चिंता (एंग्जाइटी) और पैनिक अटैक से मुक्ति पाने के 11 प्रभावी उपाय

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anxiety and panic attack

अपनी चिंता को शांत करने के लिए कई प्रकार के तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। आप यह जानते ही होंगे कि जब आप किसी तनावपूर्ण स्थिति का सामना करते हैं तो आपके दिल की धड़कन सामान्य स्थिति की तुलना में अधिक तेज हो जाती है। इसी प्रकार की स्थिति का सामना आप उस समय भी करते हैं जब आप किसी तनावपूर्ण कार्य को करते हैं या फिर किसी ऐसी घटना से आपका सामना होता है जो कि अत्यंत तनावपूर्ण होती है, तो आपकी हथेलियों से अत्यधिक पसीना आना शुरू हो जाता है।

‘चिंता करना इसे ही कहा जाता हैं- जब हमारा शरीर किसी भी तनाव के प्रति इस प्रकार की प्रतिक्रिया देने लगता है।’
यदि आप अब तक अपने अंदर इस प्रकार के किसी भी कारण को जानने में विफल रहे हैं तो आप इस विषय में उल्लेखित कुछ सामान्य कारणों के बारे में जानकर, आप यह पता लगा सकते हैं कि आपका किस प्रकार की चिंता से सामना होता रहता हैं। इस विषय में कुछ रोजमर्रा के जीवन में आने वाले कारण है, जैसे कि किसी नई नौकरी पर आपका पहला दिन, अपने पति की या पत्नी के परिवार से पहली मुलाकत होना या फिर कई सारे लोगों के सामने अपने आप को प्रदर्शित करना, हर किसी का इस संबंध में अलग-अलग प्रकार का स्वभाव होता है और हर इंसान किसी ना किसी प्रकार से इस प्रकार की स्थिति से अपने आप को इस विषय में जुड़ा हुआ महसूस करता है। इस प्रकार इन कारणों का पता लगाना, इस समस्या से छुटकारा पाने की तरफ आपकी पहली कोशिश हो सकता है और यह अपने आप में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम होता है। जिसके माध्यम से आप इस प्रकार चिंता के कारण आने वाले आघात से निबटने के लिए स्वयं की जीवन शैली में कुछ बदलाव ला सकते हैं और इस प्रकार की समस्याओं का सही ढंग से प्रबंधन करके इनसे छुटकारा पा सकते हैं। अपने अंदर इस समस्या का पता लगाना और एक निश्चित ट्रिगर बिंदु को निर्धारित करने में कुछ समय लग सकता है और इसके लिए आपको अपनी आदतों का पूर्ण रूप से निरीक्षण करना जरूरी है।

चिंता से छुटकारा पाने के 5 त्वरित उपाय

  • टहलने के लिए जाएं या फिर 15 मिनट के लिए योग करें

कई बार चिंता से छुटकारा पाने का सबसे उत्तम तरीका होता है कि आप उस समस्या से दूरी बना लें, जिस समस्या की वजह से आपके दिमाग के अंदर चिंता उठ रही है। कुछ समय के लिए अपने शरीर पर ध्यान देने का प्रयास करें तथा अपने दिमाग की सभी सोच को रोक दें। इस प्रकार यह प्रक्रिया आपकी चिंता में कमी लाने में काफी हद तक सफल साबित होगी।

  • अपने सोचने के तरीकों को परखना

नकारात्मक सोच का उत्पन्न होना, हमारे लिए एक बड़ी समस्या है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि हमारे दिमाग में जब किसी भी विषय को लेकर कोई नकारात्मक सोच उत्पन्न होने लगती है तो यह उस विषय से जुड़ी हुई समस्या की परेशानियों को और भी अधिक बढ़ा देती है। इस चीज से छुटकारा पाने का एक सबसे आसान तरीका है कि आप अपने अंदर उत्पन्न होने वाली इस सोच को एक चुनौती के रूप में लें और इस प्रकार जानने का प्रयास करें कि आप इस प्रकार की सोच के ऊपर कैसे नियंत्रण हासिल कर सकते हैं।

