ओ.सी.डी. (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) के लिए जानिये 20 उपाय

0
31
Obsessive Compulsive Disorder
Table Of Contents

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर या फिर ओसीडी (मनोग्रसित-बाध्यता विकार) यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जो व्यक्ति के मस्तिष्क में एक ही जैसे विचारों को जन्म देती है। साथ ही इन विचारों की विशेषता यह होती है कि वह आपके मस्तिष्क को निरंतर वही कार्य बार-बार करने का आग्रह करते हैं। सरल शब्दों में, एक ओसीडी मस्तिष्क आपको निरंतर यह विश्वास दिलाता रहता है कि भविष्य में आने वाले विनाशकारी परिणामों से बचने के लिए आपको एक तर्कहीन कार्य करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए ओसीडी से ग्रस्त कई लोग कीटाणुओं से बचने के लिए अपने हाथों को जरूरत से अधिक बार धोते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यही एक तरीका है जो उन्हें भविष्य में होने वाली एक लाइलाज बीमारी से बचा सकता है। ओसीडी विभिन्न प्रकार के रूप ले सकता है और यह ‘हाथ धोने’ जैसे कार्य से भी कहीं अधिक खतरनाक ख्यालों को जन्म दे सकता है, जैसे कि प्रतिदिन 95 बार से भी ज्यादा पूजा या प्रार्थना करना सिर्फ इस ख्याल की वजह से कि यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनके परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु हो जाएगी। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अधिकांश लोग कुछ सामान्य से नियमों का पालन अपनी दिनचर्या में करते हैं जैसे कि जल्दी जागना या दिन में दो बार ब्रश करना, लेकिन ये जरूरी नहीं कि इस आदत को ओसीडी मान लिया जाए। एक आदत एक ओसीडी का रूप तब ले लेती है जब इसका प्रतिरोध चिंता का कारण बन जाता है, और यह किसी के जीवन की सामान्य दैनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करना शुरू कर देती है।

ओ.सी.डी. समय के साथ और खराब हो सकती है, खासकर अज्ञानता और उचित उपकार की कमी के कारण। कभी-कभी तो ओ.सी.डी. के गंभीर मामलों में मरीज को घर के अंदर ही बंद करके रखना पड़ता है, ताकि वे अपने आप को कुछ ऐसा नुकसान ना पहुंचा लें जिसके लिए बाद में सिर्फ पछतावा रह जाए। इसके अतिरिक्त ओसीडी अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों के लिए भी रास्ता खोल देती है, जैसे कि चिंता, सामाजिक चिंता, अलगाव की चिंता और कभी-कभी खतरनाक अटैक्स (हार्ट अटैक या ह्रदयाघात एवं ब्रेन अटैक या स्ट्रोक या दिमागी दौरा)। जो लोग ओ.सी.डी. की बीमारी से ग्रस्त होते हैं उन्हें कई अपने इस बाध्यकारी व्यवहार के कारण बहुत शर्मिंदगी का भी सामना करना पड़ता है, क्योंकि उनके यह व्यवहार अधिकतर अतार्किक होते हैं। यह शर्मिंदगी लोगों को उनकी बीमारी छुपाने में कारण बन जाती है, जिससे कि इस बीमारी को और अधिक समय मिल जाता है और यह उस इंसान की स्थिति बद से बदतर बना देती है।

ओ.सी.डी. के कारण

हालांकि ओ.सी.डी. होने के सटीक कारण तो आज दिन भी अज्ञात हैं, परंतु फिर भी कुछ ऐसे कारणों का पता चला है जिनको हम ओसीडी होने का कारण मान सकते हैं –

• अनुवांशिक और वंशानुगत कारण
• मस्तिष्क में होने वाली कार्यात्मक और संरचनात्मक असामान्यताएं (फंक्शनल और स्ट्रक्चरल एब्नार्मेलिटीज)

इनके अलावा वह व्यवहार भी ओसीडी होने के लिए जिम्मेदार हैं जो इंसान अपनी चिंता को शांत करने के लिए बार-बार करके दोहराता है।

ओ.सी.डी. के सामान्य लक्षण

• कीटाणुओं के इन्फेक्शन से बचने के लिए किसी से भी हाथ मिलाने तक से बचना
• अत्यधिक परफेक्शन (पूर्णतावादी होना)
• निंदात्मक विचार रखना
• हाथों की को दिन में कई बार बेवजह धोना
• ताले, कुण्डियाँ, गैस उपकरण, बिजली के स्विच और सुरक्षा से जुड़े अन्य उपकरणों की कई-कई बार जांच करना
• “मानसिक रूप” से अच्छे और बुरे स्थानों और संख्याओं के मानसिक विचारों का निर्माण करना
• अत्यधिक प्रार्थना करना
• समरूपता के साथ एक विशेष डिजाइन में वस्तुओं को रखना
• वस्तुओं को एक निश्चित संख्या में छोड़ना या फिर उन्हें एक विशेष तरीके से स्थानांतरित करना

ओ.सी.डी. के मुख्य तीन भाग 

ओ.सी.डी. के मुख्य रूप से तीन भाग होते हैं.

