जानिये काली-मिर्च से होने वाले ये 27 सेहत के फायदे

0
34
kali mirch

हम अपने ज़्यादातर व्यंजनों में नमक का उपयोग करते हैं, और काली मिर्च के इस्तेमाल को अधिकतर भूल जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, काली मिर्च से होने वाले फ़ायदे नमक से भी कहीं ज्यादा हैं। काली मिर्च ना केवल आपके खाने का स्वाद बढ़ाती हैं, अपितु उसे स्वास्थ्य के लिए और ज़्यादा लाभदायक भी बनाती है। कैसे?? यह वात और कफ को नष्ट करती है और शरीर में शुगर की मात्रा नियंत्रित करती है। यह भूख बढ़ाती है, भोजन को पचाती है, लीवर को स्वस्थ बनाती है। यह कैंसर से बचाव करती है और दर्द तथा पेट के कीड़ों को खत्म करती है। यह पेशाब की मात्रा को नियंत्रित करती है और खांसी की रोकथाम करती है। इसके इतने फायदे हैं कि आपको पूरा लेख पढ़ना चाहिए जिससे आपको इसके कई गुणों के बारे में पता चलेगा।

Table Of Contents

पाचन क्रिया के संतुलन में फायदेमंद 

काली मिर्च आपके पाचन रस और एंजाइम को उत्तेजित करती है, जिससे पाचन क्रिया को सहायता मिलती है। यह सच है कि जब कभी आप कालीमिर्च का सेवन करते हैं, खासकर के भोजन के साथ, तो यह आपके शरीर के पाचन तंत्र की क्षमता को भी बढ़ाती है। शोध से यह भी पता चला है कि काली मिर्च अग्नाशयी एंजाइमों (पैंक्रियास के एंजाइम) पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे पाचन क्रिया पूरी होती है।

कैंसर के खिलाफ लड़ाई को और प्रभावशाली बनाना

वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि काली मिर्च में मौजूद पिपेरिन नामक तत्व कैंसर के कई रूपों के खिलाफ आपके शरीर को सुरक्षात्मक कवच प्रदान करता है। पिपेरिन आपकी आंतों में सेलेनियम, बीटा-कैरोटीन और बी विटामिन जैसे अन्य पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाता है। यह वह पोषक तत्व हैं, जो आपके स्वास्थ्य और कैंसर की रोकथाम के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। एक अन्य अध्ययन के अनुसार, काली मिर्च के एंटी कैंसर गुणों का श्रेय पिपेरिन को दिया गया है। यह कोलन कैंसर को रोकने में भी मदद करता है। प्रोटेस्ट कैंसर जैसे मामलों में भी इसके गुण चमत्कारी हैं और सिर्फ इतना ही नहीं प्रोटेस्ट के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली कीमोथेरेपी दवा डॉकटेक्सेल, की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए भी पिपेरिन का इस्तेमाल किया जाता है।

रक्तचाप के नियंत्रण में काली मिर्च फायदेमंद

रिपोर्ट से यह पता चलता है कि पिपेरिन जानवरों में रक्तचाप के स्तर को कम कर सकता है। इसी कारण यह उम्मीद की जाती है कि मनुष्यों पर भी इसका प्रभाव कुछ ऐसा ही देखने को मिलेगा। एक अन्य अध्ययन में यह कहा गया है कि यदि पिपेरिन का उपयोग किया जाए तो यह रक्तचाप में हुई वृद्धि को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

काली मिर्च अधिक मोटापे के नियंत्रण में कारगर

वैज्ञानिक अध्ययनों से यह पता चलता है कि काली मिर्च में पिपेरिन एक ऐसा तत्व है, जो वसा कोशिकाओं के गठन से लड़ता है। यह आपको अपने वजन घटाने के लक्ष्यों की ओर थोड़ा तेजी से आगे बढ़ाने में आपकी मदद करता है। यदि आप अपने खाने में एक चम्मच काली मिर्च का प्रयोग करेंगे, तो आप अपने वजन पर कण्ट्रोल पा सकते हैं. एक चम्मच काली मिर्च में लगभग 8 कैलोरी होती है। आप अपने मनपसंद चिकन सलाद पर एक चम्मच काली मिर्च और एक नींबू निचोड़कर खाएं। या ना सिर्फ आपके सलाद का स्वाद बढ़ाएगी अपितु आपके शरीर में मोटापा होने अर्थात फैट जमने से भी बचाएगी।

