जानिये ‘शकरकंद’ से होने वाले ये 18 सेहत के फायदे

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शकरकंद पौष्टिक और स्वादिष्ट सब्जी होती है। यह नरम और मुलायम होती है और इसमें कुदरती हलकी सी मिठास होती है। इस कारण ज्यादातर लोगों को यह लगता है कि यह सब्जी केवल मीठे एवं स्वादिष्ट व्यंजनों को बनाने में इस्तेमाल की जाती होगी, परंतु यह कई प्रकार के व्यंजनों में भी इस्तेमाल की जाती है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि मीठे आलू ( शकरकंद ) विटामिन ए के सबसे अच्छे स्रोतों में से एक होते हैं। शकरकंद में विटामिन बी 5, राइबोफ्लेविन, नियासिन, थियामिन और कैरोटीनॉयड की प्रचुर मात्रा होती है। शकरकंद में न केवल कई पोषक तत्व होते हैं, बल्कि यह औषधीय लाभों से भी भरपूर होता है। वैज्ञानिकों ने शोध के द्वारा ज्ञात किया है कि शकरकंद में एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन-रोधी), एंटी-डायबिटिक (मधुमेह-रोधी), और एंटीकैंसर (कैंसर-रोधी) जैसे गुणों की भरमार होती है। अधिकांश शकरकंद हलके नारंगी रंग के होते हैं, लेकिन कुछ अन्य ऐसे भी हैं जो बैंगनी, पीले, सफेद, गुलाबी और लाल रंग में आते हैं। निम्नलिखित कुछ स्वास्थ्य लाभ ऐसे हैं, जिन्हें जानने के बाद आप शकरकंद को नियमित रूप से अपने आहार में शामिल करके पर मजबूर ही हो जायेंगे-

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शकरकंद डिप्रेशन और अवसाद को ठीक करने में फायदेमंद

शकरकंद में मैग्नीशियम की एक अच्छी मात्रा होती है जो सामान्य रूप से शरीर के कार्य करने के लिए आवश्यक खनिज माना जाता है। मैग्नीशियम का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है। अध्ययनों से पता चलता है कि मैग्नीशियम की कमी बढ़ने की मुख्य वजह आज कल का आधुनिक आहार है, जिसके कारण लोगों में अवसाद जैसी बीमारियों का जन्म होता है। मैग्नीशियम की कमी और अवसाद एक दूसरे से सीधे तौर पर जुड़े होते हैं क्योंकि ये दोनों ही कोशिका-मध्यस्थ इम्यूनिटी की प्रतिक्रिया और शरीर के इन्फ्लेमेशन जैसे लक्षणों को दिखाते हैं। पशुओं पर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि मैग्नीशियम के सेवन से मस्तिष्क को किसी भी प्रकार की मानसिक दर्दनाक चोट के बाद होने वाली चिंता या अवसाद से बचाया जा सकता है। इसके साथ ही पशुओं पर किए गए अध्ययनों से यह भी साबित हुआ है कि मैग्नीशियम की कमी का सीधा संबंध चिंता या अवसाद से होता है। मैग्नीशियम की कमी से चिंता-संबंधी व्यवहारों के साथ-साथ चूहों में अवसाद की वृद्धि भी देखी गई है।

शकरकंद विटामिन ए की कमी को रोकने में मददगार

दुनिया भर के विकासशील देशों में विटामिन ए की कमी एक गंभीर मुद्दा है। विटामिन ए की कमी के कारण स्वास्थ्य संबंधी गंभीर रोग होने की संभावना होती है जैसे कि संक्रामक रोग के प्रतिरोध में कमी, संक्रामक रोगों में वृद्धि, सूखी आँखें और गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं और उनके बच्चों में मृत्यु दर की वृद्धि आदि। शकरकंद विटामिन ए का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है क्योंकि इनमें बीटा-कैरोटीन का उच्च स्तर होता है । बीटा-कैरोटीन हमारे लीवर में जाकर विटामिन ए में बदल जाता है, बीटा-कैरोटीन के हर अणु में विटामिन ए के दो अणु पैदा होते हैं।

