जापान के विषय में आश्चर्यचकित कर देने वाले 31 तथ्य

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यदि आप जापान के बारे में कुछ चौंकाने वाले तथ्य खोजने की कोशिश कर रहे हैं तो आपकी खोज इस लेख के ऊपर आकर समाप्त हो सकती है। यह लेख जापान के विषय में आपको कुछ ऐसे अद्भुत तथ्यों के विषय में बताएगा जो आपकी जिज्ञासा को शांत करने में सफल होंगे। साथ ही यह आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ाने का भी अच्छा तरीका है।

Table Of Contents
  1. जापान का टोक्यो शहर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है
  2. जापान के लोगों की जीवन अवधि का समय दुनिया में सबसे अधिक समय तक जीवित रहने वाले लोगों में दूसरे स्थान पर आता है
  3. जापान मुख्य रूप से चार मुख्य द्वीपों से मिलकर बना हुआ है
  4. जापान के अंदर हर साल लगभग 1600 भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं
  5. सन् 1923 में आया कांटों भूकंप जापान के इतिहास का सबसे खतरनाक भूकंप था
  6. जापान के अंदर दुनिया का ऐसा डाकखाना है जो पानी की सबसे अधिक गहराई में स्थित है।
  7. जापानी लोग प्रकृति से बहुत अधिक ज्यादा लगाव रखतें हैं
  8. जापान का 69% इलाका जंगल से ढका हुआ है
  9. जापान के अंदर कई सारे ज्वालामुखी हैं, जो आज भी सक्रिय अवस्था में हैं
  10. माउंट फूज़ी, जापान का धार्मिक स्थान है
  11. ‘जोमोन काल’ जापान की सबसे पहली सभ्यता मानी जाती है।
  12. जोमोन काल के बाद जापान के अंदर यायोई काल आया
  13. जापान का इतिहास लगभग 30000 बीसीई पूर्व का माना जाता है
  14. पुर्तगाली लोग जापान के अंदर आने वाले सबसे पहले आने वाले यूरोपियन लोग हैं
  15. किन्हें कहतें हैं जापान में ‘कारोशी’
  16. एक समय ऐसा भी था जब जापान पूरी दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ था
  17. जापान के समुंद्र को मछलियों के भंडार के रूप में जाना जाता है
  18. जापान के अंदर एक ऐसा हाईव है जो एक बिल्डिंग के अंदर से होकर गुजरता है
  19. जापान के अंदर पाई जाती है ना पिघलने वाली आइसक्रीम
  20. जापान के अंदर लोग स्वास्थ्यवर्धक भोजन करना पसंद करते हैं
  21. जापान दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है
  22. जापान में जन्म दर सबसे निम्नतम बिंदु पर पहुंच गई है
  23. सन् 2003 से जापान में शुरू हुआ पालतू जानवरों को पालने का चलन और घटित हुई मानवता को शर्मसार करने वाली घटना
  24. ‘नाची’ जापान का सबसे ऊंचा झरना है
  25. दुनिया का सातवां सबसे लंबा समुद्री किनारा
  26. एक समय था जब जापान में आधी रात के बाद नाचने पर प्रतिबंध लगा हुआ था
  27. जापान के अंदर सबसे ज्यादा आधुनिक ट्रेनों का संचालन किया जाता है
  28. जापान एक ऐसा देश है, जहां पर कई प्रकार के मौसम देखने को मिलतें हैं
  29. जापान के अंदर पोकेमोन नामक कार्टून करैक्टर के एपिसोड्स को प्रतिबंधित कर दिया गया था
  30. जापान का राजनीतिक ढांचा
  31. दुनिया का आखिरी शासक

जापान का टोक्यो शहर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है

जापान का टोक्यो शहर मुख्य रूप से तीन जनपदों से मिलकर बना हुआ है। साथ ही यह शहर जापान की राजधानी भी कहलाता है। इसकी अनुमानित जनसंख्या लगभग 38.14 मिलियन के आसपास है जिसकी वजह से यह दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर माना जाता है।

जापान के लोगों की जीवन अवधि का समय दुनिया में सबसे अधिक समय तक जीवित रहने वाले लोगों में दूसरे स्थान पर आता है

