Home रोचक तथ्य क्या आप अंतरिक्ष के बारे में 85 अजूबे तथ्य जानते हैं?

क्या आप अंतरिक्ष के बारे में 85 अजूबे तथ्य जानते हैं?

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इसमें कोई अचरज नहीं कि अंतरिक्ष के बारे में हर हफ्ते कुछ न कुछ नई बात सामने आती ही रहती है, इसीलिए हम आपको आज यहां अंतरिक्ष के बारे में 85 ऐसे दिलचस्प और रोचक तथ्यों के बारे में बताएंगे, जिन्हें जानकर आपको काफ़ी मज़ा आने वाला है। अंतरिक्ष से जुड़ी हर बात हमेशा से ही बड़ी ही दिलचस्प रही है। पिछली शताब्दी में जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा हमने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की, जिसका नतीजा यह हुआ कि हमने अंतरिक्ष के बारे में भी कई नए तथ्यों को जाना है। तो अब हम अपनी इस यात्रा को शुरू करते हैं और अंतरिक्ष के बारे में कुछ रोचक जानकारियों का आनंद लेते हैं।

  1. सूरज का वजन, पृथ्वी के वजन से लगभग 330,000 गुना ज्यादा है। सूर्य, पृथ्वी के व्यास का लगभग 109 गुना है और यह इतना बड़ा है कि इसके अंदर पृथ्वी लगभग 1,300,000 बार समा सकती है। वास्तव में सूरज इतना विशाल है कि इसमें हमारे सौरमंडल का 99.85% द्रव्यमान शामिल हो सकता है।
  2. चांद पर बने पैरों के निशान कभी भी गायब नहीं हो सकते, क्योंकि वहां हवा का अभाव है। परंतु यदि ऐसा है तो वहां पर लगाया गया झंडा किस प्रकार लहरा रहा था? सच्चाई यह है कि वह लहरा नहीं रहा था, परंतु हमें ऐसा दिखाई देने का कारण वह दूरबीन की क्षैतिज छड़ है जो अंतरिक्ष यात्री ध्वज के ऊपरी हेम से निकालने के लिए संघर्ष कर रहे थे। परंतु इस बात पर अभी भी अनिश्चितता है कि क्या वाकई में चंद्रमा पर किसी ने कभी कदम रखा है?
  3. गुरुत्वाकर्षण कम होने के कारण जिस व्यक्ति का वजन पृथ्वी पर 220 पौंड होता है, वह मंगल ग्रह पर सिर्फ 84 पौंड का रह जाता है। इसी कारण से कई वैज्ञानिक मंगल की सतह पर भेजने वाले ड्रॉइड को और ज्यादा वजन का बनाने के साथ ही उस पर और अधिक मजबूत सामग्री से निर्माण करने में लगे हुए हैं।
  4. बृहस्पति की परिक्रमा करने वाले कुल 9 चंद्रमा ऐसे हैं जिनको खोजा जा चुका है। हमारे सौरमंडल में बृहस्पति ग्रह सबसे अधिक चंद्रमाओं वाला ग्रह है और हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा चंद्रमा भी बृहस्पति ग्रह का ही है। उस चंद्रमा को “गैनीमेड” कहा जाता है। जिसका व्यास 33,709 मील है, जो कि बुध ग्रह से बड़ा है और यह सिर्फ दूरबीन की एक जोड़ी के साथ ही दिखाई देता है।
  5. मंगल ग्रह के निवासियों के लिए एक दिन 24 घंटे 39 मिनट और 35 सेकंड जितना लंबा होता है तो यदि आप ऐसा सोच रहे हैं कि मंगल में पृथ्वी से कम दिन का 1 साल होता है तो आप गलत सोच रहे हैं क्योंकि मंगल ग्रह, पृथ्वी की तुलना में सूर्य की परिक्रमा करने में ज्यादा समय लगाता है इसलिए वहां का 1 साल 687 दिनों के बराबर होता है।
  6. नासा के क्रेटर ऑब्जर्वेशन एंड सेंसिंग सैटेलाइट ने पृथ्वी के चंद्रमा पर पानी होने का सुबूत पाया है जबकि वर्तमान परिस्थितियों में चंद्रमा की सतह पर पानी मौजूद हो ही नहीं सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रमा के दो ध्रुवों पर स्थाई रूप से छाई हुई बर्फ के भीतर पानी हो सकता है।
  7. हमारा ग्रह पृथ्वी एक मात्र ऐसा ग्रह है जिसका नाम भगवान के नाम पर नहीं हैं। इस बात को कोई नहीं जानता कि पृथ्वी को उसका नाम कैसे मिला? हम सब यह जानते हैं कि इसका नाम पुरानी इंग्लिश और जर्मन के शब्दों के समामेलन से लिया गया है।
