जानिये असाधारण गुणों से भरपूर हल्दी से होने वाले 13 अनोखे फायदे

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हल्दी में ऐसे बहुत सारे स्वास्थ्य को लाभ देने वाले गुण भरपूर मात्रा में हैं जो आपकी त्वचा, आपके दिल, आपकी हड्डियों और जोड़ों, आपकी इम्युनिटी और आपके मूड को बेहतर बना सकता है! आइये जानते हैं कि हल्दी कितने अद्भुत और असाधारण गुणों से भरा हुई है –

Table Of Contents
  1. हल्दी शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को सही स्तर पर रखने में मदद करती है
  2. हल्दी हृदय के स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है
  3. हल्दी तनाव सहनशीलता को बढ़ाती है
  4. हल्दी जोड़ों को स्वस्थ रखने में सहायता करती है
  5. हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होता है
  6. हल्दी कैंसर के जोखिम को कम करती है
  7. हल्दी पाचन क्रिया में भी सहायता करती है
  8. हल्दी वजन घटाने में भी मदद करती है
  9. हल्दी आपके मूड को भी सुधारने में मदद करती है
  10. हल्दी त्वचा की चमक को बढ़ावा देती है
  11. हल्दी मस्तिष्क के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखती है
  12. हल्दी हमारे शरीर की जीवन शक्ति में अधिक सुधार करती है
  13. हल्दी शरीर में मेटाबोलिज्म और रक्त में शर्करा के सही स्तर बनाए रखने में मदद करती है

हल्दी शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को सही स्तर पर रखने में मदद करती है

शरीर में उच्च कोलेस्ट्रॉल का कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को माना जाता है, जो शरीर में स्थाई सूजन और उच्च रक्तचाप के कारण पैदा होता है। तो इसका यह मतलब हुआ कि शरीर में स्थाई सूजन को कम करने के लिए किए गए प्रयास कोलेस्ट्रोल को भी उसके सही स्तर पर रखने में मदद करते हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि करक्यूमिन, पर्चे पर लिखी गई दवा लिपिटर की तुलना में ज्यादा सक्षम है, जिसे एंडोथेलियल डिस्फंक्शन के कारण हुई सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मानव वॉलिंटियर द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 500 मिलीग्राम दैनिक रूप से करक्यूमिन लेने से वह अपने कुल कोलेस्ट्रॉल को 11.63% तक कम कर सकते हैं जबकि उनका एचडीएल (‘अच्छा’ कोलेस्ट्रॉल) केवल 7 दिनों में 29% बढ़ गया।

हल्दी हृदय के स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है

हल्दी में पाए जाने वाले विशेष गुण हृदय प्रणाली के समग्र स्वास्थ्य के लाभकारी होते हैं। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम कुछ ऐसी जीवनशैली अपना लेते हैं जो हमारे हृदय के लिए घातक हो जाती हैं। कई बार तो स्थितियां भी ऐसी होती हैं जो हृदय रोग का कारण बन जाती हैं। हृदय रोग एक ऐसी बीमारी है जो दुनिया में मौत का सबसे पहला कारण है। जैसा कि हम पहले भी चर्चा कर चुके हैं कि स्थाई सूजन या फिर क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन हृदय से जुड़ी बीमारियों में मुख्य भूमिका निभाती है। इसलिए ऐसी स्थिति में हल्दी लेना जिसमें कि एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण होता है, दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक से शरीर की रक्षा करने में सक्षम होती है। करक्यूमिन के सबसे दिलचस्प लाभों में से एक यह है कि यह रक्त वाहिकाओं की लाइनिंग में किस प्रकार सुधार करता है (जिसे एंडोथेलियम के नाम से भी जाना जाता है)। जब एंडोथेलियम ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो यह रक्तचाप और थक्कों को ठीक से नियंत्रित नहीं कर पाता, जिसके कारण हृदय रोग की संभावना बनती है। हम सभी ने सुना है कि व्यायाम दिल के लिए अच्छा है, है ना? एक अध्ययन से यह भी पता चला है कि करक्यूमिन लेना, संवहनी एंडोथेलियल फंक्शन को बेहतर बनाने में एरोबिक व्यायाम जितना ही प्रभावी होता है।