शकरकंद मधुमेह को कम करने में भी कारगर

शकरकंद को ग्लाइसेमिक इंडेक्स स्केल पर निम्न से उच्च के रूप में वर्गीकृत किया गया है, और कई अध्ययनों से ऐसे संकेत भी मिलतें हैं कि यह इंसुलिन प्रतिरोध और लो ब्लड शुगर के लेवल को कम कर सकता है। यहां तक की उच्च ब्लड शुगर से पीड़ित लोगों में भी शकरकंद द्वारा ब्लड सुगर कम करने का असर देखा जा सकता है। अपेक्षाकृत कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स का मतलब है कि शकरकंद अन्य स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थों के विपरीत अधिक धीरे-धीरे रक्त में चीनी को छोड़ता है। चीनी का यह स्थिर प्रवाह मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक होता है जिससे शर्करा का स्तर रक्त में कभी भी बहुत अधिक नहीं हो पाता। शकरकंद की किस्मों के अध्ययन से पता चला है कि जब बात रक्त में ग्लूकोज के रेगुलेशन की आती है तो ब्यूरगार्ड किस्म की शकरकंद सबसे प्रभावी सिद्ध होती है। इसी प्रकार शकरकंद के एक अन्य प्रकार कैयापो को टाइप II मधुमेह वाले व्यक्तियों में ग्लूकोज और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार के रूप में उल्लेखित किया गया है।

शकरकंद में मौजूद फाइबर को डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद माना जाता है। शकरकंद एक उच्च फाइबर वाला भोजन है, जिसे मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों के रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने के लिए उपयुक्त माना गया है। एक शकरकंद के 10%-15% फाइबर में पेक्टिन नामक घुलनशील फाइबर होते हैं, जो भोजन करने के बाद रक्त में शर्करा के स्पाइक्स (जल्दी जल्दी शर्करा का उच्च हो जाना) को कम करने में प्रभावी होते हैं । शकरकंद में लगभग 77% फाइबर अघुलनशील होते हैं, और मधुमेह के खिलाफ लड़ाई में उनकी अपनी अलग, बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के लिए अघुलनशील फाइबर आवश्यक होते हैं, जो उस समय रक्त में शर्करा की मात्रा को नियमित करने में मदद करतें हैं। इसके अलावा, शकरकंद मैग्नीशियम का एक महत्वपूर्ण स्रोत होता है, जिससे टाइप II डायबिटीज विकसित होने का खतरा कम हो जाता है।

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कैंसर से बचाव, रोकथाम और प्रबंधन में शकरकंद मददगार

अध्ययनों से यह भी पता चला है कि बैंगनी रंग के शकरकंद विशेष रूप से कैंसर के खिलाफ लड़ाई में प्रभावी सिद्ध हुआ है । शकरकंद की इस किस्म में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करते हैं विशेषकर के स्तन कैंसर और पेट के कैंसर। साथ ही यह इस प्रकार के कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में भी सक्षम होते हैं। माना जाता है कि शकरकंद की यह किस्म उच्च एंथोसाइनिन संयुक्त होने के कारण गैस्ट्रिक और स्तन कैंसर को रोकने में समर्थ है। अन्य अध्ययनों ने यह भी सिद्ध किया है कि शकरकंद के विभिन्न हिस्सों से निकाला गया अर्क प्रोस्टेट कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने की दिशा में कार्य करता है साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि कैंसर प्रोटेस्ट के अन्य हिस्सों में ना फैले और ना ही आगे बढ़े। वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला है कि जब प्रोस्टेट कैंसर को नियंत्रित करने की बात आती है तो शकरकंद की कैंसर विरोधी गतिविधि उसने मौजूद उच्च पॉलीफेनॉल के कारण ही संभव है। शकरकंद में बीटा-कैरोटीन जैसे कैरोटीनॉइड का मौजूद होना भी प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित पुरुषों में इसके खतरे को को कम करने पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कोलोरेक्टल कैंसर से जुड़े खतरों को रोकने में भी बीटा-कैरोटीन को प्रभावी पाया गया है।