  8. सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण हमारे पास ज्वार आता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा की सतह पर बनने वाली ज्वारीय ताकत का कारण पृथ्वी है और पृथ्वी पर पानी का मौजूद होना, उसे चंद्रमा के सबसे करीब होने के कारण उस तरफ का उफान देता है। इस उफान के कारण ही दुनिया में उच्च ज्वार आते हैं।
  9. प्लूटो का आकार संयुक्त राज्य अमेरिका से भी छोटा है यदि आप प्लूटो के भूमध्य रेखा के चारों ओर घूमना चाहते हैं तो यह दूरी लंदन से डेनवर तक चलने के समान होगी जो कि तकरीबन 56 मील की दूरी है।
  10. प्लूटो पर 1 दिन की अवधि 153.6 घंटे होती है। यह दिन पृथ्वी पर 6 दिन 9 घंटे और 36 मिनट के बराबर होता है। प्लूटो की धीमी गति के कारण इसका एक दिन इतना लंबा होता है।
  11. गणित के अनुसार सफेद छेद मुमकिन है, परंतु अभी तक हमें ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं। एक सफेद क्षेत्र अंतरिक्ष पर होना एक काल्पनिक क्षेत्र है, जिसमें बाहर से प्रवेश नहीं किया जा सकता है। हालांकि पदार्थ और प्रकाश इस से निकल बाहर निकल जरूर सकते हैं। मुख्यतः यह काले छेद का विपरीत है।
  12. शुक्र ग्रह में ज्वालामुखिओं की संख्या किसी भी अन्य ग्रह की तुलना पर सबसे ज्यादा है। कुल 1600 से ज्यादा और बड़े ज्वालामुखी शुक्र की धरती पर फैले हुए हैं। सबसे ऊंचे ज्वालामुखी का नाम ‘माट हंस’ है जो कि 5 मील (8 किलोमीटर) ऊंचा है। हालांकि इनमें से किसी की भी वर्तमान में प्रस्फुटित होने की संभावना नहीं है और अधिकांश संभवत लंबे समय के लिए विलुप्त हैं।
  13. यूरेनस ग्रह की नीली चमक, उसके वायुमंडल में में उपस्थित गैसों की वजह से होती है। यूरेनस का वातावरण हाइड्रोजन, हीलियम और मेथेन इन गैसों से मिलकर बना है। मेथेन गैस यूरेनस के सबसे ऊपरी सतह में होने के कारण सूर्य की लाल रोशनी को अपने अंदर लेने के बाद जब वापस अंतरिक्ष में प्रतिबिंबित करती है तो वह नीले रंग की होकर दिखती है और यही कारण है कि यूरेनस के चारों तरफ नीले रंग की चमक दिखती है।
  14. यूरेनस में अब तक कुल 27 चांद खोजे गए हैं। जिनमें की पांच बहुत बड़े चांद हैं और 22 छोटे चांद हैं। टाइटेनिया, यूरेनस का सबसे बड़ा चांद है और सौरमंडल का आठवां सबसे बड़ा चांद है। जिसका व्यास तकरीबन 1,578 किलोमीटर (980.5 मील) है।
  15. अपने अनूठे झुकाव के कारण, यूरेनस पर एक मौसम 21 पृथ्वी वर्षों के बराबर होता है। यूरेनस की धुरी पर 97.77°का झुकाव का मतलब यह है कि वहां के 1 दिन की अवधि केवल 17 घंटे 14 मिनट और 24 सेकेंड की होती है।
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  1. नेपच्यून का चंद्रमा ‘ट्राइटन’ ग्रह की पीछे की ओर से परिक्रमा करता है। खगोलविद् इस बात के लिए अनिश्चित है कि ट्राइटन, नेपच्यून कि इस तरह की परिक्रमा क्यों करता है।
  2. नेपच्यून को सूर्य का एक चक्कर लगाने में लगभग 165 पृथ्वी वर्ष लगते हैं। यदि और साधारण शब्दों में कहा जाए तो नेपच्यून सूरज की एक परिक्रमा 60,190 पृथ्वी दिनों में पूरी कर पाता है। नेपच्यून की परिक्रमा करने की गति बहुत ही धीमे है। यह लगभग 3.37 मील प्रति सेकंड की धीमी गति से चलता है। इसका मतलब यह है कि सन् 1886 में खोजे जाने के बाद से इसने केवल एक कक्षा पूरी की है।
  3. शनि हमारे सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। इसका घेरा तकरीबन 36,184 मील (58,232 किलोमीटर) का होता है, जो कि पृथ्वी का 9 गुना है। जबकि इसके कम घनत्व के कारण इसका वजन पृथ्वी के वजन का केवल 1/8 में हिस्से के बराबर ही होता है।