  • केंद्रित होने और गहरी सांस लेने का अभ्यास करना

अपने आप को चीजों के प्रति केंद्रित करना बहुत लाभदायक होता है। किसी भी चिंता की स्थिति में अपने आप को शांत करने के लिए गहरी सांस लेना हमें अंदर से काफी शांत करता है। उंगलियों पर चार बार गिन कर सांस लें और फिर चार बार गिन कर उस सांस को बाहर निकाल दें और इस प्रकार यह प्रक्रिया 5 मिनट के लिए करें। इस प्रकार आप अपने अंदर, स्वयं के मन को शांत कर पाएंगे और आप पाएंगे कि आपके दिल की धड़कन कुछ सामान्य होने की तरफ बढ़ रही है। जिसकी वजह से आप अपने आप को शांत कर पाने में और जल्दी सफल होंगे। इस विषय में 4-7-8 प्रक्रिया को भी काफी उपयुक्त समझा जाता है, जिससे चिंता की समस्या में काफी राहत मिलती है।

  • अपनी सोच को लिखना आरंभ करें

अपनी सोच को लिखना, चिंता दूर करने के विषय में काफी फायदेमंद साबित होता है। इस प्रकार अपनी सोच को लिख देने से आपकी कई प्रकार की चिंताएं आपके दिमाग से बाहर निकल जाती हैं और यह आपको शांति प्रदान करतीं हैं।

  • अरोमा थेरेपी का इस्तेमाल करना

अरोमा थेरेपी का इस्तेमाल चाहे तेल के रूप में किया जाए या फिर किसी खुशबू के रूप में अथवा मोमबत्तियों के द्वारा, या फिर किसी भी प्रकार की खुशबू जैसे कि चमेली, चंदन इत्यादि, यह काफी शांति देने वाली थेरेपी होती है। अरोमा थेरेपी, वास्तव में हमारे दिमाग में मौजूद कई प्रकार के उन तत्वों को सक्रिय करने का प्रयास करती है जो हमें शांति प्रदान करते हैं।

इस प्रकार यह प्रक्रिया उन लोगों के लिए बहुत ही अधिक फायदेमंद हैं जो कभी-कभी अत्यधिक चिंता की समस्या का सामना करते हैं। यह प्रक्रिया उन लोगों के लिए भी लाभदायक सिद्ध होती है जिन्हें “जनरलाइज एंक्साइटी डिसऑर्डर” अथवा सामान्यीकृत चिंता विकार (जी.ए.डी.) होता है। इस समस्या से पीड़ित लोग कई बार जाने अनजाने कई प्रकार की चिंताओं का सामना करते हैं और इस समस्या के कारण वह लोग अपने आप को एक बंधन में बंधा महसूस करने लगते हैं, उनके लिए यह प्रक्रिया काफी लाभदायक हो सकती हैं। हालांकि यदि आपको इस बात का संशय है कि आप “जनरलाइज एंक्साइटी डिसऑर्डर” अथवा सामान्यीकृत चिंता विकार (जी.ए.डी.) से पीड़ित हैं या नहीं, तो केवल इस प्रकार के छोटे-छोटे उपाय और ऊपर दिए गए त्वरित उपाय आपके लिए संतोषजनक परिणाम नहीं दे पाएंगे। इसके लिए आपको लंबी चलने वाली प्रक्रियाओं का प्रयोग करना होगा। जिसकी वजह से इस समस्या के कारण उत्पन्न हो रहे लक्षणों को कम किया जा सके और समय से पूर्व इस प्रकार की समस्याओं के कारण उत्पन्न होने वाली अनहोनियों को रोका जा सके।

