जानिये त्रिफला चूर्ण से होने वाले ये 21 अद्भुत फायदे

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triphala churna

भारत आयुर्वेद की भूमि है। यहाँ लोग वास्तव में विभिन्न चिकित्सा स्थितियों के उपचार में हर्बल औषधियों की शक्ति में विश्वास रखते हैं। पुराने समय से ही, त्रिफला, जिसे त्रिफला चूर्ण के रूप में भी जाना जाता है, ने विभिन्न बीमारियों के इलाज में अपनी गुणवत्ता साबित की है।आधुनिक एलोपैथिक दवाओं के सेवन से हुए दुष्प्रभावों से लोग जागरूक हो गए हैं। इससे हर्बल औषधियों की लोकप्रियता बढ़ गई है और लोग इन्हे बेहतर महसूस करने के लिए चुन रहे हैं। आइए हम बताते हैं कि आप इस हर्बल उपचार से कैसे लाभ उठा सकते हैं। त्रिफला का अर्थ है तीन फल। इसलिए, त्रिफला चूर्ण एक एक ही हर्बल घटक से नहीं बनता है, बल्कि तीन फलों का मेल होता है। तीन फलों में हर्र (हरिताकी), बहेड़ा (बिभीतकी), और आंवला शामिल हैं। इन फलों को त्रिफला चूर्ण बनाने के लिए पूरी तरह से सुखाया जाता है, पीसा जाता है और फिर सही मात्रा में मिलाया जाता है। त्रिफला पाउडर (एक चम्मच) को एक कप गुनगुने पानी में रात भर भिगोना चाहिए और प्रातः 5-6 के बीच में इसको पीना चाहिए. इसके सेवन से ‘अपान’ नाम के प्राण को नियंत्रित और स्वस्थ करने में मदद मलती है. त्रिफला से शरीर में अनगिनत लाभ होते हैं: चाहे वजन कम करना हो, इम्युनिटी (रोग-प्रतिरोधक क्षमता) बढानी हो, त्वचा में कान्ति लानी हो या बाल स्वस्थ करने हो, त्रिफला बेजोड़ है.

त्रिफला शरीर का अधिक वजन घटाने में सहायक है

अतिरिक्त वजन स्वास्थ्य के सबसे खतरनाक दुश्मनों में से एक है। मोटापा कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह भी है। यदि आप अपने वजन को कम रखने के आसान तरीकों की तलाश कर रहे हैं, तो त्रिफला आपको ऐसा करने में मदद कर सकता है। त्रिफला चूर्ण लेने से शरीर में कोलेसाईटोकाईनिन नामक तत्व का स्राव होता है। यह एक हार्मोन है जो आपके मस्तिष्क को जल्दी से संकेत देता है कि आपका पेट भर गया है। यह आपके पेट को भरा हुआ महसूस कराता है और आपको तृप्त महसूस करने में भी मदद करता है। आप मोटापे से खुद को बचाने के लिए इस चूर्ण का एक चम्मच दिन में तीन बार गर्म पानी के साथ ले सकते हैं। यह पेट की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में भी प्रभावी है। इससे आप मोटापे को दूर कर सकते हैं, और मोटापे से होने वाले ज़ोखिमों से (कैंसर, ह्रदय सम्बंधित समस्याएं, डायबिटीज, जोड़ों के रोग इत्यादि) बचाव कर सकते हैं.

त्रिफला शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर निकलता है

अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों को खाते रहने से हमारे शरीर में विषैले पदार्थ जमा होते रहते हैं, जो कि हमें बीमार बनाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसलिए, हमारे शरीर को इन हानिकारक विषाक्त पदार्थों से छुटकारा पाना महत्वपूर्ण है। इस स्वास्थ्य लाभ के लिए त्रिफला का उपयोग किया जा सकता है। त्रिफला न केवल आपके शरीर से सभी घातक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है बल्कि यह आपकी त्वचा को भी चमक प्रदान करता है। आप एक गिलास पानी में इस त्रिफला चूर्ण का एक चम्मच मिलाकर काढ़ा बना सकते हैं। अदरक को कुचल कर इस में डालें और काढ़ा आधा होने तक उबालें। काढ़े को छानकर नींबू का रस इस में मिलाएं। अधिकतम लाभ के लिए हल्का गर्म ही पिएं। आदर्श रूप से, इस काढ़े को खाली पेट ही पीना चाहिए; आपके शरीर के विषाक्त पदार्थों से छुटकारा पाने के लिए कम से कम एक माह तक आप इसे ले सकते हैं।

