जानिये 12 राशियों के 12 ज्योतिर्लिंग (और उनके मन्त्र भी)

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12 JYOTIRLING

पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रकट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। शतरुद्र संहिता, अध्याय ४२/२-४ के अनुसार 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम और स्थान हैं इस लिख में प्रस्तुत हैं. हिंदुओं में ऐसी मान्यता है कि जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम लेता है, उसके सभी पाप इन लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है।

किसी की जन्म कुंडली में यदि कोई ग्रह ‘मरण कारक स्थान’ में हो या नीच की अवस्था में हो तो यह ग्रह जिस राशी में उच्च की अवस्था में होता है उस राशी से सम्बंधित ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. इससे उस ग्रह की शांति होती है. (ग्रहों के मरण कारक स्थान इस प्रकार हैं: सूर्य – 12, चन्द्र – 8, मंगल – 7, बुध – 7, बृहस्पति – 3, शुक्र – 6, शनि – 1, राहु  – 9)

कुंडली में भ्रात्री कारक ग्रह ‘गुरु’ को दर्शाता है. यह ग्रह नवांश कुंडली के जिस राशी में विद्यमान हो, उस राशी से सम्बंधित ज्योतिर्लिंग की पूजा करने से कष्ट कम होते हैं. कुंडली में भ्रात्री कारक ग्रह वो ग्रह होता है जिसका अक्षांश (LATITUDE) नौ ग्रहों में तीसरा सबसे अधिक होता है.

मेष (ARIES)

मेष राशि वाले जातकों को रामेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. रामेश्वर ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु में भगवान राम द्वारा स्थापित है.

रामेश्वरम मेष राशी के ज्योतिर्लिंग हैं जो सूर्य के उच्च होने का स्थान है. हमारे जीवन में सूर्य का अर्थ होता है आत्मा, सत्य और राजस. यह वो राशि है जहां सूर्य में सबसे अधिक ऊर्जा होती है.

मंत्र: ॐ नमः शिवाय नमो रामेश्वराय

वृष (TAURUS)

वृष राशि वालों को सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के सोमनाथ देव की अर्चना करनी चाहिए. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र (काठियावाड़) के वेरावल बंदरगाह में है. कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था.

१०२२ ई में इसकी समृद्धि को महमूद गजनवी के हमले से सर्वाधिक नुकसान पहुँचा था। इस प्रसिद्ध मंदिर को अतीत में छह बार ध्वस्त एवं निर्मित किया गया है।

वृष राशी चन्द्र का उच्च स्थान है. यह अछे स्वास्थ्य, रोग प्रतिरोधक क्षमता, मन, सुख, माता और रस का कारक है.

मंत्र: ॐ नमः शिवाय नमो सोमनाथाय

मिथुन (GEMINI)

मिथुन राशि वालों को गुजरात के द्वारका जिले में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. यह गुजरात के द्वारका जिले में स्थापित है.

इस ज्योतिर्लिंग का नाम नागों के राजा के नाम पर है. जैमिनी ज्योतिष पद्धति में इस राशी को राहु के लिए उच्च माना जाता है. इस की पूजा से बहुत अधिक संख्या में लोगों को वशीभूत किया जा सकता है. पराक्रम भी बढ़ता है और ताकत भी.

मंत्र: ॐ नमः शिवाय नमो नागेश्वराय

कर्क (CANCER)

कर्क राशि वाले जातकों को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा तट पर बसा है. यह मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के बीच मन्धाता व शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित है. यहां ॐकारेश्वर और मामलेश्वर दो पृथक-पृथक लिंग हैं, परन्तु ये एक ही लिंग के दो स्वरूप हैं। श्रीॐकारेश्वर लिंग को स्वयंभू समझा जाता है।

ये ज्योतिर्लिंग ॐ के नाद से उत्पन्न हैं. कभी कभी इस ज्योतिर्लिंग को श्री गणेश से सम्बंधित भी देखा जाता है. यह राशी बृहस्पति का उच्च स्थान है. इस के पूजन से गुरु का आशीर्वाद, उच्च ज्ञान, सुख और सौभाग्य मिलता है.

मंत्र: ॐ नमः शिवाय नमो ओम्कारेश्वराय

सिंह (LEO)

सिंह राशि वाले व्यक्तियों को महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित गिरीशनेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. इनका स्थान महाराष्ट्र प्रांत में दौलताबाद स्टेशन से बारह मील दूर बेरूल गांव के पास है। इन्हें धुशनेश्वर भी कहते हैं.

ये तपस्वियों के राजा के नाम पर है. इनमें पुराने पापों को क्षमा करने की प्रवृत्ति है.