चिंता से छुटकारा पाने के लिए 6 लंबी रणनीतियां

यदि चिंता आपके जीवन का नियमित रूप से होने वाला भाग बन चुकी है तो आपको इसके लिए तुरंत ही इलाज के माध्यम से इसका हल खोजना चाहिए और इलाज के लिए बनाई गई रणनीतियों के द्वारा इस स्थिति को अपने नियंत्रण में रखने का प्रयास करना चाहिए। इस प्रकार के इलाज के अंदर कई प्रकार की चीजों का मिलाजुला रूप इस्तेमाल किया जा सकता है जैसे कि बात करने की थेरेपी और ध्यान करना। यह केवल एक आपकी चिंता करने की समस्या का या फिर चिंता आरंभ होने से पहले मिलने वाले ट्रिगर का हल हो सकता है। यदि आप इस बात को लेकर निश्चित नहीं है कि आपको कहां से शुरुआत करनी चाहिए तो यह सबसे उत्तम उपाय यह होगा कि आप किसी मानसिक स्वास्थ्य कर्मी अथवा विशेषज्ञ से सलाह मशवरा करें, जो आप से सलाह मशविरा करने के उपरांत कुछ ऐसे उपाय बताएंगें जिन्हें आपने पहले कभी नहीं सोचा होगा।

चिंता के ट्रिगर का पता लगाना और उनको ठीक ढंग से व्यवस्थित करना

चिंता के समय महसूस होने वाले ट्रिगर का पता आप अपने आप से लगा सकते हैं या फिर किसी विशेषज्ञ की सहायता लेकर आप इस बिंदु का पता लगा सकते हैं। कई बार इस प्रकार के उठने वाले ट्रिगर सच हो सकते हैं और जीवन में आने वाली कई घटनाओं के कारण उनका उठना स्वभाविक हो सकता है परंतु कई बार इसकी वजह कैफ़ीन, शराब और धूम्रपान की आदत भी हो सकती है। कई बार यह ट्रिगर स्पष्ट रूप में सामने दिखाई नहीं पड़ते हैं। लंबे समय तक चलने वाली परेशानियां जैसे कि आर्थिक समस्या या फिर किसी काम से जुड़ी हुई समस्या के वजह से आने वाली चिंताओं का निर्धारण होने में काफी समय लग सकता है। फिर चाहे यह किसी कार्य को पूरा करने से जुड़े तारीख हो या फिर किसी व्यक्ति की वजह से हो रहा हो या फिर किसी स्थिति की वजह से उत्पन्न हो रही हो। ऐसी स्थिति में आपको थोड़ी अधिक सहायता लेने की आवश्यकता पड़ सकती है, जिसे आप किसी थेरेपी या दोस्त के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। जब आप अपने अंदर चिंता से जुड़े ट्रिगर का पता लगा लेते हैं तो आपको उनके प्रति अपना स्वभाव संयमित करना चाहिए और यदि आप ऐसा कर सकते हैं तो आपको ऐसे ट्रिगर के प्रति अपनी सोच के ऊपर एक सीमा निर्धारित करनी चाहिए। यदि आप यह सीमा निर्धारित नहीं कर सकते हैं क्योंकि यह, किसी चिंताग्रस्त माहौल में काम करने के कारण उत्पन्न हो रही है जिसे आप वास्तव में नहीं बदल सकते हैं तो इस विषय में ऊपर दी गई प्रक्रियाओं का सहारा लिया जा सकता है।

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कुछ सामान्य ट्रिगर

  • तनावपूर्ण नौकरी या कार्य करने का माहौल होना
  • कार चलाना या फिर यात्रा करना
  • अनुवांशिक-चिंता, आपके परिवार में अनुवांशिक रोग से होना जो आदत अनुसार पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हो।
  • किसी विशेष प्रकार की दवाइयों से छुटकारा पाना या फिर उन्हें लेना बंद कर देना
  • कई प्रकार की दवाइयों के बुरे प्रभाव (साइड इफेक्ट)
  • चोट लगना
  • किसी चीज के प्रति फोबिया का होना, जैसे कि अगोराफोबिया (भीड़भाड़ और बहुत ही खुले स्थानों से डर लगना) और क्लस्ट्रोफोबिया (बहुत ही छोटे स्थानों से डर लगना)
  • कुछ खतरनाक बीमारियां जैसे कि दिल के रोग, मधुमेह और अस्थमा से पीड़ित होना या उनसे पीड़ित होने का डर होना
  • बहुत ही भयंकर दर्द का होना
  • किसी अन्य प्रकार की दिमागी समस्या होना जैसे कि किसी व्यक्ति का अवसाद से पीड़ित होना
  • अत्यधिक कैफीन का प्रयोग करना