kali mirch

काली मिर्च खांसी में लाभदायक

काली मिर्च का उपयोग पुरानी चीनी चिकित्सा में सर्दी-खांसी से बचाव के लिए किया जाता था। काली मिर्च, परिसंचरण और श्लेष्म प्रवाह को उत्तेजित करने के लिए जानी जाती हैं और जब आप इसका सेवन शहद के साथ करते हैं, तो इसका प्रभाव और बढ़ जाता है, क्योंकि शहद प्राकृतिक कफ निरोधक के रूप में काम करता है। करीब करीब 200 मिली गाय के दूध में 2 ग्राम काली मिर्च के चूर्ण को पकाकर पिलाने से खाँसी में लाभ होता है। यदि खाँसी बार-बार उठती हो एवं भोजन निगलने में कष्ट हो तो दिन में 2-3 बार काली मिर्च के काढ़े से कुल्ला करें। काली मिर्च के चूर्ण के 2 भाग, पीपली चूर्ण के 2 भाग, अनार की छाल के 4 भाग तथा जौ के एक भाग को एक साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इसमें 8 भाग गुड़ मिलाकर 1-1 ग्राम की गोलियाँ बना लें। इसे दिन में तीन बार सेवन करने से कष्टदायक खाँसी में जल्दी ही लाभ होता है।

आँखों की बीमारी में फायदेमंद काली मिर्च

काली मिर्च को दही के साथ पीसकर आंखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी में लाभ होता है। हालांकि यह ज़रूरी है कि इसे बेहद सावधानीपूर्वक बाहर-बाहर ही लगाएं। आँखों की रौशनी बढ़ाने के लिए भी काली मिर्च फायदेमंद है। रोजाना सुबह आधा से 1 ग्राम तक काली-मिर्च में 1 चम्मच घी तथा आवश्यकतानुसार मिश्री मिलाकर चाटें। बाद में 1 गिलास दूध पीएं। इससे आंखों की बीमारी में लाभ होता है। यदि किसी की आँखों की पलकों पर अगर फुंसी हो जाए तो काली मिर्च को पानी में घिसकर लेप करने से फुंसी पककर फूट जाती है। काली मिर्च के आधे ग्राम चूर्ण को लगभग एक चम्मच देशी घी में मिलाकर नित्य एक बार खाने से अनेक प्रकार के नेत्र रोगों में फायदा होता है।

काली मिर्च दमा मरीजों के लिए गुणकारी

काली मिर्च दमा के लक्षणों को भी कम कर सकती हैं। त्रिनिदाद में एक विशेष देखभाल वाली सुविधा में रखे गए दमा के रोगियों पर किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया कि रोगियों को काली मिर्च का सेवन कराने से उनकी स्थिति में ज्यादा सुधार हुआ है। काली मिर्च श्वसन पथ को साफ करती है और अन्य श्वसन रोगों जैसे की खांसी को दूर करती है।

काली मिर्च से बार बार इन्फेक्शन से छुट्टी

काली मिर्च संक्रमण और रोगों को फैलने से रोकने में काफी मदद करते हैं। काली मिर्च के जीवाणुरोधी गुण, संक्रमण के विरुद्ध शरीर की अच्छी रोकथाम करते हैं। सीजनल फ्लू, सर्दी जुकाम तथा वायरस-जनित रोगों से बचाव के लिए खाने में प्रचुर मात्रा में काली मिर्च का सेवन करना चाहिए.

काली मिर्च दस्त और पेट दर्द के इलाज में फायदेमंद

लगभग एक भाग काली मिर्च की चूर्ण तथा एक भाग भुनी हींग को अच्छी तरह पीस लें। इसमें दो भाग शुद्ध देशी कपूर मिलाकर 125 मि. ग्राम (1/8 ग्राम) की गोलियाँ बना लें। इसे आधे घंटे के अंतर से 1-1 गोली देने से लाभ होता है।

काली मिर्च इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करती है

काली मिर्च में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा बहुत प्रभावशाली होती है। यह आपके स्वास्थ्य में कई तरीकों से योगदान करते हैं। एंटीऑक्सीडेंट रोग पैदा करने वाले मुक्त कणों से लड़ते हैं और शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाते हैं। शरीर की इम्युनिटी अच्छी होने पर ही शरीर रोगों से लड़ कर पुनः स्वस्थ हो सकता है. इम्युनिटी के अभाव में बहुत सारी खतरनाक किस्म की बीमारियाँ (जैसे कैंसर आदि) लग सकती हैं।