  4. बुध और शुक्र हमारे सौरमंडल के केवल ऐसे दो ग्रह हैं जिनका अपना कोई चांद नहीं है। हमारे सौरमंडल में कुल 176 चांद हैं जो ग्रहों की परिक्रमा करते हैं उनमें से कुछ तो बुध ग्रह से भी बड़े हैं।
  5. यदि कोई तारा किसी ब्लैक होल के बहुत पास से गुजरता है तो वह फट सकता है। 20 वर्षों तक खगोलविदों की एक टीम ने हमारी आकाशगंगा के केंद्र में एक ब्लैक होल की परिक्रमा करते हुए एक तारे का अवलोकन किया। यह तारा ब्लैक होल के “ग्रेविटेशनल रेडशिफ्ट” होने के कारण उसके काफी करीब आ चुका है जहां ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण के कारण तारे की रोशनी कम होती जा रही है।
  6. शुक्र हमारे सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है। बहुत से लोगों का ऐसा मानना है कि बुध सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है, क्योंकि यह सूर्य के पास है। परंतु ऐसा नहीं है। हालांकि शुक्र के वातावरण में बहुत सारी गैसें हैं, जो एक “ग्रीन हाउस इफेक्ट” बनाती हैं। जहां का तापमान का स्तर 864°फॉरेनहाइट (462° सेल्सियस) है।
  7. हमारा सौर मंडल 4.57 बिलियन वर्ष पुराना है। यदि और सटीक रूप से कहा जाए तो यह 4.571 बिलियन वर्ष पुराना है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लगभग 5 बिलियन वर्षों में हमारा सूर्य लाल विशालकाय बन जाएगा और लगभग 7.51 बिलियन वर्षों में इसका विस्तार इतना ज्यादा हो चुका होगा कि यह पृथ्वी की सतह को निगल जाएगा।
  8. अब तक खोजा गया सबसे ऊंचा पर्वत ओलंपस मॉन्स है, जो कि मंगल ग्रह पर स्थित है। इसका शिखर 16 मील अर्थात 25 किलोमीटर ऊंचा है, जो कि माउंट एवरेस्ट से लगभग 3 गुना ज्यादा है। केवल ऊंचाई में ही नहीं, बल्कि इसकी चौड़ाई 374,015 फीट स्क्वायर है। यह एरीजोना के आकार के क्षेत्र के बराबर है।
  9. एक प्रकाश वर्ष एक एकल वर्ष में प्रकाश द्वारा तय की गई दूरी होता है। प्रकाश एक सेकंड में लगभग 186,411 मील के वेग से चलता है। इस हिसाब से एक प्रकाश वर्ष लगभग 5,903,026,326,255 मील के बराबर होता है।
  10. मिल्की वे आकाशगंगा 105,700 प्रकाश वर्ष चौड़ी होती है। हमारी आकाशगंगा के केंद्र की यात्रा करने के लिए एक आधुनिक अंतरिक्ष यान को लगभग 450,000,000 साल का समय लगेगा।
  11. अंतरिक्ष में तारों की संख्या का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वैज्ञानिकों का मानना है अंतरिक्ष में तारों की संख्या इतनी अधिक हैं, जितनी दुनिया में रेत के दाने भी नहीं होंगे। पृथ्वी पर रेत के दानों की तुलना में आकाश में 10 गुना अधिक तारे होते हैं। जिसमें से 70 दोसेक्स्टिलियन तारे पृथ्वी से दूरबीन की माध्यम से दिखाई देते हैं। यदि संख्याओं में कहें तो 70 सेक्स्टिलियन यह है – 70,000,000,000,000,000,000,000,000
  12. प्लूटो का सबसे बड़ा चंद्रमा ‘चारोन’ प्लूटो के आधे आकार का है। चारोन और प्लूटो हमेशा समान सतहों में रहकर एक-दूसरे का सामना करते हैं। जिसे पारस्परिक ज्वार भाटा के रूप में जाना जाता है।
  13. अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, अंतरिक्ष में भेजा गया अब तक का सबसे बड़ा मानवयुक्त ऑब्जेक्ट है। 119 यार्ड (109 मीटर) लंबा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी से लगभग 250 मील (400 किलोमीटर) ऊपर है और रात के समय में यह आकाश की तीसरी सबसे चमकती हुई वस्तु के रूप में दिखाई देता है।