दुनिया के अंदर सबसे अधिक जीवन जीने वाले लोगों में जापान का नंबर हांगकांग के बाद दूसरे स्थान पर है‌। जहां पर इंसान की सामान्य उम्र लगभग 83 वर्ष के आसपास होती है। जबकि हांगकांग के अंदर यह 84 साल के आसपास है। कई लोगों का मानना है कि जापान के लोगों का जीवन लंबा होने के कारण उनकी पारंपरिक रूप से चली आ रही खानपान की आदत है। अगर इसको पश्चिमी देशों के साथ तुलनात्मक रूप से देखा जाएं तो जापान के लोग अधिक मांसाहारी भोजन (भोजन के रूप में अधिक मछलियां कम लाल मीट तथा ज्यादा सब्जियां और छोटे खुराक में खाना) का प्रयोग करते हैं। जापान के अंदर हर व्यक्ति अपनी पारंपरिक गतिविधियों को महत्व देता है और अपनी संस्कृति को हमेशा आगे बढ़ाने तथा पारिवारिक रूप से अपने आप को समाहित करने में विश्वास करता है।

जापान मुख्य रूप से चार मुख्य द्वीपों से मिलकर बना हुआ है

जापान के अंदर कुल 6852 द्वीप मौजूद हैं। परंतु उनमें से केवल चार मुख्य द्वीप ही जापान की ज्यादातर स्थाई जगहों को पूर्ण करते है। यह जापान के अंदर के लगभग 97% क्षेत्र का समावेश अपने अंदर करते हैं तथा जापान के मुख्य शहर जैसे टोक्यो ओसाका और क्योटा भी इन्हीं द्वीपों के ऊपर बसे हुए शहर हैं।

जापान के अंदर हर साल लगभग 1600 भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं

जी हां आपने बिल्कुल सही पढ़ा है जापान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि जापान 4 से अधिक टेक्टोनिक प्लेट्स के ऊपर बसा हुआ है, जिनके नाम क्रमशः पेसिफिक, नॉर्थ अमेरिकन यूरेशियन और फिलिपिनों प्लेट हैं। यह दुनिया में भूकंपीय रुप से सबसे सक्रिय स्थानों में से एक मानी जाती है। हालांकि इन भूकंप के झटकों में से ज्यादातर कम रिक्टर स्केल की तीव्रता के होते हैं। हो सकता है कि उनका असर आपको महसूस भी ना हो। लेकिन जापान के अंदर बहुत बड़े स्तर पर और बहुत ही तबाही मचाने वाले भूकंप के झटके भी आते रहते हैं।

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सन् 1923 में आया कांटों भूकंप जापान के इतिहास का सबसे खतरनाक भूकंप था

जैसा कि हमने आपको ऊपर लिखें पॉइंट के बताया कि जापान के अंदर कई प्रकार के बड़े भूकंप के झटके भी आते रहते हैं तो इस दिशा में आगे बढ़ते हुए हम आपको यह बताना चाहते हैं कि साल 1923 के अंदर आया भूकंप जापान के इतिहास का सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाला भूकंप था। इस भूकंप की तीव्रता लगभग 7.9 के आसपास मापी गई थी तथा यह लगातार 10 मिनट तक की अवधि के लिए जारी रहा था। जिसके अंदर 140,000 लोगों ने अपने प्रांण गवां दिए थे।

साल 2011 में आया भूकंप का झटका सबसे शक्तिशाली भूकंप का झटका था जिसकी तीव्रता 9.0 मापी गई थी। जिसके कारण लगभग 29,000 लोगों ने अपने प्रांण गवां दिए थे। सन् 1923 के दौरान जापान के अंदर ज्यादातर घर लकड़ी के बनाए जाते थे, जिसके कारण भूकंप के दौरान आग लगने से ज्यादातर लोगों की मौत हुई थी।

जापान के अंदर दुनिया का ऐसा डाकखाना है जो पानी की सबसे अधिक गहराई में स्थित है।

दुनिया में पानी की सबसे अधिक गहराई में स्थित डाकखाना जापान के ‘सुसामी’ में स्थित है। जो वाकायामा प्रीफेक्चर में मछलियों को पकड़ने का मुख्य केंद्र है। इस डाकखाने का रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में भी दर्ज किया गया है। यह डाकखाना लगभग 30 फुट पानी की गहराई के अंदर स्थित है और साल 1999 के बाद से लगभग 32,000 चिट्ठियां प्राप्त कर चुका है।