  • आप क्या सोचते हैं (आब्सेशन)
  • आप कैसा महसूस करते हैं
  • आप कैसे बर्ताव करते हैं (कम्पल्शन)

आप क्या सोचते हैं (आब्सेशन)?

  • अजीब विचार- एक शब्द, वाक्य या ध्वनि जो बुरी लगती हो, परेशान करती हो अथवा ईर्ष्या या निन्दापूर्ण हो। आप उसको न सोचने की कोशिश करते हैं लेकिन आप ऐसा कर नहीं पाते। आप चिन्ता करते हैं कि आप को कोई संक्रमण (कीटाणु, धूल या एच आई वी द्वारा या कैंसर) न हो जाय या आपकी लापरवाही से किसी को नुकसान हो सकता है।
  • दिमाग में परेशान करने वाली तस्वीरें – जो दिखाती हैं कि आपके परिवार में किसी की म्रृत्यु हो गयी है, या आप उग्र व्यवहार कर रहे है, या आपका कोई दर सत्य साबित हो गया है । सेक्स सम्बन्धी जो आपके व्यक्तित्व से मेल न खाती हो, गालियाँ देते हुए या किसी को मारते हुए या धोखाधड़ी करते हुये।
  • शंकाएं और संदेह- आप सदा विस्मित रहते कि कही आपसे कोई एक्सीडेंट तो नही हो गया या परिवार में किसी का एक्सीडेंट तो नहीं हो गया. या आप चिन्तित रह सकते हैं कि आपने अपने घर की खिड़की और दरवाजे खुले छोड़ दिये हैं।
  • अत्यधिक चिन्तायें- आप अपने आप से लगातार बहस करते हैं कि इस कार्य को करुँ या उस कार्य को करुँ। इस प्रकार आप छोटा सा निर्णय भी नहीं कर पाते।
  • पूर्णतावाद – दूसरे लोगों की अपेक्षा आप ज्यादा परेशान हो जाते हैं यदि चीजे बिल्कुल सही ढंग से सही अनुपात में या सही जगह पर न हो। उदाहरण के लिए अगर किताबें अलमारी ठीक ढंग से न रखी हों।

घबराहट जो आप महसूस करते है (भावनायें)

  • आप तनावग्रस्त, परेशान, भयभीत, अपराधबोध से ग्रसित या दुखी महसूस करते हैं
  • कम्पल्सिव कार्य या कर्मकांड करने के बाद आप थोडा बेहतर महसूस करते हैं लेकिन यह भावना अधिक समय नहीं रहती ।

आप क्या करते है (कम्पलशन)?

  • आब्सेशन को सुधारने के लिए आप के मन में जबरदस्ती वैकल्पिक विचार आते हैं जैसे बार-बार प्रार्थना करना या किसी विशेष शब्द को पढ़ना।
  • कर्मकांड (प्रथा) – आप अपने हाँथ बार-बार धोते है, काम को सावधानीपूर्वक और धीरे-धीरे करते हैं चीजों को व्यवस्थित करते है और किसी कार्य को कुछ विशेष तरीके से करते हैं। आप किसी कि कुशलता पता करने के लिए बार बार फ़ोन करते हैं. आप बार बार किसी का कमरा तलाशते हैं क्योंकि आपको लगता है कि आपसे कुछ गलत छुपाया जा रहा है. आपको कही जाने और किसी कार्य को सफलपूर्वक करने में अत्यधिक समय लगता है।
  • जाँच – आप बार बार जांच करते हैं कि हाथ साफ़ हैं या नहीं, फर्श साफ़ है या नहीं, परिवार वाले सुरक्षित हैं या नहीं, घर में ताले बन्द हैं अथवा सफर का रास्ता सुरक्षित है या नही, इत्यादि.
  • परहेज – आप उन गतिविधियों का परहेज करते हैं जो चीज आपको बुरे विचारों की याद दिलाये। आप परहेज करते है किसी चीज को छूने से, कुछ विशेष स्थानो पर जाने से, कोई खतरा मोल लेने से, या कोई जिम्मेदारी लेने से । उदाहरण के लिए आप रसोईघर में नहीं जाना चाहते क्योंकि आप जानते हैं कि वहाँ चाकू दिखेगा, या आप पीछे कि खिड़की नहीं खोलेंगे क्योंकि आपको आपके पडोसी का चेहरा दिखेगा और आपका दिन नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकता है।
  • व्यर्थ वस्तुएं एकत्रित करना – निरर्थक और खराब वस्तुएँ इकठा करना एक सामान्य कम्पल्शन है. आप कुछ भी चीज फेक नहीं पाते हैं क्योंकि आप हर चीज़ को किसी ख़ास विचार से जोड़ कर रखते हैं.
  • आश्वासन – आप दूसरों से बार-बार पूछते हैं कि सब कुछ ठीक है या नही।