हल्दी तनाव सहनशीलता को बढ़ाती है

एक adaptogen के रूप में, यह शरीर पर हर रोज के तनाव के प्रतिकूल प्रभाव का मुकाबला करने में मदद करती है। यदि आप तनाव महसूस करते हैं, तो adaptogens आपका सबसे अच्छा दोस्त होना चाहिए! हर्बल चिकित्सा में, कुछ वनस्पति को “adaptogens” कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि वे अधिवृक्क ग्रंथियों से तनाव हार्मोन को निकालने की क्षमता रखते हैं। यह आपको शारीरिक और भावनात्मक रुप से तनाव को सामना करने के लिए अनुकूल करने में मदद करता है जिसके कारण आप अपने रास्ते में आने वाले किसी भी प्रकार के तनाव का सामना करने के लिए तैयार हो जाते हैं। ये आपके हार्मोन को संतुलित रखने में भी मदद करते हैं। हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन एक प्रकार का adaptogen है जो शरीर में तनाव हार्मोन के स्राव को कम करने की क्षमता रखता है। 2011 में, भारत में शोधकर्ताओं ने पाया कि हल्दी में कई एडाप्टोजेनिक गुण पाए जाते हैं जो शरीर के वजन, मेमोरी, ब्लड शुगर और इसके अलावा शरीर में स्वस्थ हार्मोन के स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं।

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हल्दी जोड़ों को स्वस्थ रखने में सहायता करती है

साथ ही यह समग्र शरीर के संयुक्त स्वास्थ्य और गतिशीलता को बढ़ावा देने में भी फायदेमंद है। करक्यूमिन नामक घटक, हल्दी में उसके एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण को बढ़ाने के साथ जोड़ों में होने वाले दर्द, सूजन, आदि से राहत देने में भी मदद करता है। यह रुमेटीइड के दर्द से पीड़ित रोगियों पर एक वैज्ञानिक अध्ययन में प्रदर्शित किया गया है। रुमेटीइड गठिया (आरए) का संबंध एक स्थाई सूजन के साथ है, जो जोड़ों में दर्दनाक सूजन का कारण बनता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि 500 मिग्रा करक्यूमिन आरए के रोगियों को दिए जाने वाले पर्चे की दवा डाइक्लोफेनाक की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी सिद्ध हुआ है। जब बात आपके जोड़ों के दर्द की आती है तो हल्दी का नाम सबसे पहले आता है क्योंकि यह सबसे प्रभावी होने के साथ ही साथ आपके जोड़ों को स्वस्थ, दर्द-मुक्त और गतिशील रखने के लिए एक अत्यंत अचूक उपायों में एक साबित होती है। इसका नियमित इस्तेमाल आपको अपने जोड़ों के दर्द के लक्षण आने से पहले ही उसे पूरी तरह से खत्म कर सकता है। कुछ अध्ययनों से यहभी पता चला है कि हल्दी ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में भी मदद कर सकती है।

हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होता है

हल्दी में पाया जाने वाला सक्रिय तत्व कर्क्यूमिन, एक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी योगिक है जो शरीर में स्वस्थ सूजन प्रतिक्रियाओं को बनाए रखने में मदद करता है। विदेशों में खाए जाने वाले आहार (बहुत सारे प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ, चीनी और शराब जैसा कि हम सब जानते हैं) शरीर में ‘स्थाई सूजन’ का कारण बनते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि यह स्थाई सूजन वास्तव में आपके शरीर को धीरे-धीरे खत्म कर देती है, हम इसे मूक हत्यारा भी कह सकते हैं, क्योंकि यह शरीर को हृदय रोग, कैंसर, अल्जाइमर और यहां तक कि मोटापा जैसी बीमारियों के लिए सही मेजबान बनाती है। इसी कारण आप इस स्थाई सूजन को कम करने के लिए सब कुछ करना चाहते हैं, जिसके कारण आप अनप्रोसैस्ड खाना और यहां तक कि हरी सब्जियां और फलों विशिष्ट मसालों (जैसे हल्दी) आदि को खाना शुरू कर देते हैं क्योंकि इस प्रकार का खाना आपके शरीर के इन्फ्लेमेशन को कम करता है साथ ही उनसे लड़ने के लिए शरीर को तैयार भी करता है। हल्दी में पाया जाने वाला एक घटक करक्यूमिन है, जिसे कि वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया गया है कि यह शरीर में सूजन को कम करने के लिए कुछ ओवर-द-काउंटर दवाओं के रूप में प्रभावी होता है।