जापानी लोग प्रकृति से बहुत अधिक ज्यादा लगाव रखतें हैं

जापान के अंदर शिटों धर्म का पालन करने पर काफी जोर दिया जाता है। आप देखेंगे कि जापान के अंदर ज्यादातर लोग प्रकृति के प्रति काफी लगाव महसूस करते हैं और इसके पीछे का कारण है कि शिटों धर्म के अंदर हर चीज प्रकृति से जोड़कर देखी जाती है चाहे वह पर्वत हो या फिर बहुत ऊंचे पहाड़ हों या नदियां हों। इन सभी को धन के रूप में देखा जाता है।

जापान का 69% इलाका जंगल से ढका हुआ है

जब आप जापान के बारे में सोचते हैं तो आपको ऐसा लगता होगा कि जापान के शहर भी दुनिया के अन्य शहरों के जैसे ही होते होंगे। लेकिन आप यह जानकर बहुत ज्यादा आश्चर्य हो सकता है कि जापान का लगभग 69% इलाका जंगल से ढका हुआ है। मुझे अभी भी याद है जब मैंने अपना पहला कदम जापान के अंदर रखा था जो कि जापान के अंदर माउंट फूजी इलाके में था। वहां पर ऐसी चेतावनी लिखी गई थी कि आप बाहर निकलने से पहले काले भालू का ध्यान रखें। मैंने कभी ऐसा सोचा ही नहीं था कि जापान के जंगलों में काले भालू यहां वहां घूमते हुए मिल सकते होंगे।

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जापान के अंदर कई सारे ज्वालामुखी हैं, जो आज भी सक्रिय अवस्था में हैं

यदि संख्या के हिसाब से देखा जाए तो आप जापान के अंदर लगभग 110 सक्रिय ज्वालामुखी मिल सकतें हैं। इनमें से 47 ज्वालामुखी को हर वक्त ध्यानपूर्वक देखा जाता है तथा वैज्ञानिकों के द्वारा उनकी देखभाल की जाती है। जिसके पीछे की मुख्य वजह यह है कि वह किसी भी वक्त लावा का विस्फोट कर सकते हैं।

माउंट फूज़ी, जापान का धार्मिक स्थान है

माउंट फूज़ी जापान का सबसे ऊंचा पर्वत ही नहीं बल्कि एक धार्मिक स्थान भी है, जो कि शिंटू धर्म के लोगों द्वारा एक पवित्र स्थान माना जाता है और यह परंपरा सातवीं शताब्दी से चली आ रही है। जानने योग्य बात यह भी है कि शिंटू धर्म के अनुसार माउंट फूज़ी के कामी (दिव्य व्यक्ति) राजकुमारी कोनोहनसाकुया है। जिनका प्रतीक चेरी ब्लॉसम है।

‘जोमोन काल’ जापान की सबसे पहली सभ्यता मानी जाती है।

जापान के अंदर मिलने वाली सबसे पहली सभ्यता ‘जोमोन काल’ के दौरान पाई गई थी जो कि लगभग 15000 वर्ष पूर्व की बात है। इन्हीं लोगों ने जापान के अंदर मिट्टी के बर्तन बनाने की कला शुरू की थी और इसी कला के नाम पर इनकी सभ्यता का नाम भी पड़ा है। आज भी जोमोन काल की कुछ कलाकृतियां जापान के कई केंद्रों में सुरक्षित रखी गई है। जो उस काल का कलाकारी का एक अद्भुत नमूना है।

जोमोन काल के बाद जापान के अंदर यायोई काल आया

यायोई काल की शुरुआत 300 बीसी में हुई थी। यह जोमोन काल के अंत का भी सूचक है। जो लोग इस काल से संबंध रखते थे, उन्हें बहुत तकनीकी पूर्ण समझा जाता था। इसमें मुख्य रूप से शिल्पकार और कई आधुनिक खेती करने वाले किसान शामिल थे। इस काल के लोग, पिछले काल के लोगों की तुलना में ज्यादा समझदार थे और इन्हीं लोगों ने आगे चलकर चावल की खेती करना प्रारंभ किया था। इसलिए इन्हें ही सबसे पहले चावल का उत्पादन करने वालों के रूप में जाना जाता है। चूंकि यह लोग खेती करना जानते थे और इन्हें चावल उगाने की कला में भी महारत हासिल थी, इसलिए इस काल के लोगों ने अपना पारंपरिक शिकारी तरीका छोड़कर अपने जीवन-यापन करने के सही तरीकों को ढूंढ निकाला। इस वजह से इन लोगों की जनसंख्या में भी तेजी से वृद्धि होती देखी गई।