ओसीडी पर ध्यान देने की आवश्यकता क्यों है?

चौंकाने वाली बात यह है कि हर 25 वयस्कों में से 1, ओसीडी से पीड़ित है, जो दुनिया की कुल आबादी के अनुसार लगभग 2.5 मिलियन लोगों का आंकड़ा बनाता है। मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करने में लोगों को अक्सर शर्मिंदगी महसूस होती है, क्योंकि हमारे समाज में मानसिक स्वास्थ्य को सीधा पागलपन से जोड़ा जाता है इसलिए अक्सर लोग इस प्रकार की चिकित्सीय मदद प्राप्त करने से बचते हैं। इसके अलावा, ओसीडी से पीड़ित कई लोग अपराधबोध और अकेलेपन का अनुभव करते हैं, जो उन्हें चिकित्सा सहायता लेने से भी रोकता है। ज्यादातर लोग, इस कारण, अकेले ही ओ.सी.डी. की लड़ाई लड़ते हैं, जब तक कि लक्षण गंभीर ही नहीं बल्कि बहुत गंभीर होने लगतें हैं।

ओ.सी.डी. के इलाज में चिकित्सकीय परामर्श और इलाज के साथ साथ आपके मनोबल का ऊँचा होना बहुत आवश्यक है. आज हम आपको यहां कुछ ऐसे उपाय बताएंगे, जिनका उपयोग आप स्वयं पर या किसी ऐसे व्यक्ति की मदद करने के लिए कर सकते हैं, जिसे आप प्यार करते हैं और साथ ही जिनको इसकी जरूरत है।

प्रत्येक विचार को कैसे देखें?

  • क्या प्रमाण है कि यह विचार सत्य है या असत्य ?
  • इस विचार की क्या उपयोगिता है ?
  • इस विचार को देखने का दूसरा तरीका क्या है?
  • इस विचार का सबसे अच्छा / सबसे बुरा / सबसे वास्तविक परिणाम क्या है ?
  • मैं ऐसी हालत में अपने मित्र (जिसको मेरी जैसी समस्या है) को क्या सलाह दूंगा/दूंगी ?
  • अगर यह सलाह उस सलाह से भिन्न है तो मुझे भिन्न क्या बनाता है ?

काग्निटिव-बिहेवियरल थिरैपी (सी.बी.टी.) आपको यह निर्णय लेने में मदद करेगी कि किन विचारों को आप बदलना चाहते है। और नये विचार जो ज्यादा वास्तविक है को बनाने में मदद करेगी।

उपाय 1. पैटर्न को पहचानना और लिखना आवश्यक

एक कलम और एक पैड हमेशा अपने आसपास रखें और अपने सभी बाध्यकारी विचारों को लिखने का प्रयास करें। मस्तिष्क द्वारा आग्रह किए जाने वाले उन दोहराए जाने वाले व्यवहारों को लिखने से ऐसे लक्षणों की पहचान और नियंत्रण दोनों करने में मदद मिलती है। बार-बार लिखने से आपका मस्तिष्क धीरे-धीरे उन विचारों को याद रखने की शक्ति खो देता है, साथ ही आप ऐसे विचारों के बार-बार आने की आदत पर एक जांच रख सकतें हैं। इसके अलावा, किसी भी विचार को लिखने में, सोचने से अधिक प्रयास शामिल होते हैं, जिसके कारण वे विचार जल्द ही गायब हो जाते हैं आप पहले ही लिख चुके हैं।