शकरकंद नींद के उचित प्रबंधन में सहायक

मैग्नीशियम बुजुर्ग व्यक्तियों में अनिद्रा को कम करने में सहायक पाया गया है। अनिद्रा वास्तव में व्यक्तियों के लिए तनाव, अवसाद और चिंता के लिए एक ट्रिगर जैसा है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है परंतु आंकड़ों के अनुसार 50% से अधिक बुजुर्ग नींद की कमी के किसी न किसी रूप से पीड़ित पाएं जाते हैं। चूंकि शकरकंद में मैग्नीशियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है, अतः इसके सेवन से अनिद्रा की शिकायत काफी हद तक कण्ट्रोल में की जा सकती है.

शकरकंद में सूजन-रोधी गुण रोग दूर रखने में सहायक

शकरकंद में अच्छी मात्रा में विटामिन्स पाए जाते हैं, जिनमें से अधिकांश में शक्तिशाली एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। शकरकंद पर किए गए अध्ययनों से पता चला है कि इस सब्जी के अर्क में शरीर में सक्रिय इन्फ्लेमेशन के उत्पादन को रोकने की क्षमता होती है। इसके अलावा, शकरकंद में कोलीन की उच्च मात्रा होती है, जो एक बहुमुखी पोषक तत्व है। कोलीन के मुख्य लाभों में से एक यह है कि यह शरीर में इन्फ्लेमेशन से जुड़ी प्रतिक्रियाओं को कम करता है जिसके परिणामस्वरूप इन्फ्लेमेशन का स्तर कम हो जाता है। पशुओं पर किए गए अध्ययनों मैं यह बात सामने आई है कि कि कोलीन शरीर में इन्फ्लेमेशन होने पर चिकित्सीय रूप से दवाई जैसा कार्य करता है। इन्फ्लेमेशन (सूजन) अधिक होने की वजह से ही शरीर में खतरनाक (गठिया, ह्रदय रोग, कैंसर आदि) रोग होते हैं. अन्य अध्ययनों ने यह भी संकेत मिलता है कि बैंगनी रंग के शकरकंद के अर्क में एंथोसायनिन होता है, जो पेट में होने वाले कैंसर की कोशिकाओं में इन्फ्लेमेशन को कम करने और इस तरह की अन्य कैंसर कोशिकाओं को फैलने से रोकने में कारगर सिद्ध होता है।

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शकरकंद अल्सर से बचाव में असरदार

सामान्यतः अल्सर शरीर के अन्दर एक घाव या छिलन होती है। अलसर तब होता है जब एक सूजा हुआ ऊतक श्लेष्म झिल्ली से या त्वचा से बाहर निकल जाता है, और यह काफी दर्दनाक स्थिति हो सकती है। पशुओं पर किए गए अध्ययनों से पता चला है कि शकरकंद की जड़ से निकलने वाली मेथनॉल एस्पिरिन के कारण हुए अल्सर से जठरांत्र की रक्षा करता है। इन अध्ययनों के परिणामों ने साबित किया है कि शकरकंद का उपयोग पेप्टिक अल्सर (पेट और छोटी आंत के अल्सर) के उपचार और प्रबंधन में किया जा सकता है। एक अन्य अध्ययन से पता चला है कि शकरकंद की जड़ों से निकाला आटा गैस्ट्रिक अल्सरेशन को कम करने के साथ साथ आसपास के ऊतकों में सूजन को कम करता है। इसके अलावा, शकरकंद के अर्क को मुक्त कणों द्वारा शरीर के अंदर फैले हुए घाव को भरने में भी सहायक माना जाता है।