  14. पृथ्वी से ब्रह्मांड का केवल 5% हिस्सा ही दिखाई देता है। 68% ब्रह्मांड का हिस्सा डार्क एनर्जी है और 27% हिस्सा डार्क मैटर है। दोनों ही अदृश्य हैं, जिसे टेलिस्कोप के साथ भी नहीं देखा जा सकता है। जिसका साफ मतलब यह है कि हम केवल ब्रह्मांड का 5% हिस्सा ही देख पा रहे हैं।
  15. सूर्य से धरती तक आने में प्रकाश को 10 मिनट से भी कम लगते हैं। सूर्य की सतह से उत्सर्जित फोटोन केवल 8 मिनट और 20 सेकंड में हमारी आंखों तक पहुंचने के लिए प्रकाश की गति से अंतरिक्ष के निर्यात में यात्रा करते हैं।
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  1. किसी भी दिए गए समय पर पृथ्वी में लगभग 2,000 वज्रपात हो रहे होते हैं। दुनिया भर में हर साल तकरीबन 16 मिलियन वज्रपात होते हैं। इनमें से मोटे तौर पर देखा जाए तो 1,00,000 वज्रपात तो अकेले अमेरिका में ही हो जाते हैं।
  2. बाहरी अंतरिक्ष में कोई भी मुक्त तरल अपने आप एक गोले के रूप में परिवर्तित हो जाता है। ऐसा होने का मुख्य कारण सतह के तनाव का होना है। जो कि अंतर-आणविक आकर्षण बलों का असंतुलन होता है। ऐसा पृथ्वी की बाहरी कक्षा में भी हो सकता है।
  3. बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल को आंतरिक ग्रह के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह सूर्य के सबसे निकट है।
  4. हम मंगल ग्रह और चांद के बारे में अपने महासागरों से ज्यादा जानते हैं। हमने मंगल ग्रह और पृथ्वी के चांद की सतह का 100% अर्थात पूरी तरह से मानचित्रण किया हुआ है। जबकि महासागरों के बारे में हम सिर्फ 5% ही मानचित्रण कर पाए हैं।
  5. धरती पर आने वाला प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल के कारण बाधित होकर पृथ्वी तक पहुंचता है, जिसकी वजह से हमें तारे टिमटिमाते हुए दिखाई देते हैं। यह प्रकाश हमारे वायुमंडल में प्रवेश करते ही यहां की हवा से प्रभावित होता है, साथ ही अलग-अलग क्षेत्र के अलग-अलग तापमान से भी प्रभावित होता है। यही कारण है कि तारों से निकलने वाली रोशनी हमें चमकती हुई दिखाई देती है।
  6. हमें चंद्रमा का हमेशा एक ही हिस्सा या पक्ष दिखाई देता है, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम पृथ्वी पर कहां खड़े हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा अपनी धुरी पर उसी दर से घूमता है, जिससे वह पृथ्वी के चारों तरफ घूमता है। इसे ज्वारी लॉकिंग या सिंक्रोनस रोटेशन के नाम से जाना जाता है।
  7. तीन मुख्य प्रकार की आकाशगंगाऐं हैं – अंडाकार, घुमावदार या सर्पिल और अनियमित। मिल्की वे आकाशगंगा, जिसमें हमारा सौरमंडल रहता हैं उसे सर्पिल आकाशगंगा के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  8. मिल्की वे में तकरीबन 100 हजार मिलियन तारे हैं। सभी ज्ञात आकाशगंगा में से मिल्की वे में सबसे अधिक तारे हैं।
  9. अपनी नग्न आंखों का प्रयोग करके हम धरती से 3 से 7 विभिन्न आकाशगंगाओं को देख सकते हैं। पृथ्वी से हमें एंड्रोमेडा आकाशगंगा (M31), दोनों मैग्लेनिक क्लाउड्स, हमारी अपनी मिल्की वे आकाशगंगा, त्रिकोणीय गैलेक्सी (M33), ओमेगा सेटॉरी और धनु बौना सौरॉयड गैलेक्सी दिखाई दे सकती है।
  10. यदि आप 75 मील प्रति घंटा की रफ्तार से कार चलाएं, तो इसका मतलब यह होगा कि शनि के छल्ले का चक्कर लगाने में आपको 258 दिन लगेंगे। शनि के छल्ले लगभग 175,000 मील लंबे हैं। सिर्फ इतना ही नहीं यह तकरीबन 3,200 फीट मोटें भी हैं।