उपाय 2. अपने डर को चुनौती दें

जैसा कि कहा गया है, अपने डर पर विजय पाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप उनका सामना करें। अपने डर से लड़ने की यह तकनीक, जिसे चिकित्सकीय शब्दों में एक्सपोज़र और रिस्पांस प्रिवेंशन (ईआरपी) कहा जाता है, ओसीडी (मनोग्रसित-बाध्यता विकार) को ठीक करने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक साबित हुई है। इस प्रक्रिया के दौरान आप अपने आपको उन विचारों या स्थितियों का सामना करवाते हैं, जो आपके जुनूनी व्यवहार को ट्रिगर करते हैं, परंतु इस स्थिति में आप उन्हें प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। 1960 में विक्टर मेयर ने अपने दो मरीजों (जिन्हें ऑब्सेसिव कम्पलसरी डिसऑर्डर के गंभीर मामले में पीड़ित पाया गया था) पर इस तकनीक का परीक्षण किया था। रोगियों में से एक को सफाई का जुनून था, जबकि दूसरा निन्दात्मक विचारों से परेशान था। रोगियों के ऊपर शॉक थेरेपी, सपोर्टिव थेरेपी अथवा दवा के साथ किसी प्रकार के सुधार के कोई लक्षण नहीं दिखाए थे। जिसके कारण यह दोनों रोगी सर्जरी से भी गुजरने को तैयार हो गए, परंतु विक्टर मेयर ने सोचा कि सर्जरी से पूर्व उन्हें एक बार ईआरपी थेरेपी इन दोनों पर आजमाना चाहिए। जिसके लिए विक्टर मेयर ने एक रोगी को बिना गंदगी के कमरे में बंद कर दिया, जबकि दूसरे मरीज को जानबूझकर बिना कर्मकांड किए, निन्दा करने वाले विचारों का पूर्वाभ्यास पैदा करने की स्थिति में रखा। यह उपचार सबसे पहले मरीजों के लक्षणों को कम करने के लिए किया गया था और तब से ओसीडी के इलाज के लिए यह निरंतर अभ्यास में है।

उपाय 3. विचारों के विरोध करने की हिम्मत जुटाएं 

विचारों को नियंत्रित करने का एक और तरीका है, उन्हें ‘केवल विचारों’ के रूप में पहचानना और लेबल करना। मस्तिष्क को यह समझने के लिए प्रशिक्षित करना कि एक बाध्यकारी व्यवहार के लिए आने वाले विचार सिर्फ हारमोंस द्वारा बनाई गई एक चाल है, जिसके लिए किसी भी प्रकार के कार्य को करने की आवश्यकताा नहीं। निरंतर प्रतिरोध का अभ्यास करने से उस विचार के कारण करने वाले कार्य की आदत को छोड़ने में मदद मिलती है। इस विश्वास के साथ कि जो कुछ भी बदतर हो सकता है, वह होगा, मस्तिष्क को स्वतंत्रता की भावना देता है जिससे वह इस तरह के विचारों को नियंत्रित करने में सक्षम हो पाता है।

उपाय 4. एकाग्रचित्त होकर ध्यान करना (मैडिटेशन)

आदिकाल से ही ध्यान करने को (मैडिटेशन) मन की शक्ति को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ध्यान करके दो तरीकों से ओसीडी का इलाज किया जा सकता है –
• ऑब्सिव कंपल्सिव डिसऑर्डर वैज्ञानिक रूप से मस्तिष्क के जागरूक हिस्से को प्रभावित करते हैं। अधिकांशतः मानसिक विकार, चिंता, अवसाद और ओसीडी आदि का मूल कारण मस्तिष्क के जागरूक हिस्से में बहुत अधिक विचारों का होना होताा है। नियमित रूप से ध्यान करने से अवचेतन मन पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है, साथ ही नकारात्मक विचारों को भी रोकने में मदद मिलती है। यह मानसिक विकार, चिंता, ओसीडी आदि द्वारा किए गए नुकसान को भी कम करने में मदद करता है।
• डोपामाइन नाम का हॉर्मोन दिमाग की गतिविधियों तथा मूड के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इस के स्तर को कृत्रिम तरीकों द्वारा बढ़ाने से भी ओसीडी का इलाज किया जा सकता है, क्योंकि लंबे समय तक डोपामाइन के स्तर के कम होने से ओसीडी जैसी बीमारियां स्वतः ही पैदा हो जाती हैं।ध्यान करने से डोपमाइन हॉर्मोन का स्तर प्राकृतिक रूप से बढ़ता है, जिससे ओसीडी से लड़ने में मदद मिलती है।