शकरकंद हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में फायदेमंद

शरीर में ऑक्सीकरण से एथेरोस्क्लेरोसिस जैसी कॉम्प्लिकेशंस पैदा हो जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई बार विभिन्न प्रकार के हृदय रोगों का विकास हो सकता है। धमनियों में ब्‍लड सर्कुलेशन कम होना है एथेरोस्क्लेरोसिस। शकरकंद के पत्तों के अर्क को वैज्ञानिकों ने परीक्षण करने के बाद यह पाया कि शकरकंद के पत्ते के अर्क में पॉलीफेनोल का उच्च स्तर मनुष्यों में ऑक्सीकरण को कम करने में सक्षम है, जिससे हृदय रोग के विकास की संभावना को कम किया जा सकता है। अन्य वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि बैंगनी रंग वाले शकरकंद में पाया जाने वाला एंथोसायनिन का उच्च स्तर कोरोनरी रोग की संभावना को कम करने की क्षमता रखता है। इसके साथ ही शकरकंद में फाइबर होते हैं, जो हृदय रोगों के खतरे को कम करने में मदद करते हैं।

शकरकंद में एंटीमाइक्रोबियल (रोगाणुरोधी) गुण इन्फेक्शन दूर रखने में सहायक

इस तथ्य के बावजूद कि शकरकंद के रोगाणुरोधी गुणों पर किए गए अध्ययन सीमित हैं, कई वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकाला है कि शकरकंद में कुछ स्तर तक रोगाणुरोधी गुण पाए जाते हैं। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि शकरकंद की पत्तियों से इथेनॉल और एसीटोन के अर्क में निमोनिया और टाइफाइड पैदा करने वाले बैक्टीरिया के खिलाफ लड़ने वाले रोगाणुरोधी गुण होते हैं । शकरकंद में मौजूद फाइबर को खाने के कारण पैदा हुए बैक्टीरिया के विकास को रोकने के गुण पाए गए हैं। कुछ अन्य अध्ययनों में पाया गया है कि शकरकंद की पत्ती का पाउडर, और इसके पानी, इथेनॉल, और पेप्टोन के अर्क में साल्मोनेला टाइफी , ई.कोली और क्लेबसिएला निमोनिया के खिलाफ लड़ने वाले रोगाणुरोधी गुण होते हैं।

शकरकंद बालों की हेल्थ के लिए मददगार

जैसा कि हम पढ़ चुके हैं कि शकरकंद में विटामिन ए की मात्रा अच्छी खासी होती है। इसके साथ ही इसमें विटामिन सी और विटामिन ई भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। अध्ययनों से यह पता चलता है कि जिन लोगों के बाल गिरने की समस्या बहुत ज्यादा होती है उन्हें विटामिन ई अपने आहार में शामिल करने से काफी फायदा पहुंचता है। ऐसा इसलिए क्योंकि विटामिन ई में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं जो कि एलोपेसिया (गंजापन) होने का मुख्य कारण माना जाता है।

शकरकंद त्वचा को बेहतर बनाने में फायदेमंद

विटामिन सी त्वचा से जुड़ी समस्याओं के उपचार के लिए प्रभावी माना जाता है। यह फोटोएजिंग (धूप की वजह से त्वचा की क्षति) और हायपरपिगमेंटेशन (त्वचा का अधिक सांवलापन) जैसी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। अल्ट्रा-वायलेट लाइट के संपर्क में आने से होने वाले त्वचा के नुक्सान (ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस) को विटामिन सी बेअसर करने में कारगर सिद्ध होता है। इसके साथ ही विटामिन सी और विटामिन ई का कॉन्बिनेशन लोगों में त्वचा कैंसर के खतरे को कम करता है। कोलेजन नामके प्रोटीन को शरीर में बनाने में विटामिन सी भी आवश्यक होता है, जो त्वचा का मुख्य संरचनात्मक प्रोटीन होता है। कई अध्ययनों से यह भी पता चला है कि विटामिन सी में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसका मतलब यह है कि यह विटामिन्स त्वचा रोगों जैसे कि मुँहासे के परेशानी को दूर करने में मदद कर सकता है, साथ ही त्वचा के घावों के उपचार में भी मदद करता है। विटामिन ए सूरज की रोशनी से क्षतिग्रस्त हुई त्वचा के उपचार और संचालन में प्रभावी साबित हुआ है । इसके अलावा, अध्ययनों से पता चला है कि यह विटामिन्स कीमोथेरेपी, और अन्य उपचार के कारण त्वचा को होने वाले नुकसान से भी बचाने में प्रभावी होता है। कुछ अन्य अध्ययन यह भी बताते हैं कि इसका सेवन हमारी त्वचा की कोशिका की बढ़ती हुई उम्र की दर को कम करता है और हमारी त्वचा को अधिक बेहतर बनाता है।

