनी बीन्स वास्तव में आपको स्थिर, धीमी गति से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा प्रदान करते हुए रक्त शर्करा के स्तर को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने टाइप 2 डायबिटीज (मधुमेह) वाले लोगों के दो समूहों की तुलना की, जिन्हें उच्च मात्रा में उच्च फाइबर खाद्य पदार्थ खिलाए गए थे। एक समूह ने मानक अमेरिकन डायबिटिक आहार खाया, जिसमें 24 ग्राम फाइबर / दिन था, जबकि दूसरे समूह ने 50 ग्राम फाइबर / दिन वाला आहार खाया। जो लोग फाइबर में अधिक आहार लेते हैं, उनमें प्लाज्मा ग्लूकोज (रक्त शर्करा) और इंसुलिन (हार्मोन जो रक्त शर्करा को कोशिकाओं में लाने में मदद करते हैं) दोनों का स्तर कम था। उच्च फाइबर समूह ने उनके कुल कोलेस्ट्रॉल को लगभग 7%, उनके ट्राइग्लिसराइड के स्तर को 10.2% और उनके विएलडीएल (वेरी लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन – कोलेस्ट्रॉल का सबसे खतरनाक रूप) के स्तर को 12.5% ​​तक कम कर दिया। ये नतीजे अप्रत्याशित हैं और राजमा को एक उत्तम आहार के रूप में स्थापित करते हैं.

राजमा शरीर में आयरन (लोहा) की कमी को पूरा करती है

धीमी गति से पचने वाले जटिल कार्बोहाइड्रेट प्रदान करने के अलावा, राजमा आपके शरीर के आयरन के भंडार को फिर से भरने में मदद करके आपकी ऊर्जा बढ़ा सकती हैं। विशेष रूप से मासिक धर्म वाली महिलाओं के लिए, जिन्हें आयरन की कमी हो जाती है, राजमा बहुत ही अधिक लाभदायक है. राजमा में कैलोरी कम होती है और वस्तुतः वसा रहित होती है, इसलिए वजन बढ़ने का खतरा भी नहीं है। आयरन हीमोग्लोबिन का एक अभिन्न अंग है, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँचाता है, और ऊर्जा उत्पादन और चयापचय के लिए महत्वपूर्ण एंजाइम प्रणालियों का भी हिस्सा है। गर्भवती महिलाएं या स्तनपान करा रही महिलाएं, जिन्हें आयरन की अधिक जरूरत होती है, राजमा के पर्याप्त सेवन से अपने स्वास्थ्य को बचा के रख सकती हैं।

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यादाश्त मजबूत करने में राजमा सहायक है

थियामिन (विटामिन बी1) ऊर्जा उत्पादन के लिए शरीर की कोशिकाओं में एंजाइमैटिक प्रतिक्रियाओं में भाग लेता है. थियामिन का यह कार्य मस्तिष्क की कोशिका के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एसिटाइलकोलाइन के संश्लेषण के लिए थियामिन की आवश्यकता होती है. एसिटाइलकोलाइन स्मृति के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर है जिसकी कमी बुढ़ापा में अल्जाइमर रोग से संबंधित है।

राजमा कैंसर के खतरे को कम करता है

कुछ अध्ययनों से पता चला है कि राजमा बीन्स एंटीऑक्सिडेंट (शरीर में टूट फूट कम करने का कार्य) और एंटी-इंफ्लेमेटरी (कोशिकाओं की सूजन कम करने का कार्य) के रूप में कार्य करते हैं। इन प्रभावों से कैंसर का खतरा कम हो सकता है। 2015 में प्रकाशित शोध ने विश्लेषण किया कि क्या बीन्स में एंटीऑक्सिडेंट गुण हो सकते हैं जो आंतों के कैंसर से लड़ते हैं। काली बीन्स में सबसे अधिक मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट दिखाया गया था। 2016 के एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि पूर्वोत्तर चीन की काली बीन्स में पाए जाने वाले केमिकल तत्व कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और बड़ी अंत तथा मलाशय के कैंसर के विकास को धीमा कर सकते हैं।

राजमा का सेवन लिवर (यकृत) के फैट (वसा) को कम करता है

वसायुक्त यकृत एक विकार है जो तब होता है जब वसा यकृत में जमा होता है। इसकी वजह से शरीर के अन्दर चयापचय की क्रियाएं धीमी और अधूरी हो जाती हैं. 2016 में प्रकाशित शोध में पाया गया कि फलियों का सेवन चूहों के जिगर में वसा के संचय में सुधार करता है। इस परिणाम से पता चलता है कि ये फलियां लीवर के स्वास्थ्य को बनाए रख सकती हैं और फैटी लिवर (यकृत में वसा का जमाव) के जोखिम को कम कर सकती हैं, हालांकि मनुष्यों में अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।