उपाय 5. पुराने सदमों से बाहर निकलने का प्रयास करें

ओसीडी होने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें बायोलॉजिकल, आनुवांशिक, व्यवहारिक, कॉग्निटिव या पर्यावरणीय आदि कारण शामिल हो सकते हैं। हालाँकि, बचपन के किसी आघात या पिछले किसी दर्दनाक अनुभवों के परिणामस्वरूप भी कई बार ओसीडी जैसा गंभीर रोग विकसित हो जाता है। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी), ओसीडी का इलाज करने में मदद करती है इसके अनुसार व्यक्ति के जीवन के पिछले इतिहास को समझने और अनुभवों का विश्लेषण करके उसके इस रोग की वजह को समझा जाता है। सीबीटी, लघु समय की थेरेपी है जो रोगी को उसके विचारों के पैटर्न को बदलने में मदद करती है। सीबीटी आज के समय में इंटरनेट पर ऑनलाइन उपलब्ध है। जिसमें रोगी स्वयं पहले कभी अपने साथ हुए किसी आघात का विश्लेषण करके, फिर उससे संबंधित विचार के पैटर्न को बदलकर खुद ही अपनी मदद कर सकता है और इस गंभीर रोग से स्वयं को बचा सकता है।

उपाय 6. ओसीडी से विजय हेतु वैज्ञानिक रिस्क उठाएं

ऐसे बाध्यकारी विचार जो ओसीडी से ग्रस्त व्यक्ति को बार-बार आते हैं जिसके कारण वह कई बार व्यक्ति की सामान्य निर्णय लेने की क्षमता तक को भी प्रभावित करते हैं। अमेरिका के नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए एक अध्ययन में “फ्रेमिंग इफेक्ट” पर आधारित एक शोध किया गया है , जो इस आधार पर निर्णय लेने की जांच करता है कि यदि निर्णय लेने का आधार धन से जुड़ा हो तो भी क्या ओसीडी से पीड़ित रोगी धन का विकल्प होने के कारण दुविधा में पड़ करके अपना नुकसान करवाएगा या कुछ अलग निर्णय लेगा। सामान्यता जोखिम उठाने के कारण दिमाग को चुनौती मिलती है, जिससे नए विकल्पों को तलाशने में मदद मिलती है और यही से सही निर्णय लेने की क्षमता का भी विकास होता है।

उपाय 7. दोस्तों और पारिवारिक सदस्यों से बात करें

ज्यादातर ओसीडी के मरीज़ अक्सर डॉक्टर या विजिटिंग थेरेपी के कंसलटेंट से बात करने से कतराते हैं, क्योंकि वे लगातार अपराधबोध की भावना से ग्रस्त होते हैं, क्योंकि उनकी यह समस्या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी होती है, जिसके कारण अपने आप को निकृष्ट दृष्टि से देखने लगते हैं। अपने दोस्तों के साथ बातचीत करने से उनके मन से “स्वयं को दूसरों की नजरों पर क्या फर्क पड़ेगा” इस भावना से मुक्त होकर वह खुलकर अपने बारे में बात कर पाते हैं। इसके अलावा, ऑब्सेसेशन के बारे में बात करने से आमतौर पर ऐसे व्यवहार के बारे में पता चलता है, जो कि अन्यथा किसी और तरीके से नहीं चल पाता। यह आगे आपके ओसीडी पर बेहतर पकड़ बनाने में मदद करता है।

Obsessive Compulsive Disorder

उपाय 8. पूर्णता के लिए परेशान ना हो

हालांकि एक पूर्णतावादी या परफेक्शनिस्ट होना ऐसा लगता है मानो कि यह फायदे का सौदा है। परंतु कब यह पूर्णतावाद आपके अंदर ऑब्सेशन का रूप ले लेता है पता भी नहीं चलता। परफेक्शनिस्ट होना ओसीडी के रोगियों का सामान्य लक्षण है। पूर्णता की भूख कब गलत राह पकड़ लेती है इसका अंदाजा भी नहीं हो पाता। क्योंकि ऐसी स्थिति में व्यक्ति हर हाल में परफेक्ट होना चाहने लगता है, जो कि किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए भी असंभव है। हर कार्य को परफेक्ट करना खुद में एक असंभव कार्य होता है इसलिए प्रकार की व्यक्ति के अंदर खुद को लेकर एक अजीब सी नकारात्मकता और खुद को बेफिजूल समझने जैसी भावनाएं पैदा होने लगती है। ऐसी भावनाएं व्यक्ति के मस्तिष्क पर बहुत नकारात्मक असर डालती हैं। इस तरह की स्थिति को दो तरह से संभाला जा सकता है – पहला, कुछ ऐसे मानक स्थापित करना जो उनके अनुसार पूर्णतावाद या परफेक्शन की शर्तो को पूरा करतें हों या फिर अपूर्ण या खामियों के साथ स्थिति को स्वीकार कर लेना।