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी को अपनाना

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी के माध्यम से चिंता (एंग्जाइटी) से पीड़ित लोग, कई प्रकार के सोचने के अलग तरीकों को खोजते हैं, जिसके माध्यम से वह अपनी एंग्जाइटी की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। इस संबंध में एक थैरेपिस्ट आपकी मदद कर सकता है। वह आपकी नकारात्मक सोच के तरीके को एक अच्छी और सकारात्मक सोच में बदलने में आपको सहायता प्रदान करता है।

अपने शरीर और दिमाग को स्वस्थ रखना

अपने शरीर और दिमाग को स्वस्थ रखकर भी आप एंग्जाइटी की समस्या से काफी हद तक बच सकते हैं। आपको नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए, अपने खानपान की आदत को बदलना चाहिए, भरपूर नींद लेनी चाहिए तथा अपने आसपास के लोगों से अच्छे संबंध बनाए रखने चाहिए, विशेषकर उन लोगों से जो की आपकी देखभाल करते हैं। इस प्रकार के तरीकों को अपनाकर आप एंग्जाइटी के विषय में दिखने वाले लक्षणों से छुटकारा पा सकते हैं।

रोजाना और नियमित रूप से ध्यान योग करना

ध्यान तथा योग करने के लिए हमें कुछ अभ्यास की जरूरत होती है। परंतु धीरे-धीरे हम इसे पूर्ण रूप से सीख सकते हैं। जब इस प्रकार ध्यान एवं योग को नियमित रूप से किया जाता है, तो यह आपके दिमाग को एंग्जाइटी की सोच से मुक्ति दिलवाने में अत्याधिक मदद करता है और जैसे ही इस प्रकार की सोच का हमारे दिमाग के अंदर जन्म होने लगता है तो हम अपने ध्यान एवं योग की शक्ति के द्वारा इस प्रकार की सोच को तुरंत ही नष्ट कर देते हैं। यदि आपके लिए सीधा और लंबे समय तक बैठना और केवल एक बिंदु के ऊपर ध्यान लगाना अत्याधिक कठिन है, तो आप इसके लिए साधारण योग से भी शुरुआत कर सकते हैं।

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अपने डॉक्टर से इस विषय में दवाइयों के बारे में पूछताछ करें

यदि आपकी एंग्जाइटी की समस्या बहुत ही अधिक बढ़ गई है और यदि आपके डॉक्टर को लगता है कि अब आपको दवाइयों का सहारा लेने की आवश्यकता है, तो आपके लिए कई प्रकार के रास्ते उपलब्ध हैं। जिनका आप के लक्षणों के आधार पर चुनाव किया जा सकता हैं। इसके लिए आपको तुरंत ही अपने डॉक्टर अथवा किसी विशेषज्ञ से विचार विमर्श करना चाहिए।

सप्लीमेंट का प्रयोग करना अथवा अपनी भोजन में बदलाव करना – सप्लीमेंट का प्रयोग करना या फिर अपनी भोजन में बदलाव करना, इस प्रकार की एंग्जाइटी की समस्या से छुटकारा पाने के लिए एक लंबे समय तक चलने वाला उपाय है। इस विषय में किए गए अध्ययन यह दिखाते हैं कि कुछ सप्लीमेंट और पोषक तत्व एंग्जाइटी की समस्या से छुटकारा दिलवाने में सहायता प्रदान करते हैं। हालांकि इस प्रकार के खाद्य पदार्थ का असर दिखने में 3 महीने तक का समय लग सकता है। यदि आप अन्य प्रकार की दवाइयों का भी प्रयोग कर रहे हैं तो इन सभी चीजों का इस्तेमाल करने से पहले आपको अपने आयुर्वेदिक सलाहकार से अवश्य सलाह लेनी चाहिए। इस प्रकार के सप्लीमेंट की जानकारी निम्नलिखित है:-