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शकरकंद पाचन के लिए गुणकारी

शकरकंद में फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है जिसे पाचन क्रिया के लिए बहुत आवश्यक माना जाता है। यह लंबे समय में तक आंतों के स्वास्थ्य में सुधार करने में सहायक होता है। आजकल के समय में उपयोग किए जाने वाली कई सारी लैक्सेटिव फाइबर से बनी होती हैं जिसका अर्थ यह है कि शकरकंद के सेवन करने से उचित पाचन के लिए आवश्यक फाइबर प्राकृतिक रूप से शरीर को मिलता है। शकरकंद में पाए जाने वाले फाइबर आज के समय में बच्चों और वयस्क यहां तक कि बुजुर्गों में भी कब्ज जैसी समस्या को रोकने में मदद करतें हैं। यही कारण है कि शकरकंद का उपयोग हर घर में जरूर होना चाहिए।

शकरकंद रक्तचाप को नियंत्रित करने में असरदार

शकरकंद रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है क्योंकि इसमें मैग्नीशियम तथा पोटेशियम दोनों की ही अच्छी मात्रा पाई जाती है। अध्ययनों से पता चलता है कि पोटेशियम के अधिक सेवन से रक्तचाप जैसी बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है। जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को स्ट्रोक या हृदय से जुड़ी अन्य समस्या के विकास की संभावना को भी कम करने में मदद मिलती है। उच्च रक्तचाप की रोकथाम में मैग्नीशियम की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि चिकित्सक भी मैग्नीशियम लेने की सलाह देते हैं। शकरकंद मैग्नीशियम का प्राकृतिक स्रोत है। यह गर्भवती और गैर गर्भवती दोनों तरह की महिलाओं के लिए लाभकारी होता है। कुछ अन्य अध्ययन में यह भी पाया गया है कि शरीर में मैग्नीशियम की कमी से उच्च रक्तचाप बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है।

शकरकंद इम्युनिटी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण

शकरकंद में अच्छी मात्रा में विटामिन ए, सी और ई पाए जाते हैं। इनका सीधा संबंध शरीर की इम्यून पॉवर (रोग-प्रतिरोधक क्षमता) को बढ़ाने में होता है। इम्यून सिस्टम अच्छी तरह कार्य करने से कई तरह के इन्फेक्शन और अन्य खतरनाक रोग होने की संभावना क्षीण हो जाती है। कैंसर के इलाज से गुजर रहे लोगों (कीमोथेरेपी मरीज) के लिए शकरकंद का सेवन अच्छा है। जिन लोगों कि इम्युनिटी अक्सर कम रहती है, जैसे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग, उन्हें दैनिक रूप से आहार में शकरकंद को शामिल करना चाहिए।

शकरकंद प्रजनन क्षमता हेतु फायदेमंद

शकरकंद में विटामिन ए की उच्च खुराक, उन महिलाओं की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए उपयुक्त माना जाता है जो बढ़ती उम्र में बच्चे की चाह रखती हैं। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई बार महिलाएं अपना कैरियर या अन्य कारणों की वजह से मां बनने में देरी कर देती हैं। बढ़ती उम्र के कारण उनके प्रजनन क्षमता में समय के साथ कमजोर हो सकती है, परंतु शकरकंद में पाया जाने वाला विटामिन ए उनके प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए बिल्कुल उपयुक्त माना गया है। पशुओं पर किए गए अध्ययनों से पता चला है कि विटामिन ए प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में एक मुख्य भूमिका निभाता है। शोध से यह भी पता चला है कि विटामिन ए की कमी से प्रसव उम्र वाली महिलाओं में कई बार बांझपन जैसी गंभीर समस्या भी हो सकती है। शकरकंद में आयरन भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिसे प्रसव उम्र की महिलाओं में प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण खनिज माना गया है। रिपोर्टों से पता चलता है कि एनीमिया, या आयरन की कमी, महिलाओं में बांझपन का मुख्य कारण है। कुछ रिपोर्टों से पता चला है कि आयरन की कमी को दूर करने के लिए आमतौर पर होने वाला उपचार कुछ महीनों से लेकर एक साल तक का समय ले लेता है। जिसके बाद ही महिलाएं गर्भधारण करने के लिए पूरी तरह से सक्षम हो पाती हैं, इसलिए जरूरी है कि महिलाओं के शरीर में आयरन की कमी ना हो। अन्य अध्ययनों में पाया गया है कि आहार में नियमित रूप से आयरन के सेवन से ओवुलेटरी इंफर्टिलिटी (अंडाशय से सम्बंधित बांझपन) के खतरे को कम किया जा सकता है।