त्रिफला पाचन संबंधी समस्याओं को ठीक करता है

यदि आप किसी भी तरह की पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो बेहतर महसूस करने के लिए आप त्रिफला का सेवन कर सकते हैं । यह चूर्ण न केवल कब्ज़ दूर करके मल त्याग को आसान बनाने में मदद करता है बल्कि इसके रेचक गुणों के कारण मल त्याग को नियंत्रित भी करता है। यदि आप अपने पेट को फूला हुआ महसूस कर रहे हैं, आपका पेट भारी लग रहा है, या आपको पतले दस्त हो रहा हैं, तो आप सुबह के वक्त इस पाउडर का सेवन बहुत सारे पानी के साथ कर सकते हैं। यह चूर्ण मलाशय की मांसपेशियों को मजबूत कर, पेट की गैस से निजात दिला कर, और पेट को साफ रख के आपके पाचन स्वास्थ्य का भी ख्याल रखता है। त्रिफला के उपयोग से आँतों के अन्दर अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढती है और हानिकारक बैक्टीरिया घटते हैं. वैज्ञानिक शोधों से पता लगता है कि जिन लोगों के शरीर की आंत में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या प्रचुर मात्रा में होती है, उनमें रोगों के होने के आसार कम होते हैं.

त्रिफला इनफेक्शन से लड़ने में मदद करता है और इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाता है

इस चूर्ण की दवा का सेवन आपकी प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने का एक अच्छा तरीका है। यह चूर्ण हर प्रकार के संक्रमण के खिलाफ शरीर की रक्षा करता है, जो कि स्टैफिलोकोकस बैक्टीरिया (Staphylococcus bacteria) या ई-कोलाई (E.Coli) आदि के कारण हो सकता है। त्रिफला रक्त संचार को सामान्य करता है और आवश्यक पोषक तत्वों से एक बेहतर प्रतिरक्षा प्रणाली के निर्माण में शरीर की मदद करता है। बुज़ुर्ग और बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इन लोगों में त्रिफला का उपयोग बेहद फायदेमंद हो सकता है. कैंसर जैसी बीमारी के इलाज में कीमोथेरेपी देनी होती है और इससे इम्युनिटी कम हो जाती है. ऐसे में त्रिफला का सेवन शरीर के लिए अच्छा हो सकता है.

त्रिफला मुंह की स्वच्छता बनाए रखने में फायदेमंद है

हम में से बहुत से लोग दांतों की समस्याओं जैसे दांतों कि सडन , दंत पट्टिका (plaque), मसूड़े की सूजन, मसूड़ों के रोग, मुंह के छालों और इस तरह के कई अन्य दंत विकारों से पीड़ित हो सकते हैं। त्रिफला का चूर्ण रोगाणुरोधी (antimicrobial) गुणों से भरा हुआ है। एक अध्ययन में , यह साबित हुआ है कि त्रिफला अर्क के साथ कुल्ला करने से मसूड़े की सूजन, दांतों कि सडन, और दंत पट्टिका जैसे दंत विकारों से निपटने में प्रभावी परिणाम दिखते हैं। इसके अलावा, एक अध्ययन में , यह पाया गया कि त्रिफला चूर्ण बाज़ार में मिलने वाले अन्य टूथपेस्ट की तुलना में मसूढ़ों के विकारों से निपटने में बेहतर था।