हल्दी कैंसर के जोखिम को कम करती है

हल्दी में मौजूद करक्यूमिन में कैंसर-रोधी गुण ट्यूमर के विकास को रोकते हैं और कैंसर के प्रसार को कम करने में मदद करतें हैं। पशुओं के ऊपर की गए अनुसंधान इस तरफ इंगित करतें हैं कि करक्यूमिन वास्तव में ट्यूमर कोशिकाओं को मारने और ट्यूमर के विकास को रोकने की क्षमता रखता है। यह शरीर में कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। जब बात कैंसर के शुरू होने से पहले ही उसे रोकने की की जाए तो मानव पर किए गए शोध अध्ययन में पाया गया है कि रोजाना 4 ग्राम करक्यूमिन लेने से कोलन में होने वाले प्रीकेंसरियस घावों की संख्या 40% तक कम की जा सकती है। शोध बताते हैं कि स्तन कैंसर, आंत्र कैंसर, पेट के कैंसर और त्वचा के कैंसर में करक्यूमिन सबसे अधिक फायदेमंद होती है। एक और 2017 के अध्ययन में पाया गया कि करक्यूमिन ने अग्नाशय के कैंसर में कीमोथेरेपी में ट्यूमर संवेदनशीलता को बढ़ाते हुए देखा गया है, यह दर्शाता है कि यह कीमो-प्रतिरोध का मुकाबला करने में उपयोगी है।

हल्दी पाचन क्रिया में भी सहायता करती है

कभी-कभी अपच से संबंधित सूजन और गैस के लक्षणों को कम करने में हल्दी कारगर सिद्ध होती है। हल्दी का उपयोग सदियों से आयुर्वेदिक चिकित्सा में पाचन में सुधार और आंतों की सूजन को ठीक करने के लिए किया जाता रहा है। जिसका मुख्य कारण इसकी प्रकृति एक एंटी इन्फ्लेमेटरी के रूप में होना है। साथ ही हल्दी में मौजूद करक्यूमिन पित्ताशय को उत्तेजित करता है, जिससे आपके शरीर को भोजन के पाचन की क्रिया में सुधार आता है। एक अध्ययन में पाया गया कि हल्दी अपच के शिकार लोगों में सूजन और गैस के लक्षणों को कम करने की क्षमता रखती है। कुछ शोध से यह भी पता चलता है कि करक्यूमिन अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित लोगों की मदद करता है।

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हल्दी वजन घटाने में भी मदद करती है

करक्यूमिन अधिक वजन वाले लोगों को सकारात्मक रूप से उनके वजन प्रबंधन में मदद करती हैं। कई बार अचानक वजन बढ़ने का कारण आपका बढ़ा हुआ तनाव होता है। जब तनाव से जुड़ा हार्मोन “कोर्टिसोल” शरीर में निकलता है तो पेट के आसपास वसा जमा होने की संभावना बढ़ जाती है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पेट की कोशिकाएं कोर्टिसोल के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, और ऊर्जा भंडारण करने में अधिक क्रियाशील हो जाती हैं। हल्दी आपके तनाव हार्मोन को संतुलित करने में मदद कर सकती है, यह आपकी कमर के चारों ओर बनने वाले मोटापे को रोकने में मदद कर सकती है। करक्यूमिन में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मोटापे से भी लड़ने में सक्षम होतें हैं। एक अध्ययन में वास्तव में पाया गया कि करक्यूमिन लेने से वसा कोशिकाओं की वृद्धि कम हो सकती है।

हल्दी आपके मूड को भी सुधारने में मदद करती है

हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन, आपके मूड आए परिवर्तन के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हल्दी में मौजूद करक्यूमिन ब्रेन-बिल्डर प्रोटीन BDNF को बढ़ाता है, जो कि अवसाद को रोकने में मदद करता है। करक्यूमिन, मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामाइन – दो ऐसे रसायन जिन्हें ‘खुशी का रसायन’ कहा जाता है, को भी बढ़ावा देता है। यह उन लोगों की मदद करने में कारगर सिद्ध होता है जो पहले से ही अवसाद जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। एक अध्ययन में, अवसाद से ग्रसित 60 लोगों को प्रोज़ैक या करक्यूमिन या दोनों का कॉम्बो दिया गया। जिन लोगों ने सिर्फ करक्यूमिन का सेवन किया, उनमें प्रोज़ैक के साथ-साथ उनके मूड में सुधार हुआ। जबकि 6 सप्ताह के अध्ययन के दौरान उन लोगों ने जिन्होंने दोनों का कॉम्बो लिया था, सबसे अच्छा परिणाम दिया।