राजमा भूख पर नियंत्रण करने में मदद करता है

राजमा (किडनी बीन्स) में उपस्थित फाइबर और स्वस्थ स्टार्च, भोजन को धीरे धीरे पचने में सहयोग कर सकते हैं। पेट के भरे होने का अहसास देर तक रहता है. बीन्स का सेवन करने के बाद लोगों को पेट भरा महसूस हो सकता है, जो अधिक वजन को रोकने और यहां तक कि वजन घटाने में मदद कर सकता है।

राजमा का सेवन आंत के स्वास्थ्य में सुधार लाता है

विभिन्न प्रकार के बीन्स पर शोध से पता चला है कि आंतों की चालढाल में सुधार करने और स्वस्थ जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि करने में इनका योगदान है. राजमा का सेवन आंत के स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद करने वाला पाया गया है। यह आंत से जुड़ी बीमारियों को रोकने में मदद कर सकता है। गट-ब्रेन एक्सिस के सिद्धांत के अनुसार पेट और आंत के स्वास्थ्य से दिमाग भी जुड़ा होता है. आंत का अच्छा स्वास्थ्य शरीर पर दूरगामी परिणाम पैदा करता है और बहुत से असाध्य रोगों के होने कि संभावना क्षीण हो जाती है. राजमा एक मददगार फली है जो पेट और आँतों के स्वास्थ्य की देखरेख करती है.

राजमा शरीर में नयी कोशिकायों का निर्माण करने में सहायक होते हैं

किडनी बीन्स न केवल प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का एक समृद्ध स्रोत है, बल्कि ये एंटीऑक्सीडेंट (शरीर में टूट फूट रोकने वाले तत्व) का भी एक समृद्ध स्रोत हैं। वे कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को सीमित करने और दीर्घायु को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं क्योंकि उनमें एंटी-एजिंग (बुढापे की प्रक्रिया को रोकने वाला गुण) गुण होते हैं। अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थ खाने से हमारे शरीर और त्वचा को होने वाली समस्याओं को आहार में राजमा (किडनी बीन्स) को शामिल करके कम किया जा सकता है।

राजमा मुँहासे ठीक करने में उपयोगी है

किडनी बीन्स जिंक का एक अच्छा स्रोत हैं, इसलिए आहार में राजमा (किडनी बीन्स) का नियमित सेवन स्वस्थ त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। वसामय ग्रंथियों की बढ़ी हुई गतिविधि पसीने के उत्पादन के लिए जिम्मेदार है तथा मुँहासे पैदा कर सकती है. इसको जिंक (जस्ता) की प्रचुर मात्रा द्वारा द्वारा ठीक किया जा सकता है, जो राजमा में मौजूद है। इस प्रकार त्वचा की इन महत्वपूर्ण ग्रंथियों के समुचित कार्य में मदद मिलती है। राजमा में मौजूद फोलिक एसिड भी फायदेमंद होता है और त्वचा की कोशिकाओं के नियमित निर्माण में मदद करता है। उत्पादित नई त्वचा कोशिकाएं मुँहासे के टूटने को कम करने और त्वचा पर छिद्रों को साफ करने के लिए बहुत उपयोगी हैं।

rajma kidney beans benefits

राजमा घाव जल्दी ठीक करने में फायदेमंद है

रोजाना खायी जाने वाली किडनी बीन्स (राजमा) में अच्छी मात्रा में जिंक होता है जो शरीर में घाव भरने के लिए अत्यावश्यक होता है. इसके सेवन से शरीर में इम्युनिटी भी मजबूत रहती है. शरीर में होने वाली टूट फूट को वापस ठीक करने के लिए जिंक की आवश्यकता होती है जो राजमा के सेवन से मिल सकती है.

राजमा का सेवन आंखों की सेहत के लिए अच्छा है

बहुत जरूरी है कि आप आहार में राजमा का सेवन करें, क्योंकि यह जिंक का अच्छा स्रोत है। इसके सेवन से आँखों की थकान कम होती है और बार बार आँखों में लाली नहीं होती. यहाँ तक कि मोतियाबिंद होने की संभावना भी कुछ कम होती है.

राजमा दमे (अस्थमा) की रोकथाम के लिए सहायक है

राजमा में मौजूद मैग्नीशियम में ब्रोन्कोडायलेटर (सांस की नालियों को चौड़ा करने का गुण) प्रभाव होता है और यह फेफड़े के भीतर और बाहर सुचारू वायु के आवागमन को सुनिश्चित करता है। अध्ययनों से पता चला है कि कम मैग्नीशियम का स्तर अस्थमा का कारण बन सकता है।

राजमा बालों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है

राजमा में बहुत अच्छी मात्रा में फोलिक एसिड पाया जाता है. फोलिक एसिड बालों के पोषण, ग्रोथ और विकास के लिए बेहद ज़रूरी तत्व है. साथ ही बालों के बढ़ने के लिए प्रोटीन ज़रूरी है जो राजमा में भरपूर मात्रा में होता है. इसके साथ ही इसमें प्रयुक्त आयरन, मैंगनीज और जिंक बालों के टूटने को भी कम करते हैं. इसलिए अगर आप अपने बालों को चमकदार, मजबूत और लम्बा, घना चाहते हैं तो खाने में राजमे का सेवन ज़रूर करें.

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