त्रिफला नेत्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है

त्रिफला आंखों के लिए एक वरदान है और आंखों की सेहत को बनाए रखने के लिए इसे एक टॉनिक भी कहा जा सकता है। यह न केवल आपकी आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करता है बल्कि यह तेज दृष्टि को बनाए रखने में भी सहायक होता है। त्रिफला आंखों की विभिन्न परेशानियों जैसे गलौकोमा (आँखों के अन्दर अधिक दबाव होना), कंजक्टिवाइटिस (Conjunctivitis), मोतियाबिंद (आँखों के अन्दर के लेंस का धुंधला हो जाना) आदि को दूर रखने में भी सहायक है। आप चूर्ण का सेवन इसको पानी के साथ खा कर या इसका पेय पी कर कर सकते हैं. आप इसे आंखों के संक्रमण को शांत करने के लिए आँखें धोने में भी उपयोग कर सकते हैं। जो लोग अपने कंप्यूटर स्क्रीन, फोन या अन्य ऐसे इलेक्ट्रॉनिक्स के सामने अधिक समय बिताते हैं, वे ‘कंप्यूटर विजनसिंड्रोम’ (‘computer vision syndrome’) नामक एक स्थिति से पीड़ित हो सकते हैं। इस स्थिति में आँखों में दर्द, जलन व लाली बनी रहती है तथा नज़र में भी असर पड़ता है. एक अध्ययन में , यह साबित हुआ है कि त्रिफला आई ड्रॉपस (Eye Drops) ने कंप्यूटर विजनसिंड्रोम के लक्षणों को कम करने में मदद की। आप इस चूर्ण को 1 से 2 चम्मच गर्म पानी में भिगोकर रात भर रखें और सुबह आप इस पानी को छान कर अपनी आँखें इससे धो सकते हैं। ध्यान रखें कि त्रिफला पाउडर अच्छी कंपनी का हो.

पेट के अल्सर के इलाज में त्रिफला सहायक है

त्रिफला पेट के अल्सर (गैस्ट्रिक अल्सर या पेप्टिक अल्सर) के इलाज में भी त्रिफला चूर्ण फायदेमंद है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब यह चूर्ण नियमित रूप से लिया जाता है, तो यह पेट के अंदर की झिल्ली की आंतरिक और बाहरी सूजन को कम करता है। यह शरीर में एंजाइमों को बहाल करने में भी मदद करता है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को दूर रखते है और पेट की झिल्ली को मजबूत करने में मदद करते है। यह माना जाता है कि पेट के अल्सर के लिए हेलिकोबेक्टर पाइलोरी नाम का बैक्टीरिया ज़िम्मेदार है. त्रिफला इस बैक्टीरिया पर अपना नियंत्रण करने में समर्थ है.

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त्रिफला मूत्र पथ के संक्रमण के इलाज में मदद करता है

मूत्र पथ के संक्रमण (यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। यह दर्दनाक स्थिति कभी-कभी इलाज के लिए कठिन हो सकती है, खासकर जब संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं से अधिक शक्तिशाली बन जाते हैं. कई बार इन बैक्टीरिया पर उपचार के पारंपरिक तरीकों का कोई असर नहीं होता है। ऐसी स्थितियों के दौरान, आप मूत्र पथ के संक्रमण को ठीक करने के लिए त्रिफला चूर्ण का उपयोग करने पर विचार कर सकते हैं। यह हर्बल औषधि न केवल सुरक्षित है बल्कि इसका कोई साइड-इफ़ेक्ट भी नहीं होता है. यह विभिन्न ऐसे बैक्टीरिया पर भी आशाजनक परिणाम दिखाता है जिन पर एंटीबायोटिक काम करना बंद कर चुकी होती हैं.

त्रिफला जोड़ों और हड्डी के दर्द को कम करने में बेहद फायदेमंद है

अगर आप हड्डी या जोड़ों के दर्द से पीड़ित हैं तो आपकी समस्या का हल त्रिफला हो सकता है। यह चूर्ण आपके शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व प्रदान करके हड्डियों के अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने में कारगर है। यह शरीर से यूरिक एसिड की अत्यधिक मात्रा को बाहर निकालता है जो कि हड्डी और जोड़ों के सूजन के लिए जिम्मेदार हो सकती है। जब भी आपको कोई जोड़ या हड्डी में दर्द का अनुभव होता है जैसे गाउट, गठिया, जोड़ों का दर्द आदि, तो आप थोड़े से गर्म पानी में एक चम्मच इस पाउडर को मिला सकते हैं और इस काढ़े को पी कर अपने दर्द को कम कर सकते हैं।

त्रिफला घाव भरने में सहायक

त्रिफला चूर्ण में जीवाणु विरोधी और सूजन विरोधी गुण हैं. इस तरह यह हर्बल उपचार विभिन्न घावों को भरने में चमत्कार का काम करता है और रिकवरी प्रक्रिया में सहायता करता है।

रक्तचाप को नियंत्रित करने में प्रभावी है त्रिफला

अनियमित रक्तचाप से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल में ना हो तो हार्ट (ह्रदय) सम्बंधित समस्याएं हो सकती हैं. नियमित रूप से त्रिफला चूर्ण का सेवन आपके रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करने और इस प्रकार विभिन्न स्वास्थ्य परेशानियों को दूर करने में फायदेमंद है।