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अच्छी दृष्टि बनाए रखने के लिए शकरकंद महत्वपूर्ण

शकरकंद में विटामिन ए अच्छी मात्रा में पाया जाता है, और हममें से ज्यादातर लोग यह बात जानते हैं कि विटामिन ए हमारी दृष्टि के लिए अच्छा और जरूरी होता है, लेकिन हममें से ज्यादातर लोग यह नहीं जानते हैं कि विटामिन हमारी दृष्टि में किस तरह से सुधार करता है। अध्ययनों से पता चला है कि प्रकाश अवशोषण के लिए जिम्मेदार पिगमेंट के निर्माण के लिए विटामिन ए की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, रेटिना की उचित संरचना को बनाए रखने में भी ‘विटामिन ए” आवश्यक होता है। विटामिन ए की कमी से दृष्टि खराब हो सकती है, और कुछ मामलों में तो अंधापन जैसी स्थिति का सामना भी करना पड़ सकता है। विटामिन में कमी से रतौंधी (रात्रि के समय होने वाले अंधापन ) जैसा गंभीर रोग भी हो सकता है। इसके अलावा, कॉर्निया की सूखापन सहित अन्य नेत्र रोगों को भी विटामिन ए में कमी से जोड़ा गया है। शकरकंद, विटामिन सी और ए दोनों का एक महत्वपूर्ण स्रोत होता है। भारत में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि विटामिन सी की कमी और मोतियाबिंद के विकास के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध होता है। साथ ही अन्य अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि विटामिन सी और ए दोनों ही ऑक्सीडेटिव तनाव से लड़ने में प्रभावी हो सकते हैं, जो अक्सर आंखों के मोतियाबिंद का कारण बनता है।

शकरकंद शरीर के वजन प्रबंधन में मददगार

शकरकंद में घुलनशील और किण्वनीय फाइबर होते हैं जो भोजन करने के बाद होने वाले तृप्ति के अहसास को बढ़ाते हैं और शरीर को शरीर के वजन प्रबंधन के लिए एक प्राकृतिक, आत्मनिर्भर तंत्र प्रदान करते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि मीठे आलू में मौजूद सबसे प्रमुख घुलनशील आहार फाइबर में से एक पेक्टिन नामक तत्व होता है जो कि भोजन का सेवन कम करने, वजन बढ़ने से रोकने और शरीर में संतृप्त हार्मोन की गतिविधि को बढ़ाने में प्रभावी होता है। वैज्ञानिक अध्ययनों से यह भी पता चला है कि फाइबर का अधिक सेवन का सीधा संबंध शरीर के वजन को नियंत्रित करने से होता है शकरकंद खाने से शरीर में फाइबर की मात्रा बढ़ जाती है जिससे शरीर के अधिक बढ़े हुए वजन को कम करने में सहायता मिलती है।

शकरकंद याददाश्त बढ़ाने में भी फायदेमंद

अध्ययनों से पता चला है कि बैंगनी रंग वाले शकरकंद में मौजूद एंथोसाइनिन में स्मृति बढ़ाने वाले गुण होते हैं। इसी कारण यह माना जाता है कि एंथोसायनिन के एंटीऑक्सीडेंट गुण, मीठे आलू या शकरकंद में याददाश्त बढ़ाने वाले एजेंट बनाते हैं। नियमित रूप से शकरकंद का सेवन आपकी याददाश्त को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

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