  11. वैसे अंतरिक्ष कहां से शुरू होता है, उसकी सीमा का कोई अधिकारिक ठोस सबूत तो नहीं है। क्रेमन रेखा समुद्र तल से 62 मील ऊपर है और पारंपरिक रूप से अंतरिक्ष संधियों में बाहरी स्थान की शुरुआत या एयरोस्पेस रिकॉर्ड रखने के लिए उपयोग की जाती है। इस हिसाब से हम कह सकते हैं कि बाहरी अंतरिक्ष केवल 62 मील की दूरी पर है।
  12. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन हर 92 मिनट में धरती का एक चक्कर पूरा कर लेता है। पृथ्वी की परिक्रमा करते समय अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को तकरीबन 17,150 मील प्रति घंटा की स्पीड से चलना होता है। जिसका अर्थ है कि यह हर सेकेंड 5 मील की दूरी तय करता है।
  13. 2016 में वैज्ञानिकों ने 5 अरब प्रकाश वर्ष दूर एक रेडियो सिग्नल का पता एक स्रोत के द्वारा लगाया था। इसका मतलब यह है कि जब सिग्नल ने अपनी यात्रा शुरू की, तो पृथ्वी का अस्तित्व भी मौजूद भी नहीं था। पता लगाए गए संकेत, न्यू मैक्सिको में नेशनल रेडियो एस्ट्रोनॉमी ऑब्जर्वेटरी के ‘वेरी लार्ज ऐरे’ (VLA) उपयोग करते हुए स्थित थे।
  14. हमारे सबसे पास की आकाशगंगा एंड्रोमेडा गैलेक्सी है। जो कि हमसे 2.5 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर है। एंड्रोमेडा गैलेक्सी, की खोज से पहले मैगेलैनिक क्लाउड को हमारे सबसे निकटतम की आकाशगंगा माना जाता था।
  15. पहला सुपरनोवा हमारी गैलेक्सी के बाहर 1885 में देखा गया। इस सुपरनोवा को एस एंड्रोमेडा कहा जाता है, क्योंकि यह एंड्रोमेडा गैलेक्सी में स्थित है। इसे अर्नेस्ट हार्टविंग ने एस्टोनिया में टेलीस्कोप के द्वारा देखा था, जो कि हाल ही में हुए टेलीस्कोप के आविष्कार के कारण संभव हो पाया था।
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  1. पहले ब्लैक होल की तस्वीर पृथ्वी के आकार की 3 मिलियन गुना है। यह फोटो अप्रैल 2019, में जारी की गई थी और पृथ्वी से 310 मिलियन ट्रिलियन मील की दूरी पर, धूल और गैस के ढेर दिखाती है।
  2. कुइपर बेल्ट, नेपच्यून की कक्षा से परे सौरमंडल का एक क्षेत्र है। कुइपर बेल्ट बर्फीली पिंडों की एक अंगूठी नुमा है और यह प्लूटो ग्रह यहीं पर स्थित है।
  3. अंतरिक्ष में जाने वाली पहली महिला रूसी नागरिक थी। जिनका नाम वेलेंटीना टेरेशकोवा था। उन्होंने इतिहास और अंतरिक्ष दोनों में एक साथ अपना नाम अंकित किया। उन्होंने तकरीबन 3 दिन अंतरिक्ष में बिताए और पृथ्वी पर लौटने से पहले उन्होंने अपने अंतरिक्ष यान से पृथ्वी की 48 बार परिक्रमा की।
  4. यदि शनि की के छल्ले 3 फीट लंबे होते, तो यह रेजर ब्लेड से 10,000 गुना पतले होते। शनी के छल्ले बहुत पतले होते हैं जिनका मुख्य कारण यह है कि वह धूल भरे पानी से बने हुए हैं, साथ ही इनका आकार धूल के दानों जितना छोटा होता है।
  5. अंतरिक्ष के पहले कृत्रिम उपग्रह को ‘स्पुतनिक’ कहा जाता है। यह सोवियत संघ द्वारा, अंडाकार आकृति वाला, पृथ्वी की कक्षा में 4 अक्टूबर 1957, में लॉन्च किया गया था।
  6. एक्सोप्लैनेट ऐसे ग्रह हैं, जो अन्य सितारों की परिक्रमा करते हैं। वैसे तो हमारे सौरमंडल में सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। परंतु दूसरे सौरमंडल के बारे में क्या? सन् 2009 में, नासा ने एक अंतरिक्ष यान बनाया जिसे ‘केप्लर’ नाम से बुलाया जाता है। यह एक्सोप्लैनेट की तलाश के लिए तैयार किया गया था और उसने लॉन्च के बाद से हजारों नई खोजें कीं हैं।
  7. सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी को एक खगोलीय इकाई के रूप में परिभाषित किया गया है। एक खगोलीय इकाई लगभग 93 मिलियन मील या 150 मिलियन किलोमीटर के बराबर होती है।