मंत्र: ॐ नमः शिवाय नमो धुशनेश्वराय

कन्या (VIRGO)

कन्या राशि के व्यक्तियों को मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. इसे दक्षिण का कैलाश कहते हैं। आन्ध्र प्रदेश प्रांत के कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तटपर श्रीशैल पर्वत पर श्रीमल्लिकार्जुन विराजमान हैं।

ये भक्त शिरोमणि के नाम पर है. यह बुध ग्रह का उच्च स्थान है.

मंत्र: ॐ नमः शिवाय नमो मल्लिकार्जुनाय

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Image Courtesy: patrika.com

तुला (LIBRA)

तुला राशि वाले जातक को महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की आराधना करनी चाहिए. महाकालेश्वर कालों के काल हैं. यह मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में क्षिप्रा नदी के तटपर पवित्र उज्जैन नगर में विराजमान है।

यह शनि देव का उच्च स्थान है. शनि देव समय का संचालन करते हैं. ज्योतिषी इस ज्योतिर्लिंग में जाकर समय का ज्ञानार्जन करते हैं. समय (काल) से बढ़ कर कुछ भी नहीं है. देवता भी काल के वश में हैं.

मंत्र: ॐ नमः शिवाय नमो कालेश्वराय

वृश्चिक (SCORPIO)

वृश्चिक राशि के जातकों को बाबा वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. यह झारखण्ड के देवघर में स्थित है.

वैद्यनाथ दैविक चिकित्सक के नाम पर है. यहाँ आकर शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास होता है और क्षति पूर्ती होती है. कुण्डलिनी के उत्थान के लिए इस ज्योतिर्लिंग की आराधना आवश्यक है.

मंत्र: ॐ नमः शिवाय नमो वैद्य्नाथाय

धनु (SAGITTARIUS)

धनु राशि के व्यक्तियों को वाराणसी स्थित काशी विश्‍वनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. यह बनारस (जो विश्व का सबसे पुराना जीवित शहर है और जिसे वाराणसी भी कहते हैं) में गंगा नदी के पश्चिमी तट पर बसा हुआ है.

विश्वनाथ सभी देवताओं के राजा हैं. जैमिनी अनुसार ये केतु का उच्च स्थान है. आत्मा की मुक्ति के लिए इस ज्योतिर्लिंग की आराधना उपयुक्त है.

मंत्र: ॐ नमः शिवाय नमो विश्वनाथाय

मकर (CAPRICORN)

मकर राशि वाले जातकों को भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पूणे से लगभग 100 किमी दूर सहाद्रि नामक पर्वत पर स्थित है और मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है.

यह मंगल का उच्च स्थान है. यह ज्योतिर्लिंग शिव को अतुलनीय योद्धा दर्शाता है, चाहे रामायण में हनुमान हों या महाभारत में भीम.

मंत्र: ॐ नमः शिवाय नमो भीमशंकराय

कुम्भ (AQUARIUS)

कुम्भ राशि वाले लोगों को उत्तराखंड स्थित केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग केदार नामक एक पर्वत पर और पहाड़ों के पूर्वी ओर नदी मंदाकिनी के स्त्रोत पर, हिमालय पर स्थित है.

यह राहू और शनि का स्थान है. जीवन से अन्धकार और दुविधा दूर करने के लिए इनकी आराधना उपयुक्त है.

मंत्र: ॐ नमः शिवाय नमो केदारनाथाय

मीन (PISCES)

मीन राशि के लोगों को त्रयम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग की पूजा करनी चाहिए. त्रयम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग नासिक में स्थित है. यह नासिक जिले में पंचवटी से 18 मील की दूरी पर ब्रह्मगिरि के निकट गोदावरी के किनारे है। इस स्थान पर पवित्र गोदावरी नदी का उद्गम भी है।

यह शिव जी के तीन नेत्रों का स्थान है. यहाँ शुक्र उच्च के माने जाते हैं. मृत्युंजय मंत्र इस ज्योतिर्लिंग से सम्बंधित है. इनकी पूजा असाध्य रोगों से लड़ने में की जाती है.  जन्म्म मरण के चक्र से छूटने के लिए भी इनकी पूजा विशेष है.

मंत्र: ॐ नमः शिवाय नमो त्रयम्बकेश्वराय

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्त्रोत

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥

परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्। सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥

वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे। हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥

एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः। सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥

एतेशां दर्शनादेव पातकं नैव तिष्ठति। कर्मक्षयो भवेत्तस्य यस्य तुष्टो महेश्वराः॥

इस स्त्रोत का नित्य प्रति या हर सोमवार को पाठ करने से बहुत अच्छा फल मिलता है. दुःख और रोग नष्ट होते हैं, जीवन में मार्ग मिटा है. जो मनुष्य प्रतिदिन प्रातः इन ज्योतिर्लिंगों का नाम जपता है उसके पाप नष्ट हो जाते हैं। जिस कामना की पूर्ति के लिए मनुष्य इस स्त्रोत का पाठ करता है, शीघ्र ही उस फल की प्राप्ति हो जाती है।

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