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जापान का इतिहास लगभग 30000 बीसीई पूर्व का माना जाता है

जापान के इतिहास के विषय में बहुत ज्यादा अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि ऐसा माना जाता है कि कुछ पुराने शिकारियों के गठजोड़ ने मिलकर जापान की खोज लगभग 30000 बीसीई पूर्व की थी। उस समय जापान पुराने एशिया के क्षेत्रों के साथ एक पुल के माध्यम से जुड़ा हुआ था और जिसकी वजह से यह सभी लोग जापान के अंदर पहुंचने में कामयाब हुए थे।

पुर्तगाली लोग जापान के अंदर आने वाले सबसे पहले आने वाले यूरोपियन लोग हैं

जापान के अंदर आने वाले सबसे पहले यूरोपियन लोग पुर्तगाली थे। जो कि सन् 1543 के आसपास जापान में आए थे और वह सबसे पहले जापान के पोर्ट नागासाकी के ऊपर आकर उतरे थे। पुर्तगाली लोगों की यह सबसे पहली यात्रा जापान में नन्बन व्यापार काल की शुरुआत मानी जाती है। जो कि साल 1543 से आरंभ होकर 1614 तक गतिमान रहीं थी। इस काल के दौरान जापानी और पुर्तगाली लोग आपस में मुक्त रूप से व्यापार करते थे और एक दूसरे को माल का आदान प्रदान करते थे। जिसके माध्यम से जापान के लोगों को नई तकनीक और नई सांस्कृतिक धरोहर के साथ रूबरू होने का अवसर प्राप्त हुआ। जिसमें शामिल थे यूरोपियन बंदूकें, यूरोपियन शस्त्रों और यूरोपियन जहाज।
इस काल के दौरान कई अन्य चौंकाने वाले तथ्य भी निकल कर सामने आए। यह ऐसा माना जाता है कि पुर्तगाल के लोगों ने वास्तव में जापान को टेम्पूरा (मछली एवं सब्जियों के साथ बनने वाला एक व्यंजन) से रूबरू करवाया। जो आज के समय में जापान के अंदर सबसे ज्यादा खाए जाने वाले व्यंजनों में शामिल है।

किन्हें कहतें हैं जापान में ‘कारोशी’

यूं तो काम करना सभी को पसंद होता है परंतु यदि आपको कभी जापान जाएंगे तो एक अजीबो-गरीब चीज आपका ध्यान अपनी तरफ केंद्रित जरूर करेगी और वह यह है कि यहां पर हर व्यक्ति अपने काम करने में बहुत ज्यादा कर्मठ रहता है। इसमें भी उन लोगों की संख्या अधिक है जिन्हें वेतन प्राप्त होता है जहां तक स्त्री अथवा पुरुष की बात करें तो दोनों ही इसमें बराबर रूप में अपना योगदान देते हैं। हर रोज सुबह जब काम करने का समय चालू होता है तो आप देखेंगे कि पुरुष और महिलाएं गहरे रंग के कपड़े अथवा सूट पहने हुए, विभिन्न अंडरग्राउंड सबवे में से आते जाते हुए दिखाई देंगे। जिससे कि वह अपने काम पर समय से पहुंच सकें। यहां के लोग समय के बहुत पाबंद होते हैं। यही नजारा देर रात को भी देखने को मिलता है। जब यह वापस अपने घर की तरफ लौट रहे होते हैं। इनमें से कई लोग तो आधी नींद में भी दिखाई दे जाते हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे मानो ये काम करके बुरी तरह से थक गए हो। इतनी बुरी तरह से काम करने से अगर किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो जापान के अंदर ऐसे लोगों को ‘कारोशी’ कहकर पुकारा जाता है। अप्रैल 2019 के अंदर जापान के अंदर नए लेबर कानून लागू कर जिसकी वजह से काम करने के घंटों पर अंकुश लगाया गया है। इसमें यह निर्धारित किया गया है कि एक व्यक्ति 1 सप्ताह के भीतर कितने घंटे काम कर सकता है ताकि लोगों के लंबे समय तक काम करने की आदत को खत्म किया जा सके।