हल्दी त्वचा की चमक को बढ़ावा देती है

उचित मात्रा में पोषण प्रदान करके, यह आपकी त्वचा को अधिक चमकदार और स्वस्थ दिखने वाली बनाने में मदद करती है। हल्दी एक एंटी-एजिंग गुणों का पावरहाउस कहा जाता है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होता है -जो कि ऑक्सीडेटिव क्षति से लड़ सकता है और त्वचा के समग्र स्वरूप को बढ़ा सकता है। इसमें पाया जाने वाला एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में होने वाले बदलावों से भी लड़ने की क्षमता रखता है। 2016 में किए गए अध्ययनों अध्ययनों के अनुसार वैज्ञानिकों की समीक्षा में पाया गया कि हल्दी में त्वचा से जुड़ी कई परेशानियों को सुधारने की क्षमता होती है, इसका इस्तेमाल सीधे त्वचा पर लगाकर भी किया जाता है।

हल्दी मस्तिष्क के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखती है

स्वस्थ संज्ञानात्मक कार्य और काम करने वाली स्मृति को बनाए रखने में हल्दी बहुत मदद करती है। करक्यूमिन मस्तिष्क में BDNF नामक एक प्रोटीन को बढ़ावा देने की अद्भुत क्षमता रखता है। यह महत्वपूर्ण प्रोटीन – मस्तिष्क-व्युत्पन्न न्यूरोट्रॉफिक कारक (BDNF) मस्तिष्क को बढ़ने में मदद करने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। यह न्यूरॉन्स को बढ़ाने और मस्तिष्क में नए कनेक्शन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है -यह वास्तव में वह दो चीजें हैं जिनकी हमें उम्र के बढ़ने के साथ सबसे ज्यादा जरूरत होती है। BDNF आपके मस्तिष्क में वह ‘सड़क मार्ग’ बनाता है जिस पर सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर अधिक आसानी से यात्रा करके वहां पहुंचते हैं जहां उनके पहुंचने की आवश्यकता होती है। इसी कारण BDNF का उच्च स्तर सीधा आपकी स्मृति और मूड से जोड़ा जाता है… और जब BDNF का स्तर कम होता है तो अल्जाइमर और अवसाद जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

हल्दी हमारे शरीर की जीवन शक्ति में अधिक सुधार करती है

इसके शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर में पाए जाने वाले अतिरिक्त मुक्त कणों से लड़ते हैं जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा कर हमारे स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते हैं। एंटीऑक्सिडेंट शरीर में मुक्त कणों को खत्म करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं हैं जो कैंसर, न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग और अन्य विकारों को जन्म दे सकते हैं। हल्दी में करक्यूमिन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है। साथ ही करक्यूमिन की एक विशेषता यह भी है कि यह आपके शरीर में एंटीऑक्सिडेंट एंजाइम को बढ़ावा देता है, जिससे आपको और भी अधिक लाभ मिलते हैं।

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हल्दी शरीर में मेटाबोलिज्म और रक्त में शर्करा के सही स्तर बनाए रखने में मदद करती है

हल्दी का उपयोग आयुर्वेदिक और पारंपरिक चीनी चिकित्सा में वर्षों से मधुमेह जैसी बीमारी के इलाज के लिए किया जाता है। 2013 के वैज्ञानिक अध्ययनों की समीक्षा में यह पाया गया है कि करक्यूमिन रक्त में ग्लूकोज के स्तर को स्थिर करता है और मधुमेह से संबंधित जटिलताओं से निपटने में भी मदद करता है। एक अध्ययन में, 100 ऐसे लोग जो टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित होने के साथ ही मोटापे के भी शिकार भी थे, उन्हें 12 सप्ताह के लिए 300 मिलीग्राम करक्यूमिन दिया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि कर्क्यूमिन लेने वालों में रक्त शर्करा का फास्टिंग का स्तर काफी कम था। कुछ अनुसंधानकर्ताओं का यह सुझाव भी है कि कर्क्यूमिन उच्च जोखिम वाले मधुमेह के रोगियों में मधुमेह के विकास के जोखिम को कम कर सकता है। 2012 के एक अध्ययन में, 9 महीने तक करक्यूमिन एक्सट्रैक्ट लेने वाले सभी प्रतिभागियों में डायबिटीज को बढ़ते हुए नहीं देखा गया, हालांकि यह सभी प्री-डायबिटिक थे। जबकि प्लेसिबो लेने वाले 16% प्री-डायबिटिक प्रतिभागियों में 9 महीनों के बाद डायबिटीज के स्तर को बढ़ता हुआ नोटिस किया।

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