शरीर की मांसपेशियों में सूजन से राहत

कुछ मालिश मिश्रणों में काली मिर्च का उपयोग मुख्य अवयवों के रूप में होता है। काली मिर्च में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जो शरीर की मांसपेशियों की सुजन को कम करने में मदद करते हैं।

kali mirch

दांत और मसूड़ों के लिए काली-मिर्च रामबाण

दांत के दर्द में लगने वाली दवा, पिपेरिन के जीवाणुरोधी गुणों के कारण, सामान्यता दांत के दर्द में दिऐ जाने वाले तेल में काली मिर्च का उपयोग होता है। अन्य मौखिक संक्रमणों से भी काली मिर्च आपको काफी राहत दिला सकती है। काली मिर्च में सूजन-विरोधी गुण भी होते हैं, जो मसूड़ों की सूजन का इलाज करने में बहुत मददगार साबित होते हैं। यदि आप दांतो के दर्द से परेशान हैं, तो नमक के साथ काली मिर्च मिलाकर इस्तेमाल करने से आपको काफी राहत मिल सकती है। मसूड़ों के दर्द के लिए भी आप पानी में नमक और काली मिर्च की समान मात्रा में मिलाएं और मिश्रण को अपने मसूड़ों पर लगाने से आपको अद्भुत प्रभाव प्राप्त होंगे। सेंधा नमक, काली मिर्च, शहद तथा नींबू के रस को मिला कर तालू पर लेप करने से मुँह के छाले में लाभ होता है।

काली मिर्च मस्तिष्क के स्वास्थ्य में मददगार

काली मिर्च का मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर बहुत प्रभाव पड़ता है। काली मिर्च में मौजूद पिपेरिन एक ऐसे इंजाईम (सेरोटोनिन) को रोकता है जो मनःस्थिति को शांत करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर को तोड़ता है। यह मेलाटोनिन नामक एक अन्य हार्मोन के कामकाज की भी देखरेख करता है- जो नींद/जागने के चक्र को नियंत्रित रखता है। यह मस्तिष्क में तंत्रिका तंत्र की गतिविधि को बढ़ाती है और तंत्रिका कोशिकाओं की रक्षा भी करती है। इसके अलावा काली मिर्च स्ट्रोक (लकवा मार जाना) रोगियों में भी लाभकारी प्रभाव दिखाती है।

तेजी से बढ़ती उम्र को लगाम देना

काली मिर्च मस्तिष्क की बढ़ती उम्र को भी रोकने में मदद करती है और अल्जाइमर जैसी खतरनाक बीमारी को रोकने में भी काफी मददगार साबित हो सकती है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं में होने वाली दैनिक क्षति को कम करते हैं तथा टूट-फूट की समय पर मरम्मत करते हैं और इसकी वजह से उम्र बढ़ने की गति नियंत्रण में रहती है. ये एंटीऑक्सीडेंट, शरीर में उपस्थित मुक्त कणों से लड़ते हैं, जो उम्र बढ़ने के संकेतों को देते हैं और आपकी त्वचा को एक से अधिक तरीकों से नुकसान पहुंचाते हैं। काली मिर्च आपको समय से पहले बूढ़ा होने के लक्षणों से बचाती है जिसमें झुर्रियां, महीन लाईनें, यहां तक कि काले धब्बे भी शामिल हैं। यदि आप अपनी त्वचा को अधिक समय तक जवां दिखाना चाहते हैं तो आपको बस अपने दैनिक आहार में काली मिर्च को शामिल करना है आप चाहे तो एक चम्मच काली मिर्च को समान मात्रा में शहद या हल्दी के साथ मिलाकर इसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर एक पेस्ट बना लें और दिन में दो बार अपने चेहरे में मास्क के रूप में लगाएं। चेहरे में आए फर्क को आप स्वयं महसूस करेंगे।

सिगरेट की लत छोड़ने में सहायक काली मिर्च

अध्ययनों से पता चलता है कि काली मिर्च के पानी की वाष्प को लेने से धूम्रपान छोड़ने की आदतों में सुधार लाया जा सकता है। सिगरेट की तलब को भी काफी कम किया जा सकता है, यदि काली मिर्च की वाष्प को नियमित रूप से ली जाए।

पेट के रोगों में फायदेमंद काली मिर्च का उपयोग

2-3 ग्राम काली मिर्च के चूर्ण को 1 कप छाछ के साथ सुबह खाली पेट लेने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं। 8-10 काली मिर्च को 5-7 ग्राम शिरीष के पत्तों के साथ पीसकर छान लें। इसे पीने से गैस के कारण होने वाले पेट दर्द और पेट फूलने में आराम मिलता है। एक कप पानी में आधा नींबू निचोड़ लें और 5-6 काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर भोजन के बाद सुबह-शाम पीने से पैट की गैस में लाभ होता है। काली मिर्च में पेट को फूलने से रोकने के औषधीय गुण भी होते हैं। यह पेट को गैस से राहत दिलाने में मदद करती है काली मिर्च के साथ यदि आप अपने भोजन को करने की आदत डालें तो आप पेट फूलने जैसी बीमारी का इलाज घर बैठे कर सकते हैं।