बालों को मजबूत करने और उनके बढ़ने में मददगार

बालों के लिए त्रिफला चूर्ण के कई लाभ हैं , और उनमें से एक लाभ है – बालों के पोषण को प्रोत्साहित करना। इसलिए, यदि आप अपने बालों के पोषण के मुद्दों से जूझ रहे हैं, तो त्रिफला आपका अचूक समाधान हो सकता है । आप या तो त्रिफला का सेवन मौखिक रूप से कर सकते हैं या इस चूर्ण को थोड़ा पानी मिलाकर पेस्ट बना सकते हैं और फिर इसे अपने बालों पर लगा सकते हैं। त्रिफला बालों को मजबूती देने वाले वाले गुणों से भरा हुआ है. इसके सेवन से गंजापन भी काबू में आता है और रूसी (डैंड्रफ) भी ख़त्म होती है। यह खोपड़ी (स्कैल्प) के अत्यधिक तैलीयपन को भी काबू में करती है जिससे बैक्टीरिया और फंगस के इन्फेक्शन बालों की जड़ों में नहीं होते.

त्रिफला शरीर में हार्मोन को संतुलित रखता है

शरीर में स्वस्थ हार्मोनल संतुलन होना बहुत जरूरी है क्योंकि किसी भी तरह के हार्मोनल असंतुलन से स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं। इसलिए, यदि आप अधिक दर्द वाले या अनियमित माहवारी (पीरियड्स) का सामना कर रही हैं, तो त्रिफला चूर्ण आपकी समस्या का उपाय करने में फायदेमंद हो सकता है। आप अपने हार्मोनल संतुलन को दुबारा पाने करने के लिए रात के भोजन से पहले या रात के खाने के दो घंटे बाद एक गिलास हल्के गर्म पानी के साथ एक चम्मच चूर्ण का सेवन कर सकते हैं ।

त्रिफला आँखों के नीचे काले घेरों को कम करने में फायदेमंद है

क्या आप अपनी आंखों के नीचे के काले घेरे की समस्या से लड़ रहे हैं? यदि ऐसा है तो आप परेशान मत होइए. ज़रूरी नहीं कि महंगे सीरम या इंग्लिश दवाओं का इस्तेमाल करना ज़रूरी हो गया है। त्रिफला के इस्तेमाल से सूजी हुई आंखें, काले घेरे वाली आँखें, थकी हुई आंखें और ऐसी अन्य आँखों की समस्याएं ठीक हो सकती हैं । आप त्रिफला के साथ बनाया गया आईवाश ले सकते हैं । यह न केवल काले घेरे और सूजी हुई आँखों को कम करता है बल्कि यह नेत्र स्वास्थ्य को पाने और बरकरार रखने में भी मदद करता है।

साँस से सम्बंधित परेशानियों को ठीक करने में त्रिफला फायदेमंद है

खराब सांस या दुर्गंध भरी सांस होना एक बहुत बड़ा शर्मिंदगी का कारण हो सकता है। इस चमत्कारी चूर्ण से बुरी सांस को अलविदा कहें । आप बदबूदार सांस दूर करने के लिए त्रिफला चूर्ण में शहद मिलाकर चाट सकते हैं। दूसरी ओर, आप पानी के साथ भी कुल्ला कर सकते हैं जिसमें खराब सांस को रोकने के लिए एक चम्मच पाउडर मिलाया जाता है। ऐसा करने से मुंह के अन्दर की सेहत भी अच्छी रहती है और दांत तथा मसूड़े भी स्वस्थ रहते हैं.

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त्रिफला बच्चों के लिए मौसमी बीमारियों में फायदेमंद

त्रिफला चूर्ण न केवल वयस्कों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह बच्चों को भी कई लाभ प्रदान करता है। छोटे बच्चों में बहुत मजबूत प्रतिरक्षा शक्ति नहीं होती है. इस प्रकार त्रिफला चूर्ण न केवल बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने के लिए अच्छा है, बल्कि यह विभिन्न प्रकार के आम संक्रमणों से लड़ने में भी प्रभावी है, जो आमतौर पर बच्चों को हो जाते हैं जैसे कि खांसी , सर्दी , बुखार आदि। आप त्रिफला को दूध, पानी या कुछ शहद के साथ मिला कर दे सकते हैं । यदि आपका शिशु 12 महीने से कम का है, तो आपको इस चूर्ण को एक चुटकी से अधिक नहीं देना चाहिए । बड़े बच्चों के लिए, एक चम्मच तक त्रिफला चूर्ण दिया जा सकता है। जिन बच्चों को बार बार पतले दस्त होते हैं, उनके लिए त्रिफला बहुत उपयोगी है.