उपाय 9. व्यायाम करने से दिमागी स्वास्थ्य में लाभ

व्यायाम करने से शरीर में एंडोर्फिन नामक हार्मोन प्राकृतिक रूप से निकलता है, जो कि प्राकृतिक स्ट्रेस बस्टर हैं। एरोबिक व्यायाम और ओसीडी के बीच संबंधों की जांच करने वाले एक अध्ययन में, ओसीडी जैसी गंभीर बीमारी के दौर से गुजर रहे आधे ओसीडी रोगियों को 12 दिनों की अवधि के लिए ब्रिस्क रन थेरेपी करने के लिए कहा। परिणामस्वरूप जिन रोगियों ने इस थेरेपी को अपनाया उनके अंदर ओसीडी के लक्षणों में उल्लेखनीय कमी देखी गई। इसके अलावा, व्यायाम भी मजबूरियों से ध्यान हटाने का एक अच्छा माध्यम होता है और साथ ही यह आपके अंदर ऊर्जा का नया विकास करके आपको स्वस्थ शरीर प्रदान करता है।

उपाय 10. सही नींद लेना आवश्यक है

सोने की कोशिश करते समय आने वाले विचार, जो बार-बार हमारे मस्तिष्क को परेशान करते हैं वह आगे चलकर अनिद्रा जैसी परेशानियों को जन्म देते हैं। शोध से पता चलता है कि जो लोग देर से सोते हैं, उनका अपने ओसीडी संकेतों के प्रति नियंत्रण, उचित नींद लेने वालों की तुलना में कम होता है। अनिद्रा और ओसीडी मिलकर एक ऐसा चक्र बना लेते हैं, जिससे ओसीडी का स्तर और बुरा हो जाता है।यदि सोते समय आपके मस्तिष्क में इधर-उधर के ख्याल बहुत ज्यादा आते हैं, तो कोशिश करें धीमा संगीत लगाकर सोने की, इससे आपके मस्तिष्क को उन आने वाले विचारों से मुक्ति मिलने में मदद मिलेगी जो आपकी नींद में बाधा बन रहे हैं।

उपाय 11. ध्यान को दूसरी जगह केंद्रित करना

ओसीडी से ग्रसित व्यक्ति के लिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि वह अपने दिमाग में आने वाले बाध्यकारी विचारों से ध्यान हटाने के लिए अपना ध्यान किसी दूसरे कार्य या दिशा की तरफ मोड़े। जैसे कि यदि उसको बार-बार प्रार्थना या पूजा करने का ख्याल आ रहा है तो वह अपने आपका ध्यान बाहर के मौसम की तरफ केंद्रित करने की कोशिश करें। इस तरह का कार्य करने से उसकी तरफ आ रहे बाध्यकारी विचार अपने आप धीरे-धीरे करके चले जाएगें। इस प्रक्रिया को रि-फोकसिंग कहते हैं। इस प्रक्रिया का असर आने में समय लगता है, यह इतनी आसान प्रक्रिया भी नहीं होती, परंतु इसमें जीत निश्चित होती है। पंद्रह मिनट का नियम मानना ज़रूरी है, जैसा कि डॉ. जेफरी शवार्ट्ज द्वारा प्रस्तावित किया गया है. यदि ओसीडी से ग्रस्त व्यक्ति रोज 15 मिनट के लिए इस अभ्यास को करता है, तो वह अपनी बीमारी को खुद ही ठीक कर सकता है। यदि रोगी व्यक्ति 5 मिनट के अभ्यास से शुरुआत करें तो भी उसका यह कदम उसको इस बीमारी से बचाने तरफ लेकर जाएगा। धीरे-धीरे करके वह इस अवधि को और लंबा कर सकता है जब तक कि उसके दिमाग से वह बाध्यकारी विचार पूरी तरह से चला ना जाए।