भूख बढ़ाने में काली मिर्च फायदेमंद

कालीमिर्च में आयुर्वेद के अनुसार ऐसे गुण होते है जो कि शरीर के पोषण को बढ़ावा देते है विशेष रूप से पाचकाग्नि का बढ़ा कर शरीर को पोषण देने में काली मिर्च बहुत फायदेमंद है। काली मिर्च के बारीक चूर्ण के साथ बराबर भाग सोंठ, पीपली, जीरा और सेंधा नमक मिला लें। अब इस चूर्ण को लगभग 1-1 ग्राम की मात्रा में, भोजन के बाद गर्म जल के साथ लेने से अपच तथा बदहजमी में लाभ होता है। काली मिर्च, सोंठ, पीपल तथा हरड़ चूर्ण मिलाकर शहद के साथ देने से अथवा इसके काढ़े को पीने से अपच ख़त्म होती है, भूख बढ़ती है तथा पैट की गैस में लाभ होता है।

black pepper

डायबिटीज के इलाज में काली मिर्च की भूमिका

काली मिर्च में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट रक्त में मौजूद शर्करा के स्तर को स्थिर रखने में बहुत मददगार साबित होते हैं। वे हाइपरग्लाइसीमिया (रक्त में अधिक शुगर) को नियंत्रित करते हैं, जिससे मधुमेह के उपचार में सहायता मिलती है। 2013 के एक अध्ययन ने यह साबित किया है कि काली मिर्च का तेल दो ऐसे एंजाइम्स को रोकता है जो स्टार्च को तेजी से तोड़ते हैं और मधुमेह के लक्षणों को बदतर बनाते हैं। काली मिर्च का सेवन ग्लूकोस के अवशोषण में कमी ला सकता है। पिपेरिन को जैव-बढ़ाने वाले एजेंट के रूप में मेटफोर्मिन (डायबिटीज की एक दवा) के साथ लिया जा सकता है। यह मेत्फ़ोर्मिन की खुराक को कम करने के साथ ही साथ मेटफोर्मिन से होने वाले दुष्प्रभावों को भी कम करने में मदद कर सकता है।

गठिया का दर्द कम करे काली मिर्च का औषधीय गुण

गठिया (आर्थराइटिस) एक सामान्य समस्या हो गयी है। गठिये की बिमारी में शरीर की हड्डियों और जोड़ों में असहनीय दर्द हो सकता है। गठिये के दर्द को कम करने में कालीमिर्च एक अच्छा उपाय है, क्योंकि कालीमिर्च में आयुर्वेद के अनुसार वात को कम करने का गुण होता है। जिसके वजह से गठिया का दर्द कम होने में मदद मिलती है। आयुर्वेद में गठिया को वात प्रधान रोग माना जाता है।

काली मिर्च त्वचा की हेल्थ अच्छी बनाती है

बहुत से लोग काली मिर्च का उपयोग अपनी त्वचा को एक्सफोलिएट करने और मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने के लिए स्क्रब के रूप में करते हैं। ऐसा करने से आपकी त्वचा अधिक चिकनी और नरम बन जाती है। इसके लिए आपको आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर, एक चम्मच दही लेना है और इसे अपने चेहरे पर लगाकर 20 मिनट के बाद धो लेना है। यह एक ऐसा स्क्रब है, जो आपकी त्वचा को एक्सफोलिएट करने के लिए काफी मददगार साबित होगा। यह आपकी त्वचा से विषाक्त पदार्थ को हटाने में मदद करेगा और साथ हीआपकी त्वचा को अधिक नर्म और उज्जवल बनाएगा। काली मिर्च रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देने में भी मदद करती है। जिससे आपकी त्वचा को अधिक ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलता है। यह मुंहासों को रोकने में भी काफी कारगर सिद्ध हुई है। विटिलिगो एक ऐसी समस्या है जिसमें त्वचा अपनी प्राकृतिक रंजकता खोकर उस क्षेत्र पर सफेद रंग की हो जाती है‌। यह एक तरह का त्वचा रोग है। इसके लिए कई अलग-अलग उपचार हैं। लेकिन उनमें से अधिकांश उपचारों में कठोर रसायनों का उपयोग किया जाता है। परंतु यदि आप चाहें तो काली मिर्च को भी इस रोग के इलाज के लिए प्रयोग में ला सकते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार काली मिर्च में पाया जाने वाला पिपेरिन रसायन इस तरह के रोगों से लड़ने के लिए एक सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प है।