  8. चंद्रमा पर गए दूसरे व्यक्ति का नाम बज़ एड्रिन था। ‘मून’ एल्ड्रिन की मां का पहला नाम था। ५७. शुक्र पर धातु की बर्फ और सल्फ्यूरिक एसिड की बारिश होती है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शुक्र झुलसा देने वाला ग्रह है, जो सल्फ्यूरिक एसिड से भरा हुआ है। जिसके कारण गृह में मौजूद धातु गैस बन जाती हैं और फिर तरल में परिवर्तित होकर वातावरण में बारिश के रूप में बरसती हैं। सतह पर गिरने के बाद तापमान की वजह से यह वापस ठोस में बदल जाती हैं।
  9. मेरिनर, पहला अंतरिक्ष यान था जिसने 1974 में बुध ग्रह का दौरा किया था। इसे नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर में 1973 में लांच किया गया था। इसने बुध की कक्षा में पहुंचकर बुध की सतह के 45% हिस्से की तस्वीर ली थी। दूसरा अंतरिक्ष यान जो बुध ग्रह में पहुंचा उसका नाम ‘मैसेंजर’ था। इसने 2013, में बुध ग्रह की 100% सतह का 100% मानचित्रण किया।
  10. अंतरिक्ष पूरी तरह खामोश है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अंतरिक्ष में हवा का अभाव है। ध्वनि कंपन को ले जाने के लिए हवा की आवश्यकता होती है। इसलिए यदि आप अंतरिक्ष में किसी के बगल खड़े होकर के चिल्लाएंगे भी तो वह आपको सुनेगा नहीं।
  11. कोका कोला अंतरिक्ष में जाने वाला पहला शीतल पेय था। अंतरिक्ष में खाया जाने वाला पहला भोजन सेब था। 1962 में ‘मैत्री-7 मिशन’ के दौरान अंतरिक्ष में जॉन ग्लेन के द्वारा यह खाया गया था।
  12. अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्री की ऊंचाई लगभग 2 इंच (5 सेंटीमीटर) तक बढ़ सकती है। ऐसा अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण होता है क्योंकि इस स्थिति में कशेरुकाओं के बीच की डिस्क थोड़ा सा विस्तार कर लेती है। जिसके कारण हमें ऊंचाई बढ़ी हुई महसूस होती है। हालांकि यह अतिरिक्त ऊंचाई, जब अंतरिक्ष यात्री पुनः पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है तो वापस कम हो जाती है, क्योंकि वह फिर से पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण के आधीन हो जाता है।
  13. मिल्की वे के केंद्र में रम जैसी खुशबू आती है और जिसका स्वाद रसभरी जैसा होता है। IRM रेडियो टेलीस्कोप के द्वारा यह खोजा गया था कि हमारी आकाशगंगा के केंद्र में धनु b2 नामक गैस है। IRM ने एथिल फॉर्मेट नामक एक रसायन का पता लगाया, जो इस रम की खुशबू और रसभरी के स्वाद के लिए जिम्मेदार है।
  14. हमारा चंद्रमा प्रतिवर्ष 1.6 इंच (4 सेंटीमीटर) की दर से पृथ्वी से दूर जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अंततः चंद्रमा, पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के क्षेत्र से बाहर निकल जाएगा। हालांकि आने वाले अरबों वर्षों तक यह घटना नहीं होने वाली है, इसे होने में उससे ज्यादा समय लगने वाला है।
  15. प्लूटो ग्रह का नाम रोमन भगवान के नाम पर रखा गया है जो कि अंडरवर्ल्ड के रोमन देवता हैं, ना कि डिज्नी डॉग के नाम पर। इस ग्रह का नाम वेनेटिया बर्नी, एक 11 वर्षीय ब्रिटिश स्कूल छात्रा, ने ग्रह के खोजकर्ता क्लाइड टॉम्बो को सुझाया था।
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  1. अंतरिक्ष यात्री, अंतरिक्ष में डकार नहीं ले सकतें है। इसका कारण यहां गुरुत्वाकर्षण का ना होना है। जिसका अर्थ यह होता है कि अंतरिक्ष यात्री के पेट से हवा बाहर नहीं निकल पाती, जो भोजन के ग्रहण करने के बाद शरीर के अंदर से ऊपर की तरफ उठती है।