उपाय 12. सोची समझी कल्पना करना जिससे ओसीडी दिमाग शांत हो सके

ओसीडी से ग्रस्त व्यक्ति की सबसे आम समस्या यह है कि वह अपने आपकी चिंता को कम करने के लिए अपने ही बाध्यकारी विचारों का शिकार हो जाता है। कल्पना करना एक ऐसा स्वयं की मदद करने का तरीका है जिसके द्वारा रोगी व्यक्ति सबसे पहले उस उस कार्य को पूरा होता कल्पनाओं में देख लेता है, जिसे उसने सचमुच में शुरू भी नहीं किया होता। इस कारण उसका दिमाग उसे यह सोचने में मजबूर करा देता है कि वह उस बाध्यकारी कार्य को पूरा कर चुका है, जो सच्चाई में उसने किया ही नहीं है। जैसे कि यदि उसके दिमाग में बार-बार हाथ धोने का ख्याल आ रहा है तो वह पहले से ही अपने हाथों के धोए जाने की कल्पना करने लगेगा, जिससे उसका दिमाग उसको फिर से हाथ को धोए जाने का संकेत नहीं भेजेगा, क्योंकि कल्पना में उसने अपना हाथ धो लिया होता है।

उपाय 13. शराब और निकोटीन के सेवन से दूर रहें

सिगरेट, शराब या किसी भी रूप में निकोटीन का इस्तेमाल करना आपकी इस बीमारी को और ज्यादा हानिकारक बनाता है। डायग्नोस्टिक एंड स्टैटिस्टिकल मैनुअल ऑफ मेंटल डिसऑर्डर, फोर्थ एडिशन (DSM-IV) में कहा गया है कि शराब और निकोटीन दोनों दूसरों पर ना सिर्फ निर्भरता पैदा कर सकते हैं अपितु ओसीडी को और गंभीर रूप दे सकतें हैं साथ ही ये अन्य मानसिक विकार जैसे अवसाद और दोहरे विकारों को भी जन्म देते हैं। किसी भी रूप में अल्कोहल, निकोटीन और इसी प्रकार के अन्य उत्पादों से जो नशे से जुड़े होते हैं, से परहेज करना इस प्रकार के विकारों को बिगड़ने से रोकने में मददगार साबित हो सकता है।

उपाय 14. उचित आहार के फायदे

मस्तिष्क कोशिकाओं के बीच संदेशों को एक न्यूरोट्रांसमीटर की मदद से स्थानांतरित किया जाता है जिसे “सेरोटोनिन” कहा जाता है। सेरोटोनिन, जिसे मूड-प्रभावकारक के रूप में भी जाना जाता है, प्रोटीन “ट्रिप्टोफैन” से बनता है और ओसीडी के अधिकांश रोगियों की रिपोर्ट में इसकी कमी पाई जाती है। “ट्रिप्टोफैन”, से भरपूर भोजन का सेवन, “सेरोटोनिन” के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है, जो ओसीडी (मनोग्रसित-बाध्यता विकार) के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। “ट्राईप्टोफन” कई प्रकार के प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे चिकन, दूध, अंडे और पनीर में भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। यह अन्य खाद्य पदार्थों जैसे कि सेम, और कद्दू में भी मिलता है। तिल के बीज, सूरजमुखी के बीज, और नट्स भी ट्रिप्टोफैन के समृद्ध स्रोत होतें हैं। रोज के दैनिक आहार में इनका सेवन आपको ओसीडी के खतरनाक परिणामों से बचा सकता है।

उपाय 15. तनाव को उचित तरीके से प्रबंधित करें

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी भी व्यक्ति का जीवन तनाव मुक्त नहीं होता, परंतु हर व्यक्ति को ओसीडी से ग्रसित भी नहीं होता। इसलिए जरूरी है कि आप अपने स्वयं के जीवन में तनाव को उचित तरीके से प्रबंधित करें। तनाव ओसीडी का एक कारण नहीं है, लेकिन तनाव की स्थितियों के तहत ओसीडी लक्षण शुरू हो जाते हैं। तनाव प्रबंधन इस प्रकार ओसीडी के लक्षणों से निपटने में काफी मददगार साबित हो सकता है। ध्यान, योग और यहां तक कि धीमी गति से सांस लेने जैसी तकनीकें दिमाग को शांत करने और तनाव को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद करती हैं।

Obsessive Compulsive Disorder

उपाय 16. जिम्मेदारी उठाने की मानसिकता रखें 

यह समझना आवश्यक है कि मानसिक विकारों का इलाज केवल तभी किया जा सकता है जब कोई व्यक्ति स्वयं अपने दम पर उन पर काम करने को तैयार हो। चिकित्सा के शुरुआती दिनों में धीमे या कोई सुधार नहीं होने से गुस्सा अधिकतर दोस्तों, परिवार और यहां तक कि कभी-कभी चिकित्सक पर भी निकलता है, लेकिन यह समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है कि चिकित्सा सिर्फ आपकी मदद के लिए है। असली काम आपको स्वयं खुद के दम पर करना होता है, और सुधार तभी दिखेगा जब आप खुद कोशिश करना शुरू करेंगे। दवाएं और थेरेपी केवल प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन विकार को ठीक नहीं कर सकते।