  • लेमन
  • बाम
  • ओमेगा-3, फैटी एसिड
  • अश्वगंधा
  • ग्रीन-टी
  • वैलेरियन रूट
  • कावा
  • डार्क चॉकलेट

मेरी एंग्जाइटी की समस्या कब नुकसानदायक बन सकती है?

आप किस प्रकार की एंग्जाइटी की समस्या का सामना कर रहे हैं, इसे निर्धारित करना कई बार बहुत मुश्किल कार्य हो जाता है। इसके पीछे का कारण यह है कि हर किसी व्यक्ति का शरीर इस संबंध में होने वाले खतरों के प्रति किस प्रकार की प्रतिक्रिया देता है वह वास्तव में बिल्कुल अप्रत्याशित होता है। इस विषय में दो लोगों की बिल्कुल अलग-अलग प्रकार प्रतिक्रियाएं भी हो सकती हैं। आपने यह सामान्य रूप से सुना होगा कि एंग्जाइटी के दौरान होने वाले लक्षण जैसे कि बहुत ही अधिक चिंता का होना, उदास होना या फिर अपने शरीर के अंदर स्वयं को सामान्य महसूस ना होना, इत्यादि प्रकार के लक्षण आम रूप से होते हैं। कई बार किसी होने वाली घटना को सोच कर भी कोई व्यक्ति अनावश्यक रूप से प्रतिक्रिया देने लगता है। यह भी एंग्जाइटी का ही एक लक्षण होता है। हर व्यक्ति इस समस्या का सामना जीवन में एक ना एक बार अवश्य करता है क्योंकि यह हमारे शरीर के अंदर, हमारे दिमाग के द्वारा की गई प्रतिक्रियाओं के द्वारा होता है, जो कि किसी खतरे के प्रति हमें सूचित करने के लिए दी जाती है चाहे वह खतरा वास्तव में हमारे लिए खतरनाक हो अथवा ना हो। ऐसा कहा गया है कि कई बार ऐसा समय भी आता है जब एंग्जाइटी एक गंभीर समस्या बन जाती है और यह एंग्जाइटी अटैक के रूप में हमारे शरीर पर असर डालती है। यह पैनिक अटैक से बिल्कुल अलग होती है।

एंग्जाइटी अटैक के लक्षण

एंग्जाइटी अटैक के कुछ बहुत ही साधारण लक्षण होते हैं जिनमें से कुछ मानसिक लक्षण होते हैं तथा कुछ शारीरिक लक्षण हैं। यह यहां पर हमने उनमें से कुछ लक्षणों को लिखा है –

  • डर अथवा पैनिक
  • भयभीत होना
  • उदास महसूस करना
  • दिल की धड़कन का बढ़ जाना
  • पसीना आना
  • कंपकपी महसूस होना
  • थकावट अथवा कमजोरी का होना
  • पेट का खराब हो जाना
  • ध्यान लगाने में परेशानी महसूस करना
  • घुटन महसूस होना

यह भी संभव है कि आपको एंग्जाइटी और पैनिक अटैक एक साथ महसूस हो, इसके तुरंत समाधान के लिए आपको ऊपर लिखी गई तरकीबों का इस्तेमाल करना चाहिए। जिसके माध्यम से आप इस प्रकार की समस्या से स्वयं को बचा सकते हैं। पैनिक अटैक के विषय में तथा उससे छुटकारा पाने वाली कुछ अन्य तरीकों में शामिल होता है –