  2. यूरेनस को मूल रूप से ‘जॉर्ज्स स्टार’ कहा जाता है। ‘यूरेनस’ नाम 1782 में प्रस्तावित किया गया था, इसकी खोज के 1 साल बाद। अधिकारिक तौर पर 1850 तक इसका उपयोग नहीं किया गया था। ‘जॉर्ज्स स्टार’, नाम खोजकर्ता विलियम हर्शेल ने नए संरक्षक, किंग जॉर्ज-3 के सम्मान में था।
  3. मंगल पर सूर्यास्त नीले रंग का होता है। मंगल के पास पृथ्वी के वायुमंडल का 1% से भी कम हिस्सा है। इसलिए मंगल पर सूर्यास्त नीले रंग के रूप में दिखाई देता है ऐसा लगता है मानो सूर्य से आने वाली रोशनी को मंगल के वातावरण ने नीले रंग में बदल दिया हो।
  4. पृथ्वी का वजन चांद के वजन से 81 गुना ज्यादा है। चांद का गुरुत्वाकर्षण दूसरे ग्रहों की भांति इस बात पर निर्भर करता है कि आप उसकी सतह पर कहां है।
  5. अंतरिक्ष में जाने वाला पहला जीवित स्तनपाई कुत्ता था। जिसका नाम लाइका था और यह रूस का था। लाइका, मास्को की सड़कों का एक आवारा प्रजाति का कुत्ता था। इसे सोवियत संघ ने 3 नवंबर 1957, को स्पूतनिक 2 में अंतरिक्ष जाने के लिए रवाना किया। दुख की बात यह है कि लाइका की मौत 5-7 घंटे के अंदर ही फ्लाइट के ज्यादा गर्म हो जाने और तनाव के कारण हो गई।
  6. अंतरिक्ष यात्रियों के हेलमेट में वेल्क्रो पैच होता है, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को खुजली करने में मदद मिलती है। इस पैच को बनाने का एकमात्र उद्देश्य इतना ही था।
  7. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पृथ्वी की 90% से अधिक आबादी को दिखाई देता है। रात्रि के समय आकाश में एक तारे जैसी आकृति जो क्षितिज से क्षितिज तक तीव्र गति से जाती हुई दिखाई देती है, यह कोई तारा या कुछ और नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन है।
  8. शनि एक मात्र ऐसा ग्रह है, जो पानी में तैर सकता है। वैसे तो शनि हमारे सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है, परंतु यदि वजन के मामले में देखा जाए तो यह हमारे सौरमंडल का सबसे हल्का ग्रह भी है। शनि पानी में तैर सकता है क्योंकि यह मुख्यतः गैसों से बना हुआ है।
  9. बृहस्पति का लाल धब्बा धीरे-धीरे सिकुड़ रहा है। बृहस्पति का लाल धब्बा इतना बड़ा और प्रचंड तूफान के जैसा है, जो पृथ्वी के आकार का 3 गुना हुआ करता था। हालांकि समय के साथ यह कुछ हद तक सिकुड़ गया है। लेकिन जिस तरह यह सिकुड़ता जा रहा है, उसी रफ्तार से यह लंबा भी होता जा रहा है।
  10. बृहस्पति अपने गुरुत्वाकर्षण द्वारा क्षुद्रग्रहों का बहुत बड़ा प्रतिशत अपनी तरफ खींच लेता है। इसी कारण बृहस्पति को हमारे सौरमंडल के डंपिंग ग्राउंड के रूप में जाना भी जाता है। कई क्षुद्रग्रह ऐसे भी हैं जो पृथ्वी के लिए संभावित रूप से हानिकारक है – जैसे कि लंबी अवधि के धूमकेतु इत्यादि। परन्तु बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण के कारण वह बृहस्पति में ही समा जाते हैं।
  1. बुध ग्रह में 1 दिन पृथ्वी के 58 दिनों के बराबर होता है ऐसा इसलिए है क्योंकि बुध ग्रह पृथ्वी की तुलना में अपनी धुरी पर बहुत धीरे-धीरे घूमता है।
  2. धूमकेतु के केंद्र को ‘नाभिक’ कहा जाता है। धूमकेतु के पीछे चलने वाली धूल की धाराएं को ‘कोमा’ या ‘पूंछ’ के नाम से जानी जाती हैं।
  3. 2006 में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने प्लूटो ग्रह को एक बौने ग्रह के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि प्लूटो का गुरुत्वाकर्षण आसपास की कक्षा में उपस्थित गुरुत्वाकर्षण पर हावी नहीं है।