काली मिर्च डैंड्रफ के खिलाफ प्रभावशाली

अगर आप डैंड्रफ की समस्या से परेशान हैं तो काली मिर्च इसका सबसे अच्छा इलाज है। एक कटोरी में दही और एक चम्मच पिसी हुई काली मिर्च मिलाएं और इसे अपने स्कैल्प पर लगाएं। 20 मिनट के लिए इस मिश्रण को यूं ही लगा हुआ छोड़ दें और फिर पानी से सिर को धों लें। शैंपू का उपयोग ना करें। यदि आप चाहें तो अगले दिन शैंपू का प्रयोग कर सकते हैं, क्योंकि इतने समय में इस मिश्रण को रूसी पर काम करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। परंतु यह लेप बनाते समय यह याद रखें कि काली मिर्च को अधिक मात्रा में इस्तेमाल ना करें, वरना आप की खोपड़ी में जलन हो सकती है।

बालों के स्वास्थ्य में काली मिर्च लाभकारी

एक चम्मच नींबू का रस और काली मिर्च के बीजों को लेकर अपने बालों पर लगाएं। यह आपके बालों को पुनर्जीवित करेगा और आपके बालों को अधिक चमकदार और मुलायम बनाएगा। यह मिश्रण आपको अपने बालों पर 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ना है और उसके बाद ठंडे पानी से धो देना है।

लिवर के स्वास्थ्य को बढ़ाने में सहायक

काली मिर्च के औषधीय गुण यकृत (लिवर) की शक्ति में इजाफ करते हैं। भोजन को पचाने में लिवर में बनने वाले पित्त का महत्वपूर्ण योगदान होता है। साथ ही साथ लिवर शरीर से कई विषैले पदार्थों के उत्सर्जन का भी कार्य करता है। ऐसे में काली मिर्च का सेवन लिवर को मजबूत बनाता है और शरीर को दुष्प्रभावों से बचाता है।

kali mirch

काली मिर्च के सेवन से बवासीर में फायदा

बवासीर के इलाज में भी काली मिर्च का रोल है। दो ग्राम काली मिर्च चूर्ण, 1 ग्राम भुना जीरा, 15 ग्राम शहद को मिला लें। दो बार छाछ के साथ या गर्म जल के साथ सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है। काली मरिच चूर्ण 25 ग्राम, भुना जीरा चूर्ण 35 ग्राम और शुद्ध शहद 180 ग्राम को आपस में मिला लें। इसे अवलेह (चटनी) बनाकर रखें। इस अवलेह को 3 से 6 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार सेवन करें। इससे बवासीर में फायदा होते देखा गया है। काली मिर्च और जीरे के मिश्रण में सेंधा नमक मिला लें और दिन में दो बार छाछ के साथ सेवन करते रहने से बवासीर में आराम मिलता है। इससे कमजोरी या वृद्धावस्था के कारण हुए बवासीर या गुदभ्रंश (काँच निकलना) ठीक होते हैं। एक ग्राम काली मिर्च चूर्ण को शहद के साथ दिन में तीन बार प्रयोग करने से गुदा का बाहर निकलना बंद हो जाता है।

मूत्र-रोग में काली मिर्च के लाभ

एक ग्राम काली मिर्च और बराबर मात्रा में खीरा या ककड़ी के बीज को 10-15 मिली पानी के साथ पीस लें। इसे छानकर पिलाएं। यदि स्वाद अच्छा न लगे तो थोड़ी चीनी मिला लें। इससे पेशाब में जलन तथा पेशाब में दर्द आदि की परेशानी में लाभ होता है।

नपुंसकता दूर करने में काली मिर्च फायदेमंद

एक गिलास दूध में 8-10 काली मिर्च को डाल लें। इसे अच्छी तरह उबालकर, सुबह-शाम नियमपूर्वक सेवन करने से कई तरह के वीर्य विकार ठीक होते हैं और नपुंसकता के रोग में भी फायदा होता है।

कमजोरी और उदासीनता दूर करे काली मिर्च

कमजोरी आलस्य, उदासीनता आदि दूर करने के लिए काली मिर्च के 4-5 दाने, सोंठ, आधा इंच दालचीनी, 4-5 लौंग और 4-5 इलायची थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिला लें। इसे २ कप दूध दाल कर चाय की तरह उबाल लें। इसमें थोड़ी शक्कर मिलाकर पीने से शरीर की उर्जा बढ़ती है और कमजोरी एवं उदासीनता दूर करने में लाभ होता है।

Leave a Reply