  • किसी वस्तु के ऊपर ध्यान केंद्रित करना
  • किसी मंत्र का बार-बार जाप करना,
  • अपनी आंखों को बंद कर लेना
  • फिर ऐसे स्थान पर जाना जहां पर जाकर आपको बहुत खुशी मिलती है।
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पैनिक अटैक के लक्षण

  • मरने का भय लगना
  • चीजों पर से आपका नियंत्रण हट रहा है, इस प्रकार का महसूस होना
  • किसी से छूटने का अहसास होना
  • दिल की धड़कनों में असमानता होना
  • सांस का कम होना
  • छाती में दर्द होना या फिर तनाव महसूस होना
  • अवसाद होना
  • दिमाग का एकदम हल्का हो जाना या फिर बेहोशी महसूस करना
  • शरीर में कंपकंपी होना या फिर शरीर के कुछ अंगों का ठंडा पड़ जाना ठंडा
  • गर्म महसूस करना

एंग्जाइटी के होने के पीछे की वजह क्या होती है

यदि आपको लगता है कि एंग्जाइटी के विषय में इस्तेमाल की जाने वाली त्वरित तरकीबें आपके लिए लाभदायक साबित नहीं हो रही है, तो आप इस विषय में किसी अच्छे विशेषज्ञ की सहायता प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप ऐसा सोचते हैं कि आपको सामान्यीकृत चिंता विकार (जी.ए.डी.) है और यह आपके सामान्य दिनचर्या तथा जीवन के सामान्य कार्यों के अंदर बाधा उत्पन्न कर रहा है तथा इस समस्या के कारण, आपके अंदर, शारीरिक लक्षण के रूप में उत्पन्न हो रहे हैं। ऐसे समय में आपको किसी विशेषज्ञ अथवा डॉक्टर के पास जाकर के इस विषय में चर्चा करनी चाहिए। एक मानसिक रोग विशेषज्ञ इस प्रकार की समस्याओं के विषय में अत्यधिक जानकारी रखते हैं। वह आपकी समस्या के प्रति उत्पन्न होने वाले ट्रिगर का पता लगाते हैं और आपके द्वारा लंबे समय तक इस्तेमाल की जा सकने वाली योजनाओं को इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। जिसे देने के लिए वह बिहेवियरल थेरेपी का इस्तेमाल करते हैं। इस विषय में उपलब्ध दवाइयों तथा इलाज के अन्य साधनों का प्रयोग भी किया जाता है। उदाहरण के लिए

  • यदि आपकी एंग्जाइटी की समस्या एक ऐसी घटना से उत्पन्न हो रही है जिसका अनुभव आपने अपने बीते समय में किया था तो आपको इस विषय में किसी लाइसेंस धारी थैरेपिस्ट से सहायता लेनी चाहिए।
  • यदि यह आपके दिमाग से उत्पन्न हो रही है तो यह क्रॉनिक एंग्जाइटी का एक रूप होता है तथा इसके लिए आपको दवाइयों की आवश्यकता पड़ सकती हैं ।

हो सकता है कि एंग्जाइटी की समस्या आपके जीवन का एक साधारण भाग हो, परंतु इस प्रकार की प्रक्रियाओं को आपके साधारण जीवन में कभी भी स्वयं के ऊपर नियंत्रण नहीं करने देना चाहिए। चाहे बहुत अधिक एंग्जाइटी की समस्या क्यों ना हो, हर प्रकार की एंग्जाइटी की समस्या का भी इलाज किया जा सकता है। जिससे कि इनके द्वारा उत्पन्न लक्षण आपके लिए घातक साबित ना हो। एक बार जब आपके लिए यह निर्धारित कर दिया जाता है कि कौन सा इलाज आपके लिए सबसे बेहतर है, तो आप इस समस्या के साथ भी अपना जीवन व्यतीत करना सीख लेते हैं और आपका जीवन अधिक प्रसन्नतापूर्वक व्यतीत होने लगता है तथा जीवन से अन्य प्रकार के नकारात्मक सोच खत्म होने लगती हैं।

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