  4. हमारे सौरमंडल में मान्यता प्राप्त पांच बौने ग्रह हैं – सेरेस, माकेमेक, ह्यूमिया, एरिस और प्लूटो। हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा क्षुद्रग्रह भी है और यह क्षुद्रग्रह बेल्ट में रहता है। जिससे यह खो जाता है कि यह एकमात्र ऐसा बना ग्रह है जो बाहरी सौरमंडल में नहीं निवास कर सकता है।
  5. मंगल ग्रह हमारे सौरमंडल में जीवन के लिए सबसे अधिक संभावना रखने वाला ग्रह है। 1986 में नासा ने पाया कि उनका मानना है कि मंगल की सतह से बरामद चट्टान में सूक्ष्मजीवों के जीवाश्म हो सकते हैं।
  6. हेली धूमकेतु, पृथ्वी को फिर से 26 जुलाई 2061 में पार करेगा। इस प्रसिद्ध धूमकेतु को पिछली बार 9 फरवरी 1986 में देखा गया था। यह पृथ्वी की कक्षा में हर 75-76 साल के बीच में आता है।
  7. एक ग्रह ऐसा भी है जो पृथ्वी की आधी त्रिज्या के साथ हीरे की सतह से बना हुआ है। ’55 कैनरी ई’ जिसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 8 गुना है, जबकि उसकी त्रिज्या पृथ्वी की आधी है। इसकी सतह ग्रेफाइट तथा हीरे से बनी हुई है या केवल 40 प्रकाश वर्ष दूर है। कर्क नक्षत्र के तहत इसे नग्न आंखों से देखा जा सकता है।
  8. चूकिं अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं है, इसलिए वहां पर कलम काम नहीं करेगा। सामान्य पेन में गुरुत्वाकर्षण के कारण उसमें भरी हुई स्याही लिखते समय उसकी निब तक आ पाती है और जब उसे आप हाथ में लेकर लिखते हैं, तो वह नीचे की तरफ झुके होने की वजह से लिखना शुरु कर देता है। परंतु अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण का अभाव होने के कारण पेन की स्याही कभी नीचे तक पहुंचेगी ही नहीं, इसलिए वहां कलम चलेगी ही नहीं। हालांकि कुछ ऐसे विशेष कलम भी बनाए गए हैं जो शून्य गुरुत्वाकर्षण में काम कर सकें।
  9. चंद्रमा से पृथ्वी की यात्रा करने में प्रकाश को औसतन 1.3 सेकेंड का समय लगता है। पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी केवल 238,855 मील (384,400 किलोमीटर) है।
  10. अंतरिक्ष यात्री का शाब्दिक अर्थ ‘स्टार नाविक’ है। यह ग्रीक शब्द ‘एस्ट्रोन’ जिसका अर्थ ‘स्टार’ और ‘न्यूट्रस’ से लिया गया है जिसका अर्थ ‘नाविक’ होता है।
  11. नासा का अर्थ ‘नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ है। यह संयुक्त राज्य संघीय सरकार की एक स्वतंत्र एजेंसी है। जिसे 1958 में स्थापित किया गया था। नासा हर दिन अंतरिक्ष के बारे में नए तथ्यों का पता लगाता है।
  12. जेनेडी पैडलका (Gennady padalka) ने अंतरिक्ष में किसी भी अन्य अंतरिक्ष यात्री की तुलना में अधिक समय बिताया है। इन्होंने अंतरिक्ष में कुल 879 दिन बिता चुके हैं। उन्होंने मीर और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन दोनों पर ही काम किया हुआ है।
  13. बुध ग्रह में कोई वायुमंडल नहीं है, जिसका अर्थ है वह कोई हवा या मौसम नहीं होता है। वायुमंडल के स्थान पर बुध के पास एक पतली वायुमंडल जैसी कुछ है, जो परमाणुओं से बना होता है। जो सौर हवा से सतह पर विस्फोट करता है और उल्का पिंडों से टकराता है।
  14. लाल बौने तारे जो द्रव्यमान में कम होतें हैं, वह 10 ट्रिलियन वर्ष तक लगातार जल सकते हैं। लाल बौना तारा जीवन के बाद के चरण में एक छोटा और शांत तारा हो जाता है। जिसकी सतह का तापमान 7,200°फॉरेनहाइट से कम होता है।
  15. वैज्ञानिकों ने एक बार ऐसा भी माना था कि बुध का एक ही पक्ष हमेशा सूर्य का सामना करता है। हालांकि 1965 में खगोलविदों ने यह पाया कि यह ग्रह अपनी हर दो कक्षाओं के दौरान तीन बार घूमता है।

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