त्रिफला यात्रा-वमन (मोशन-सिकनेस) में मददगार है

हममें से बहुत से लोग मिचली और उलटी होने के बारे में सोच कर यात्रा पर जाने से डर जाते होंगे। हालाँकि, इस चूर्ण को लेने से आप अपने चक्कर या मोशन-सिकनेस के अन्य लक्षणों को दूर कर सकते है। हर बार जब आप बीमार महसूस करते हैं, तो बेहतर महसूस करने के लिए आप इस चूर्ण को कुछ ग्राम शहद में मिलाकर ले सकते हैं । दूसरी ओर, यदि आप नियमित रूप से किसी भी तरह के चक्कर का अनुभव करते हैं, तो आप इस मिश्रण को प्रतिदिन सुबह भी ले सकते हैं । इसके सेवन से नसों में ताकत आती है तथा गति से सम्बंधित मिचली, वमन (उलटी आना) और चक्कर आने की तकलीफें कम होती है.

त्रिफला डायबिटीज (मधुमेह) के सही प्रबंधन में सहायक है

यदि आप डायबिटीज (मधुमेह) से पीड़ित हैं, तो आप अपने रक्त में शर्करा के स्तर का प्रबंधन करने के लिए त्रिफला ले सकते हैं । यह एक वैकल्पिक उपचार विधि है जो रक्त में शर्करा को संतुलित करने में सहायक है। यह उपाय न केवल शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है, बल्कि बढ़ी हुई शुगर को नीचे लाने में भी सहायक होता है. इस प्रकार यह मधुमेह के प्रबंधन के लिए एक कारगर उपचार के रूप में काम करता है।

त्रिफला हृदय स्वास्थ्य सही रखने में सहायक होता है

त्रिफला आपके दिल के लिए एक टॉनिक के रूप में कार्य करता है. यह हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने या बढ़ाने में मदद करता है । ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस चूर्ण के सेवन से आपके रक्त संचार में सुधार होता है, आपका खराब कोलेस्ट्रॉल नीचे जाता है और आपका रक्तचाप नियंत्रित हो जाता है। ये सभी कारक मिलकर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं और हृदय को स्वस्थ रखते हैं। इसलिए, अच्छे ह्रदय स्वास्थ्य के लिए, आपको ज़रूर त्रिफला को आजमाना चाहिए। यह फार्मूला सदियों पुराना है.

त्रिफला त्वचा के कायाकल्प में मदद करता है

क्या आपको बच्चों जैसी कोमल और चिकनी त्वचा की ख्वाहिश है? यदि हाँ, तो आपकी तलाश ख़त्म हो चुकी है. स्वस्थ त्वचा की चमक पाने के लिए त्रिफला का विकल्प चुनें और उस अपराजेय ताजगी को प्राप्त करें। इस चूर्ण में एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो विभिन्न त्वचा संक्रमणों से लड़ने में मदद करते हैं। साथ ही मुँहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया को भी कम करते हैं। यदि आपकी सूखी या तैलीय या परतदार त्वचा है, तो आप त्रिफला का उपयोग करके बहुत लाभ उठा सकते हैं । इसमें पर्याप्त मात्रा में त्वचा कि पी.एच. (एसिडिटी) को नियंत्रित करने वाले गुण होते हैं जो त्वचा को नरम और नम रखने में मदद करते हैं।

त्रिफला लिवर (यकृत) को मज़बूत करती है

शरीर के सुचारू रूप से काम करने के लिए आवश्यक है कि पाचन तंत्र मजबूत हो. त्रिफला के सेवन से लिवर मजबूत होता है. लिवर न सिर्फ ‘पित्त’ बनाता है और भोजन पचाने में मदद करता है, बल्कि शरीर के अन्दर उपस्थित विषैले और दूषित पदार्थों के उत्सर्जन में भी फायदेमंद है. बाहर का मिलावटी खाना खाकर हमारा लिवर कमज़ोर हो जाता है और त्रिफला के सेवन से वह मजबूत होता है और आयु वृद्धि होती है.

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