एक समय ऐसा भी था जब जापान पूरी दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ था

जापान के अंदर यूरोपीय संस्कृति का बहुत ज्यादा प्रभाव था जिसका कारण यूरोपीयन लोगों का साल 1543 के आसपास जापान के अंदर आना और यही बस जाना था। लेकिन साल 1635 के बाद से जापान में किसी भी विदेशी का अपनी धरती पर आना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया‌। यह वह समय था जब यदि किसी को यूरोपियन सामान के साथ देखा जाए तो उसे उसी वक्त कठोर दंड दिया जाता था। ‌ इस प्रकार इस कानून को साकोको एडिट के नाम से जाना गया जो लगभग 200 वर्षों तक लागू रहा।

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जापान के समुंद्र को मछलियों के भंडार के रूप में जाना जाता है

जापान के समुंदर में बुलेट ऑक्सीजन की सामान्य सांद्रता से अधिक है जो कई विभिन्न प्रकार की प्रजातियों को पानी में पनपने में सहायता करती है। ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होने की वजह से उनकी संख्या भी बहुत अधिक होती है। जापान के समुंदर में लगभग 3500 से भी अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, जिसमें से 1000 तो केवल मछलियों की प्रजातियां ही हैं। इसी वजह से जापान को मछलियों का घर माना जाता है।

जापान के अंदर एक ऐसा हाईव है जो एक बिल्डिंग के अंदर से होकर गुजरता है

जी हां! आपने बिल्कुल सही पढ़ा जापान के अंदर एक ऐसा हाइवे है जिसका नाम ‘हाशिन एक्सप्रेसवे’ है, जो कि एक बिल्डिंग के अंदर से होकर गुजरता है। यह ‘गेट टावर बिल्डिंग’ के पांचवें, छठें और सातवें तल के अंदर से होकर गुजरता है। इस बिल्डिंग में काम करने वाले लोगों को इस हाइवे के तलों के साउंडप्रूफ होने के कारण पता ही नहीं चलता कि उनकी बिल्डिंग के अंदर से एक हाईवे होकर गुजर रहा है।

जापान के अंदर पाई जाती है ना पिघलने वाली आइसक्रीम

यह थोड़ा सा अटपटा लगने वाला तथ्य हो सकता है क्योंकि आइसक्रीम का पिघलना उसका प्राकृतिक स्वरूप है। लेकिन जापान के अंदर पाई जाने वाली है आइसक्रीम कुछ घंटों के लिए नहीं पिघलती है। इसकी खोज एक तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुई थी‌। उस समय की घटना है जब कुछ वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशाला के अंदर स्ट्रॉबेरी को बनाने के तरीकों को किसानों को समझा रहे थे, जो कि भूकंप के कारण प्रभावित हो गई थी।

जापान के अंदर लोग स्वास्थ्यवर्धक भोजन करना पसंद करते हैं

जापान के लोग पोषक तत्वों से भरपूर और स्वास्थ्यवर्धक खाना खाने के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। उनके द्वारा खाई जाने वाले भोजन को सबसे अधिक स्वास्थ्यवर्धक भी समझा जाता है। इसमें मुख्य रूप से चावल, मछलियां और कई प्रकार की सब्जियां शामिल होते हैं। जापान के अंदर लोग कम तला भुना खाना खातें हैं। जापान में सामान्यतः लोग ऐसा खाना पसंद करते हैं जिसके अंदर विटामिन और खनिज पदार्थों की ज्यादा मात्रा उपलब्ध हो। यही कारण है कि उनके लंबे जीवन की अवधि को उनके खानपान की आदत से भी जोड़कर देखा जाता रहा है।