उपाय 17. अपने प्रयासों की सराहना करें

स्वयं के द्वारा की गई कड़ी मेहनत के लिए खुद की सराहना करना कभी ना भूले। यह आपके मस्तिष्क को आगे और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगी। हर बार जब भी आप अपने बाध्यकारी विचार को नियंत्रित करें, उस समय अपने आप की सराहना अवश्य करें यह आपको भविष्य में और बेहतर कार्य करने में मदद करेगी। जब भी आप पिछली बार की तुलना में अधिक लंबे समय के लिए अपने विचारों के संकेतों पर नियंत्रण रखने में सक्षम हो, उस समय स्वयं को बधाई जरूर दें, स्वयं की तारीफ करें। आखिरकार एक छोटी सी प्रेरणा ही एक लंबा रास्ता तय करने की शुरुआत बनती है।

उपाय 18. छुट्टी पर जाने की योजना बनाएं

छुट्टी पर जाना हमेशा ही मजेदार होता है, लेकिन ओसीडी ग्रस्त रोगियों के मामले में यह अतिरिक्त रूप से फायदेमंद होता है। सामान्य परिवेश से एक परिवर्तन, सामान्य व्यक्ति के मस्तिष्क के विचारों के पैटर्न को तोड़ता है, उसी प्रकार यह ओसीडी ग्रस्त व्यक्ति के दिमाग में आ रहे बाध्यकारी विचारों को भी कम करने में मदद करता है। कुछ रोगियों में इस उपाय के द्वारा वह पूरी तरह से अपने बाध्यकारी विचारों से जल्द ही मुक्त हो जाते हैं। परंतु कभी-कभी कुछ अन्य रोगियों में इस परिवर्तन के कारण उनके बाध्यकारी विचारों के पूरा न होने के कारण कभी-कभी उनकी हालत और अधिक खराब हो जाती है। परंतु इस प्रक्रिया को बार बार करने से उनके मस्तिष्क के नियमित पैटर्न में थोड़ा थोड़ा बदलाव आना शुरू होता है। हालांकि यदि इस प्रकार के उपायों को नियमित रूप से किया जाए तो उनमें भी सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

उपाय 19. बिलकुल भी जल्दबाजी ना करें

इस तथ्य की कहने का सिर्फ एक अर्थ है कि आपको यह समझना होगा कि ओसीडी के उपचार में समय लग सकता है, परंतु आप अपनी उम्मीद को कभी ना खोऐं। तुरंत ठीक होने की इच्छा सामान्यता अधिक तनाव का कारण बनती है, जिससे मस्तिष्क में बन रहे बाध्यकारी विचार और अधिक मजबूत हो जातें हैं। खुद को सीमा से अधिक धक्का देने से नकारात्मक प्रभाव और लक्षणों की स्थिति अधिक बिगड़ जाती है। इसलिए जरूरी है कि आप एक धीमी प्रक्रिया के साथ, एक समय में अपने एक ही बाध्यकारी विचार को दूर करने के लिए अपनी कोशिश करें।

उपाय 20. ओसीडी में लगातार कोशिश करना ही सफलता की कुंजी है

आशा न खोना ओसीडी जैसे गंभीर रोग के उपचार की कुंजी है। ऐसे कई उदाहरण हैं, जब मरीज अपनी उम्मीद खो बैठता है, लेकिन ऐसे वक्त पर खुद को यह समझाएं कि “कोई बात नहीं फिर से कोशिश करते हैं।” याद रखें कि आपके द्वारा उठाया गया हर कदम आपको एक स्वस्थ कल की तरफ ले जाएगा।

नियमित चिकित्सक थेरेपी के साथ स्व-सहायता, दवाएं और होमवर्क आपकी ठीक होने की प्रक्रिया को तेज करने में आपकी मदद करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य रोगों के बारे में बढ़ती जागरूकता के साथ, ओसीडी जैसी बीमारी के उपचार अब दुनिया भर में व्यापक रूप से उपलब्ध हैं। बाध्यकारी विचार, भी अन्य मानसिक विकारों की तरह, ठीक होने में अपना समय लेता है लेकिन उचित दवा और स्व-सहायता के द्वारा इसे पूरी तरह से किया जा सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here