जापान दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है

हो सकता है कि यह जानने के बाद कि जापान कुछ टापूओं से मिलकर बना हुआ देश है, आपको लगे कि जापान आर्थिक रूप से इतना अधिक समृद्ध नहीं होगा। परंतु आपको जानकर यह हैरानी होगी कि जापान, दुनिया के अंदर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। यह काफी अचंभित करने वाला तथ्य है कि किस प्रकार से पिछले कुछ दशकों के अंदर इस देश ने अपना विकास किया, क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जिस प्रकार से इस का सर्वनाश हो गया था उसके बाद जापान के द्वारा हासिल की गई यह तरक्की दुनिया को चौंकाने के लिए काफी है। आप दुनिया में कहीं भी रहते हों, आप इस बात का अंदाजा आसानी से लगा सकते हैं कि आसपास दिखाई देने वाली गाड़ियों में एक न एक गाड़ी जापान की कंपनी के द्वारा निर्मित की गई जरूर होती हैं और यह इस बात का प्रमाण है कि जापान ऑटोमोबाइल का सबसे बड़ा निर्यातक है। जिसमें होंडा और टोयोटा जापान की दो प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां है।

जापान में जन्म दर सबसे निम्नतम बिंदु पर पहुंच गई है

जापान की जन्म दर आंकड़ों के अनुसार इस समय यह अपने निम्नतम बिंदु पर पहुंच गई है। यह आंकड़े जापान ने 1899 से दर्ज करने शुरू किए थे। जिसका साफ अर्थ यह है कि जापान की जनसंख्या में अभी भी गिरावट हो रही है। देश के ‘राष्ट्रीय जनसंख्या और सामाजिक सुरक्षा अनुसंधान’ संस्थान के अनुसार जापान में लगभग 127 मिलियन लोग निवास करतें हैं, परंतु गिरती हुई जन्म दर को देखते हुए ऐसा अनुमान लगाया गया है कि यदि इसी रफ्तार से जन्म दर गिरती रही तो सन् 2049 तक पहुंचने में जापान की जनसंख्या 100 मिलीयन से भी कम रह जाएगी।

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सन् 2003 से जापान में शुरू हुआ पालतू जानवरों को पालने का चलन और घटित हुई मानवता को शर्मसार करने वाली घटना

साल 2003 की शुरुआत से जापान के अंदर जानवरों को पालने का चलन काफी प्रचलन में आया। साल 2009 खत्म होते- होते, वहां पर पालतू जानवरों की संख्या लगभग 6 मिलियन के आसपास पहुंच गई, जिसमें कुत्ते, बिल्ली एवं अन्य प्रकार के पालतू जानवर शामिल थे। यह संख्या उस वक्त वहां मौजूद बच्चों की संख्या से भी अधिक थी। एक समय के बाद यह चलन अपने आप में काफी खतरनाक साबित होने लगा, जब कुछ ऐसे लोग के बारे में पता चला जो जानवरों को पालने के लिए पूरी तरह से मानसिक और आर्थिक रुप से तैयार नहीं थे परंतु समाज के दूसरे लोगों के साथ तुलना के कारण उन्हें जानवर पालने पड़े। परंतु कुछ समय पश्चात उन्होंने उन पालतू जानवरों को खुले में छोड़ना प्रारंभ कर दिया। इस कारण साल 2010 में जापान के अंदर एक बड़ी निरंकुश घटना घटित हुई जिसमें लगभग 500,000 कुत्तों की हत्या पब्लिक एनिमल मैनेजमेंट सेंटर्स के अंदर कर दी गई। यह वाकई में मानवता को शर्मनाक करने वाली घटना थी।

‘नाची’ जापान का सबसे ऊंचा झरना है

133 मीटर की ऊंचाई से गिरने वाला यह झरना जापान का सबसे ऊंचा झरना है। यह नचिकात्सुरा, वाकायामा प्रान्त में स्थित है। इसे जापान के तीन सबसे सुंदर और बड़े झरनों में से एक माना जाता है। इतना ही नहीं यह ‘कुमानो कोडो’ तीर्थ यात्रा का भी हिस्सा है।

दुनिया का सातवां सबसे लंबा समुद्री किनारा

जापान दुनिया का सातवां सबसे लंबा समुद्री किनारा है। यह ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और अंटार्कटिका को हराकर सातवें नंबर पर है। यदि कुल संख्या के आधार पर देखा जाए तो जापान का समुद्री किनारा लगभग 18,486 मील लंबा है। इस किनारे पर विभिन्न पहाड़ियां और कई प्रकार के पथरीले रास्ते, समुंदर के किनारे बसने वाले गांव और दुनिया के सबसे बड़े मछली पालन केंद्र शामिल भी है।

एक समय था जब जापान में आधी रात के बाद नाचने पर प्रतिबंध लगा हुआ था

यह अपने आप में काफी चौंकाने वाला तथ्य है कि एक समय था जब जापान के अंदर आधी रात के बाद नाचने पर प्रतिबंध लगा हुआ था। यह समय रात को 1:00 बजे से शुरू होता था। जब 1 बजते ही सभी बार, क्लब और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर इसे लागू कर दिया जाता था। परंतु यह कानून सन् 1948 से 2015 तक ही चालू रहा। इस कानून को सबसे पहले द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रयोग में लाया गया था क्योंकि जापान के अंदर ज्यादातर नृत्य करने वाले स्थान अमेरिकन सैनिकों के लिए वेश्यावृत्ति का स्थान बन गए थे।

जापान के अंदर सबसे ज्यादा आधुनिक ट्रेनों का संचालन किया जाता है

जापान के अंदर सबसे ज़्यादा आधुनिक ट्रेनें चलती हैं और यही कारण है कि वह समय से अपने गंतव्य तक पहुंचती हैं। सन् 2017 में ‘सुकुबा एक्सप्रेस’ जो कि टोक्यो और सुकुबा के बीच चलती थी उसने समय से 20 सेकंड पूर्व ही स्टेशन को छोड़ दिया और इसके लिए उसने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी। यह खबर उस वक्त के अखबारों में सबसे मुख्य खबर के तौर पर छापी गई थी।

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जापान एक ऐसा देश है, जहां पर कई प्रकार के मौसम देखने को मिलतें हैं

जापान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह उत्तर से लेकर दक्षिण तक बहुत लंबे रूप में फैला हुआ है। जिस कारण जापान के कई भागों में मौसम बिल्कुल अलग प्रकार का होता है। कुछ शहरों जैसे कि टोक्यो के अंदर मौसम का अंदाज लगभग सुहाना रहता है। जिसका मतलब है कि गर्मियों में गर्म और सर्दियों में हल्का ठंडा। जबकि यदि दूसरे क्षेत्र को देखा जाए जैसे कि होक्काइडो के उत्तरी टापू में तापमान बहुत ही अधिक ठंडा रहता है परंतु गर्मियों के समय यहां का मौसम सुहावना होता है। लेकिन सर्दियां आते ही यह इलाका बर्फबारी से घिर जाता है और तापमान जमने के करीब पहुंच जाता है।

जापान के अंदर पोकेमोन नामक कार्टून करैक्टर के एपिसोड्स को प्रतिबंधित कर दिया गया था

16 दिसंबर 1997 को जापान के टेलीविजन पर दिखाए गए पोकेमोन कार्टून के एक एपिसोड के कारण लगभग 700 बच्चों को स्वास्थ संबंधित समस्याएं उत्पन्न हुई थी। जिसके कारण उन सभी को हॉस्पिटल में भर्ती करवाना पड़ा था। इसके पीछे का मुख्य कारण यह था कि इस एपिसोड में जो दिखाया गया उसका बच्चों के ऊपर इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि वह उसकी नकल करने के चक्कर में उन्होंने खुद को नुकसान पहुंचा दिया था। साथ ही इसका कारण यह भी था कि पोकेमोन उस समय बच्चों के बीच सबसे लोकप्रिय कार्टून माना जाता था।

जापान का राजनीतिक ढांचा

देश के आकार के अनुसार इस देश के अंदर एक अनोखे प्रकार का राजनीतिक ढांचा उपलब्ध है। जिसे आठ अलग-अलग भागों में बांटा गया है और इनके अंदर लगभग 47 छोटी रियासतें हैं। यह सभी 47 छोटी रियासतें मैज़ी काल (1868-1912) से ताल्लुक रखती हैं।

दुनिया का आखिरी शासक

जापान दुनिया का केवल एकमात्र ऐसा देश है जहां पर आज भी शासक के द्वारा शासन किया जाता है। हालांकि जापान के अंदर शासक के पास पहले जितनी शक्तियां उपलब्ध नहीं है और वह केवल एक प्रतीकात्मक रूप से समझे जाते हैं। परंतु जापान की संस्कृतियों में उन्हें आज भी एक गर्व का विषय समझा जाता है। वर्तमान में जापान के शासक का नाम नारूहितो है, जिन्होंने वर्ष 2019 में अपने पिता सम्राट अकिहितो के बाद राजगद्दी संभाली।

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